रामकिशन शर्मा: 75 साल की उम्र में 401 मेडल, इंडिया और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हरियाणा के 'धाकड़ ताऊ'
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के चरखी-दादरी निवासी रामकिशन शर्मा ने 75 वर्ष की आयु में वह मुकाम हासिल किया है जो अधिकांश युवा एथलीट भी नहीं कर पाते। 2016 से 2025 के बीच राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की मास्टर एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में उन्होंने 401 मेडल और 336 सर्टिफिकेट अर्जित किए हैं। यह उपलब्धि अब इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स दोनों में दर्ज है।
देर से शुरू हुआ सफर, जल्दी बना इतिहास
5 मई 1950 को जन्मे रामकिशन शर्मा ने 65 वर्ष की उम्र में मास्टर एथलेटिक्स गेम्स में कदम रखा। 25 दिसंबर 2016 को उन्होंने अपनी पहली प्रतियोगिता में भाग लिया। मास्टर एथलेटिक्स — जिसे 'वेटरन एथलेटिक्स' भी कहा जाता है — 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के एथलीटों के लिए आयोजित होती हैं। महज 10 वर्षों में रामकिशन ने यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
मेडलों का विवरण: राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय तक
रामकिशन 100 मीटर, 200 मीटर, 400 मीटर, 800 मीटर दौड़, लॉन्ग जंप, हर्डल और ट्रिपल जंप जैसे विविध इवेंट्स में प्रतिस्पर्धा करते हैं। उनके मेडल का विवरण इस प्रकार है: राष्ट्रीय स्तर पर 162 गोल्ड, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 10 गोल्ड और राज्य स्तर पर 98 गोल्ड मेडल। इसके अतिरिक्त उन्होंने 27 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज मेडल भी जीते हैं।
कोरोना योद्धा के रूप में भी पहचान
खेल के मैदान से परे, कोरोना महामारी के दौरान रामकिशन ने आर्य समाज की टीम के साथ घर-घर जाकर सरकारी और गैर-सरकारी इमारतों में मास्क और राशन वितरण किया। उनकी इस सेवा के लिए उन्हें 40 सर्टिफिकेट प्राप्त हुए और 'कोरोना योद्धा' के रूप में उनका नाम भी इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है।
नशा मुक्ति अभियान में तीन दशकों की सेवा
रामकिशन पिछले 30-35 वर्षों से नशा मुक्ति अभियान से जुड़े हैं और उन्हें करीब 40 गाँवों से सम्मान पत्र मिल चुके हैं। युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, 'आज का युवा नशे की गिरफ्त में है, वो बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, शराब के आदी हैं। नशे से उनकी जिंदगी खराब हो रही है। नशा नाश की जड़ है। मैं उनसे अपील करता हूँ कि नशे से बचें और सुबह 4 बजे बिस्तर छोड़ दें। मैदान पर जाएँ और प्रैक्टिस करें, योगा करें।'
प्रेरणा का जीवंत उदाहरण
75 वर्ष की आयु में रामकिशन शर्मा की फिटनेस और अनुशासन न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है। उनका यह सफर यह साबित करता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और नियमित परिश्रम से उम्र कभी बाधा नहीं बन सकती। आने वाले वर्षों में वे और अधिक प्रतियोगिताओं में भाग लेने की योजना बना रहे हैं।