फीफा विश्व कप: मिस्र से 1-1 ड्रॉ के बाद ईरानी कोच घालेनोई का अमेरिकी यात्रा पाबंदियों पर तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के मुख्य कोच आमिर घालेनोई ने 27 जून 2026 को सिएटल में फीफा विश्व कप के ग्रुप-स्टेज के अंतिम मैच में मिस्र के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ के बाद अमेरिका द्वारा ईरानी दल पर लगाई गई यात्रा पाबंदियों की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन पाबंदियों ने टीम की शारीरिक और मानसिक तैयारी को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
मुश्किल हालात में खेला ईरान
ईरानी दल को अपने तीनों ग्रुप-स्टेज मैचों के लिए मेक्सिको के तिजुआना में अपने बेस कैंप से सफर करना पड़ा। मिस्र के विरुद्ध मैच से पहले अमेरिकी अधिकारियों ने कुछ हद तक नरमी दिखाई, लेकिन टीम को किक-ऑफ से मात्र दो दिन पहले ही सिएटल क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति मिली। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे राजनयिक तनाव के कारण ईरान को टूर्नामेंट में भाग लेने से लगभग वंचित कर दिया गया था।
कोच घालेनोई का बयान
मैच के बाद पत्रकारों से बात करते हुए घालेनोई ने कहा, 'मेजबान देश ने हमारे साथ बहुत गलत बर्ताव किया। अगर हमें दो सप्ताह पहले आने दिया जाता, तो हम शारीरिक और मानसिक रूप से कहीं बेहतर स्थिति में होते। उन्होंने हमें वह इंसाफ नहीं दिया।' उन्होंने यह भी कहा, 'मुझे लगता था कि हम सच में पूरी तरह दबी हुई टीम हैं, लेकिन इन तीन मैचों के बाद मैंने देखा कि हमारी किस्मत भी खराब रही।'
फीफा से अपील
घालेनोई ने फीफा से आग्रह किया कि भविष्य के विश्व कप आयोजनों में मेजबान देशों को किसी भी टीम और खिलाड़ियों के साथ ऐसा व्यवहार करने की अनुमति न दी जाए। उन्होंने कहा, 'टीम एक पवित्र मकसद के साथ आई थी — ट्रेनिंग करना और अच्छा खेलना।'
रिकवरी में और देरी
मैच समाप्त होते ही ईरानी दल को तिजुआना वापस लौटना पड़ा, जिससे नॉकआउट चरण के लिए उनकी रिकवरी प्रक्रिया और जटिल हो गई। घालेनोई ने बताया कि वे खिलाड़ियों को एक दिन का आराम देंगे और मानसिक शांति के लिए समुद्र किनारे जाने की योजना बना रहे हैं।
आगे क्या
ईरान अब नॉकआउट चरण में अपनी जगह पक्की होने का इंतजार कर रहा है। यह विवाद खेल और राजनीति के बीच बढ़ते टकराव को रेखांकित करता है, और फीफा पर दबाव बढ़ा सकता है कि वह भविष्य के आयोजनों में राजनयिक पाबंदियों के असर को सीमित करने के लिए स्पष्ट नीति बनाए।