युवराज सिंह ने लॉर्ड्स में बजाई ऐतिहासिक 'पाँच-मिनट वाली घंटी', भारत-इंग्लैंड तीसरे वनडे की हुई शानदार शुरुआत
सारांश
मुख्य बातें
भारत के पूर्व ऑलराउंडर और 2011 वनडे विश्व कप के 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' युवराज सिंह ने रविवार, 19 जुलाई को लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए तीसरे वनडे से पहले मैदान की मशहूर 'पाँच-मिनट वाली घंटी' बजाई। इस सम्मानजनक परंपरा में शामिल होकर युवराज ने 'होम ऑफ क्रिकेट' के साथ अपने पुराने संबंध को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
युवराज पेविलियन में 'बॉलर्स राइटिंग रूम' के बाहर लगी इस प्रतिष्ठित घंटी के पास खड़े हुए और उत्साहित दर्शकों के सामने यह रस्म पूरी की। इस अवसर पर उनके साथ उनकी पत्नी एवं अभिनेत्री हेजल कीच, मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) के अधिकारी और सदस्य भी उपस्थित थे। वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा और पूर्व कप्तान क्लाइव लॉयड भी इस निर्णायक वनडे मुकाबले के साक्षी बने।
लॉर्ड्स की घंटी परंपरा का इतिहास
लॉर्ड्स में 'पाँच-मिनट वाली घंटी' बजाने की यह परंपरा 2007 में शुरू हुई थी। इसके तहत किसी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर, प्रशासक अथवा खेल के प्रतिष्ठित प्रशंसक को आमंत्रित किया जाता है, जो यह संकेत देते हैं कि दिन का खेल शुरू होने में ठीक पाँच मिनट शेष हैं। यह निमंत्रण अपने आप में एक विशिष्ट सम्मान माना जाता है। युवराज के घंटी बजाने की घोषणा मैच से पूर्व ही कर दी गई थी।
लॉर्ड्स से युवराज का पुराना नाता
'क्रिकेट का मक्का' कहे जाने वाले लॉर्ड्स में युवराज की मौजूदगी ने 2002 की नेटवेस्ट सीरीज की यादें ताज़ा कर दीं, जब भारत ने इसी मैदान पर ऐतिहासिक फाइनल जीता था। उस फाइनल में युवराज ने 63 गेंदों पर 69 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली थी। अपने शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर में युवराज ने भारत के लिए 40 टेस्ट, 304 वनडे और 58 टी20 मैच खेले।
संन्यास के बाद मेंटॉर की भूमिका
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद युवराज सिंह ने किसी टीम के साथ बतौर कोच औपचारिक रूप से नहीं जुड़े हैं। हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अभिषेक शर्मा, शुभमन गिल और प्रभसिमरन सिंह जैसे युवा खिलाड़ियों को मेंटॉर करके अगली पीढ़ी को तराशने में अपना योगदान दिया है। यह लॉर्ड्स में उनकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि क्रिकेट जगत में उनका सम्मान आज भी अटूट है।