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मान कौर: 93 साल में दौड़ की शुरुआत, 101 में जीता विश्व स्वर्ण — भारत की 'रनिंग क्वीन' की अविश्वसनीय कहानी

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मान कौर: 93 साल में दौड़ की शुरुआत, 101 में जीता विश्व स्वर्ण — भारत की 'रनिंग क्वीन' की अविश्वसनीय कहानी

सारांश

93 साल की उम्र में ट्रैक पर उतरीं, 101 में विश्व स्वर्ण जीता — मान कौर की कहानी सिर्फ एथलेटिक्स की नहीं, इरादे की जीत की कहानी है। पीएम मोदी के 'फिट इंडिया मूवमेंट' की प्रेरणा बनीं इस 'रनिंग क्वीन' ने साबित किया कि जुनून की कोई उम्र नहीं होती।

मुख्य बातें

मान कौर का जन्म 1 मार्च 1916 को पटियाला, पंजाब में हुआ था।
उन्होंने 93 वर्ष की आयु में पहली बार दौड़ना शुरू किया, प्रेरणा उनके पुत्र गुरुदेव सिंह से मिली।
101 वर्ष की आयु में ऑकलैंड वर्ल्ड मास्टर्स गेम्स में 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण जीता — यह उनका 17वाँ स्वर्ण पदक था।
वैंकूवर मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप (2016) में एक ही आयोजन में 4 स्वर्ण पदक जीते।
भारत सरकार ने 2019 में उन्हें 'नारी शक्ति पुरस्कार' से सम्मानित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'फिट इंडिया मूवमेंट' में उन्हें विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया।
मान कौर का निधन 31 जुलाई 2021 को हुआ।

मान कौर — एक ऐसा नाम जिसने साबित किया कि उम्र केवल एक संख्या है। पटियाला, पंजाब में 1 मार्च 1916 को जन्मी मान कौर ने 93 वर्ष की आयु में पहली बार दौड़ना शुरू किया और अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स में 17 से अधिक स्वर्ण पदक जीतकर पूरी दुनिया को चौंका दिया। उनकी यह यात्रा न केवल भारत, बल्कि विश्वभर के करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई।

कैसे शुरू हुई दौड़ की यह अनोखी यात्रा

मान कौर का अधिकांश जीवन एक गृहिणी के रूप में बीता। उनके पुत्र गुरुदेव सिंह एक अनुभवी धावक रहे हैं। बेटे को दौड़ते देख वृद्धावस्था में मान के मन में भी एथलेटिक्स के प्रति जिज्ञासा और जुनून जागा। 93 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार ट्रैक पर कदम रखा। उनकी पहली दौड़ 100 मीटर की थी, और उस पहली ही दौड़ में उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकीं मान कौर

101 वर्ष की आयु में मान कौर ने न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आयोजित वर्ल्ड मास्टर्स गेम्स में 100 मीटर की दौड़ मात्र 1 मिनट 14 सेकंड में पूरी कर स्वर्ण पदक जीता। यह उनके करियर का 17वाँ स्वर्ण पदक था। उनके असाधारण प्रदर्शन को देख वहाँ उपस्थित दर्शक और मीडिया अवाक रह गए। ऑकलैंड की मीडिया ने उन्हें 'चंडीगढ़ का करिश्मा' की उपाधि दी।

इससे पूर्व 2016 में मान कौर ने अमेरिका के सैक्रामेंटो में 100 मीटर और 200 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते। उसी वर्ष सितंबर 2016 में कनाडा के वैंकूवर में आयोजित मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 100 मीटर दौड़, 200 मीटर दौड़, भाला फेंक और गोला फेंक — चारों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक हासिल किए। जर्मनी में आयोजित विश्व मास्टर्स एथलेटिक्स में भी उन्होंने 101 वर्ष की आयु में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इन उपलब्धियों के चलते उन्हें 'रनिंग क्वीन ऑफ इंडिया' की उपाधि से नवाज़ा गया।

सरकारी सम्मान और पीएम मोदी का आमंत्रण

मान कौर की अदम्य जिजीविषा और उल्लेखनीय उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने 2019 में उन्हें प्रतिष्ठित 'नारी शक्ति पुरस्कार' से सम्मानित किया। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'फिट इंडिया मूवमेंट' का शुभारंभ किया, तो उन्होंने मान कौर को एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में विशेष रूप से आमंत्रित किया। यह इस बात का प्रमाण था कि उनकी कहानी राष्ट्रीय स्वास्थ्य चेतना के लिए एक जीवंत उदाहरण बन चुकी थी।

विरासत और निधन

उम्र की सीमाओं को बार-बार चुनौती देने वाली और अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स में देश का नाम रोशन करने वाली मान कौर का 31 जुलाई 2021 को निधन हो गया। गौरतलब है कि उन्होंने जीवन के नौवें दशक में एथलेटिक्स में कदम रखा और दसवें दशक में विश्व विजेता बनीं — यह उपलब्धि आज भी अतुलनीय है। उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती रहेगी कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने उम्र कभी बाधा नहीं बनती।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका गहरा आयाम यह है कि भारत में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संस्थागत खेल अवसंरचना लगभग शून्य है — मान कौर ने बिना किसी सरकारी प्रशिक्षण तंत्र के यह मुकाम हासिल किया। 'फिट इंडिया मूवमेंट' में उनकी उपस्थिति प्रतीकात्मक थी, लेकिन वरिष्ठ एथलीटों के लिए ठोस नीतिगत समर्थन अब भी अपेक्षित है। उनकी विरासत का सही सम्मान तभी होगा जब उनकी कहानी नीति-निर्माताओं को मास्टर्स एथलेटिक्स के लिए समर्पित ढाँचा बनाने के लिए प्रेरित करे।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मान कौर कौन थीं और उन्होंने दौड़ना कब शुरू किया?
मान कौर पंजाब के पटियाला में 1 मार्च 1916 को जन्मी एक भारतीय मास्टर्स एथलीट थीं, जिन्होंने 93 वर्ष की आयु में दौड़ना शुरू किया। अपने पुत्र गुरुदेव सिंह को दौड़ते देख उन्हें यह प्रेरणा मिली।
मान कौर की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या थी?
101 वर्ष की आयु में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में वर्ल्ड मास्टर्स गेम्स में 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतना उनकी सबसे चर्चित उपलब्धि रही। यह उनके करियर का 17वाँ स्वर्ण पदक था और उन्होंने यह दौड़ 1 मिनट 14 सेकंड में पूरी की।
मान कौर को कौन-से सरकारी सम्मान मिले?
भारत सरकार ने 2019 में मान कौर को 'नारी शक्ति पुरस्कार' से सम्मानित किया। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'फिट इंडिया मूवमेंट' के शुभारंभ पर उन्हें विशेष प्रेरणादायी अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था।
मान कौर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किन देशों में पदक जीते?
मान कौर ने न्यूजीलैंड (ऑकलैंड), अमेरिका (सैक्रामेंटो), कनाडा (वैंकूवर) और जर्मनी में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीते। वैंकूवर में उन्होंने एकल आयोजन में 4 स्वर्ण पदक हासिल किए।
मान कौर का निधन कब हुआ?
मान कौर का निधन 31 जुलाई 2021 को हुआ। वे अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक एथलेटिक्स और स्वास्थ्य के प्रति समर्पित रहीं और विश्वभर में 'रनिंग क्वीन ऑफ इंडिया' के नाम से जानी जाती थीं।
राष्ट्र प्रेस
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