फीफा वर्ल्ड कप 2026: ईरान फुटबॉल फेडरेशन ने अमेरिकी यात्रा पाबंदियों के खिलाफ फीफा में की शिकायत
सारांश
मुख्य बातें
ईरान फुटबॉल फेडरेशन ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 के दौरान सह-मेजबान अमेरिका द्वारा ईरानी खिलाड़ियों पर लगाई गई यात्रा पाबंदियों को लेकर फीफा में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया है। फेडरेशन का कहना है कि ये पाबंदियाँ टूर्नामेंट में समान प्रतिस्पर्धी माहौल के सिद्धांत का उल्लंघन करती हैं और टीम की तैयारी को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।
क्या हैं यात्रा पाबंदियाँ
वीजा शर्तों के अनुसार, ईरानी खिलाड़ियों को मैच से केवल एक दिन पहले अमेरिकी धरती पर आने की अनुमति है और मैच वाले दिन ही देश छोड़ना अनिवार्य है। यह प्रतिबंध तब और गंभीर हो जाता है जब बेल्जियम के खिलाफ आगामी मैच की तैयारी की बात आती है, जहाँ पर्याप्त अभ्यास समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
फेडरेशन का आधिकारिक बयान
फेडरेशन ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा, 'हमारा मानना है कि इस तरह की पाबंदियाँ सभी हिस्सा लेने वाली टीमों को बराबर माहौल देने के नियम के खिलाफ हैं और टीमों की तैयारी की प्रक्रिया पर बुरा असर डाल सकती हैं। फेडरेशन आधिकारिक तौर पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करेगा और सही तरीकों से फीफा में शिकायत दर्ज कराएगा।' फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि इन बाधाओं के बावजूद टीम बेल्जियम के खिलाफ मैच पर पूरा ध्यान केंद्रित रखेगी।
कोच आमिर घालेनोई की पीड़ा
ईरान के मुख्य कोच आमिर घालेनोई ने लॉस एंजिल्स में न्यूज़ीलैंड के साथ 2-2 से ड्रॉ के बाद मैच-पश्चात प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी परेशानी खुलकर साझा की। उन्होंने कहा, 'हमारी टीम को अचानक बताया गया कि उन्हें लॉस एंजिल्स में मैच के तुरंत बाद मेक्सिको लौटना होगा। हमें प्लेन में बैठकर तिजुआना में अपने कैंप में लौटने के लिए कहा गया, और हम इससे सच में परेशान हैं।'
घालेनोई ने आगे कहा, 'हमें गेम से दो रात पहले पहुँचना था, लेकिन हमें इसकी इजाज़त नहीं थी। मुझे लगता है कि हमारी टीम पूरे वर्ल्ड कप में सबसे ज़्यादा दबाव में है। हमारा फेडरेशन यहाँ नहीं है, हमारा मीडिया यहाँ नहीं है, हमारा मैनेजमेंट यहाँ नहीं है।'
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच राजनयिक तनाव ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर बना हुआ है। गौरतलब है कि फीफा के नियमों के तहत सभी भाग लेने वाली टीमों को समान परिस्थितियाँ प्रदान करना मेजबान देश की जिम्मेदारी है। यह पहला मौका नहीं है जब किसी राजनीतिक विवाद ने फुटबॉल के मैदान तक दस्तक दी हो, लेकिन इस बार मामला सीधे खेल की निष्पक्षता को प्रभावित कर रहा है।
आगे क्या होगा
फेडरेशन की शिकायत के बाद फीफा का रुख अहम होगा। यदि फीफा हस्तक्षेप करता है, तो अमेरिकी प्रशासन पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल ईरानी टीम का ध्यान बेल्जियम के खिलाफ आगामी मैच पर है, जो टूर्नामेंट में उनके भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।