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युवराज सिंह ने लॉर्ड्स में बजाई ऐतिहासिक 'पाँच-मिनट वाली घंटी', भारत-इंग्लैंड तीसरे वनडे की हुई शानदार शुरुआत

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युवराज सिंह ने लॉर्ड्स में बजाई ऐतिहासिक 'पाँच-मिनट वाली घंटी', भारत-इंग्लैंड तीसरे वनडे की हुई शानदार शुरुआत

सारांश

लॉर्ड्स की 'पाँच-मिनट वाली घंटी' बजाने का सम्मान इस बार मिला 2011 विश्व कप के नायक युवराज सिंह को — वही मैदान जहाँ 2002 में उन्होंने नेटवेस्ट फाइनल में 63 गेंदों पर 69 रन ठोककर इतिहास रचा था। क्रिकेट के इस मंदिर से उनका रिश्ता मैदान से परे भी उतना ही गहरा है।

मुख्य बातें

युवराज सिंह ने 19 जुलाई को लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर भारत-इंग्लैंड तीसरे वनडे से पहले 'पाँच-मिनट वाली घंटी' बजाई।
इस अवसर पर उनकी पत्नी हेजल कीच , MCC के अधिकारी, ब्रायन लारा और क्लाइव लॉयड भी मौजूद थे।
लॉर्ड्स में यह घंटी बजाने की परंपरा 2007 में शुरू हुई थी।
युवराज ने 2002 नेटवेस्ट फाइनल में इसी मैदान पर 63 गेंदों पर 69 रन बनाए थे।
युवराज के अंतरराष्ट्रीय करियर में 40 टेस्ट , 304 वनडे और 58 टी20 मैच शामिल हैं।

भारत के पूर्व ऑलराउंडर और 2011 वनडे विश्व कप के 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' युवराज सिंह ने रविवार, 19 जुलाई को लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए तीसरे वनडे से पहले मैदान की मशहूर 'पाँच-मिनट वाली घंटी' बजाई। इस सम्मानजनक परंपरा में शामिल होकर युवराज ने 'होम ऑफ क्रिकेट' के साथ अपने पुराने संबंध को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

मुख्य घटनाक्रम

युवराज पेविलियन में 'बॉलर्स राइटिंग रूम' के बाहर लगी इस प्रतिष्ठित घंटी के पास खड़े हुए और उत्साहित दर्शकों के सामने यह रस्म पूरी की। इस अवसर पर उनके साथ उनकी पत्नी एवं अभिनेत्री हेजल कीच, मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) के अधिकारी और सदस्य भी उपस्थित थे। वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा और पूर्व कप्तान क्लाइव लॉयड भी इस निर्णायक वनडे मुकाबले के साक्षी बने।

लॉर्ड्स की घंटी परंपरा का इतिहास

लॉर्ड्स में 'पाँच-मिनट वाली घंटी' बजाने की यह परंपरा 2007 में शुरू हुई थी। इसके तहत किसी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर, प्रशासक अथवा खेल के प्रतिष्ठित प्रशंसक को आमंत्रित किया जाता है, जो यह संकेत देते हैं कि दिन का खेल शुरू होने में ठीक पाँच मिनट शेष हैं। यह निमंत्रण अपने आप में एक विशिष्ट सम्मान माना जाता है। युवराज के घंटी बजाने की घोषणा मैच से पूर्व ही कर दी गई थी।

लॉर्ड्स से युवराज का पुराना नाता

'क्रिकेट का मक्का' कहे जाने वाले लॉर्ड्स में युवराज की मौजूदगी ने 2002 की नेटवेस्ट सीरीज की यादें ताज़ा कर दीं, जब भारत ने इसी मैदान पर ऐतिहासिक फाइनल जीता था। उस फाइनल में युवराज ने 63 गेंदों पर 69 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली थी। अपने शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर में युवराज ने भारत के लिए 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 टी20 मैच खेले।

संन्यास के बाद मेंटॉर की भूमिका

क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद युवराज सिंह ने किसी टीम के साथ बतौर कोच औपचारिक रूप से नहीं जुड़े हैं। हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अभिषेक शर्मा, शुभमन गिल और प्रभसिमरन सिंह जैसे युवा खिलाड़ियों को मेंटॉर करके अगली पीढ़ी को तराशने में अपना योगदान दिया है। यह लॉर्ड्स में उनकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि क्रिकेट जगत में उनका सम्मान आज भी अटूट है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि MCC की ओर से उस पीढ़ी को दी गई स्वीकृति है जिसने भारतीय क्रिकेट को वैश्विक ताकत में बदला। गौरतलब है कि यह सम्मान आमतौर पर सक्रिय खिलाड़ियों या प्रशासकों को मिलता है, लेकिन युवराज जैसे संन्यासी खिलाड़ी को यह मिलना दर्शाता है कि लॉर्ड्स भी 2002 और 2011 की उनकी विरासत को उतनी ही अहमियत देता है। यह उस सांस्कृतिक पुल को भी रेखांकित करता है जो भारतीय क्रिकेट ने अंग्रेज़ी परंपराओं के साथ बनाया है — और जो आज के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लॉर्ड्स में 'पाँच-मिनट वाली घंटी' बजाने की परंपरा क्या है?
यह परंपरा 2007 में शुरू हुई थी, जिसमें किसी प्रतिष्ठित क्रिकेटर, प्रशासक या खेल प्रेमी को मैच शुरू होने से पाँच मिनट पहले घंटी बजाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। यह लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड द्वारा दिया जाने वाला एक विशेष सम्मान माना जाता है।
युवराज सिंह को लॉर्ड्स में घंटी बजाने का मौका क्यों मिला?
युवराज सिंह 2011 वनडे विश्व कप के 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' रहे हैं और 2002 नेटवेस्ट सीरीज फाइनल में लॉर्ड्स पर यादगार पारी खेल चुके हैं। MCC ने उन्हें भारत-इंग्लैंड तीसरे वनडे के अवसर पर यह सम्मान देने की घोषणा पहले ही कर दी थी।
युवराज सिंह का लॉर्ड्स से क्या पुराना संबंध है?
युवराज ने 2002 नेटवेस्ट सीरीज फाइनल में लॉर्ड्स पर 63 गेंदों पर 69 रन बनाए थे, जो भारत की ऐतिहासिक जीत में अहम योगदान था। उनकी इस पारी को भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार प्रदर्शनों में गिना जाता है।
युवराज सिंह के अंतरराष्ट्रीय करियर के आँकड़े क्या हैं?
युवराज सिंह ने भारत के लिए 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। वे 2011 वनडे विश्व कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य थे और उस टूर्नामेंट के 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' रहे।
संन्यास के बाद युवराज सिंह क्रिकेट में क्या कर रहे हैं?
संन्यास के बाद युवराज ने किसी टीम के साथ औपचारिक कोचिंग भूमिका नहीं निभाई है, लेकिन वे अभिषेक शर्मा, शुभमन गिल और प्रभसिमरन सिंह जैसे युवा खिलाड़ियों को मेंटॉर करते रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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