कोरिया फुटबॉल एसोसिएशन ने मांगी माफी, 2011-12 में विदेशी रेफरी को सेक्सुअल मनोरंजन देने के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
साउथ कोरिया फुटबॉल संघ (केएफए) ने 8 अगस्त 2026 को उन गंभीर आरोपों पर सार्वजनिक माफी मांगी, जिनमें कहा गया है कि 2011 और 2012 में सोल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मुकाबलों के दौरान विदेशी रेफरी और मैच अधिकारियों के लिए कथित तौर पर सेक्सुअल मनोरंजन की व्यवस्था की गई थी। यह माफी ऐसे समय में आई है जब केएफए फीफा वर्ल्ड कप 2026 में निराशाजनक प्रदर्शन और एक के बाद एक विवादों के कारण भारी दबाव में है।
मुख्य आरोप और माफी
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केएफए ने 2011 और 2012 में कई वर्ल्ड कप व ओलंपिक क्वालीफायर तथा फ्रेंडली मुकाबलों के दौरान विदेशी रेफरी और मैच अधिकारियों के लिए इस प्रकार के मनोरंजन का कथित तौर पर इंतजाम किया था। संघ ने कहा कि वह एक दशक पुरानी इन कथित अनियमितताओं से जुड़ी संसदीय सुनवाई, अपने मुख्यालय पर पुलिस की छापेमारी और मीडिया रिपोर्टों के कारण उत्पन्न निराशा और चिंता के लिए 'बेहद शर्मिंदा' है।
पुलिस छापा और संसदीय जांच
इस हफ्ते की शुरुआत में पुलिस ने केएफए के मुख्यालय पर छापा मारा, जो राष्ट्रीय टीम के पूर्व हेड कोच होंग म्युंग-बो की 2024 में हुई नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत था। पिछले महीने एक संसदीय सुनवाई में केएफए के पूर्व अध्यक्ष चुंग मोंग-ग्यू और होंग से राष्ट्रीय टीम के प्रबंधन और संघ के कामकाज पर सवाल पूछे गए। यह ऐसे समय में हुआ जब साउथ कोरिया का वर्ल्ड कप अभियान ग्रुप चरण में ही समाप्त हो गया था।
वर्ल्ड कप विफलता और नेतृत्व परिवर्तन
साउथ कोरिया ग्रुप-ए में तीन अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा और नॉकआउट चरण में जगह नहीं बना सका। टीम ने चेक गणराज्य को हराया, लेकिन मैक्सिको और साउथ अफ्रीका से हार गई। इस निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पहले हेड कोच होंग म्युंग-बो को हटाया गया, और फिर चुंग मोंग-ग्यू ने भी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। गौरतलब है कि फीफा वर्ल्ड कप 2002 में कोरिया गणराज्य की पुरुष टीम अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर पहुंची थी, जब उसने जापान के साथ सह-मेजबानी करते हुए सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था — हालांकि वह जर्मनी से हार गई थी।
सुधार का वादा
केएफए ने स्पष्ट किया कि फिलहाल संघ में कोई गलत प्रथा या कॉर्पोरेट कार्ड का दुरुपयोग नहीं हो रहा है। संघ ने पारदर्शिता और नैतिक मानकों को मजबूत करने तथा जनता का विश्वास पुनः अर्जित करने के लिए व्यापक सुधारों का वादा किया है। यह देखना अहम होगा कि क्या ये वादे ठोस संस्थागत बदलाव में तब्दील होते हैं, या केवल जनसंपर्क अभ्यास बनकर रह जाते हैं।