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मनिंदर सिंह: आयरलैंड-इंग्लैंड में हार टीम इंडिया के लिए ज़रूरी 'रियलिटी चेक', अति-आत्मविश्वास टूटना अच्छा

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मनिंदर सिंह: आयरलैंड-इंग्लैंड में हार टीम इंडिया के लिए ज़रूरी 'रियलिटी चेक', अति-आत्मविश्वास टूटना अच्छा

सारांश

टी20 विश्व कप 2026 जीतने के बाद आयरलैंड और इंग्लैंड में लगातार हार — पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह इसे टीम इंडिया का ज़रूरी 'रियलिटी चेक' मानते हैं। उनके मुताबिक, तीन टीमें बनाने वाला अति-आत्मविश्वास टूटना ज़रूरी था, और ज़िम्बाब्वे दौरा युवा खिलाड़ियों के लिए खुद को साबित करने का मौका है।

मुख्य बातें

पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह ने कहा कि आयरलैंड और इंग्लैंड में सीरीज हार टीम इंडिया के लिए ज़रूरी 'रियलिटी चेक' है।
टी20 विश्व कप 2026 जीत के बाद टीम में अति-आत्मविश्वास था कि भारत एक साथ तीन अलग टीमें बना सकता है।
इंग्लैंड में गेंद की मूवमेंट, तेज़ उछाल और 'हार्ड लेंथ' गेंदों पर गलत शॉट चुनाव भारत की हार की प्रमुख तकनीकी वजह रही।
हरारे स्पोर्ट्स क्लब के खुले मैदान पर ब्लेसिंग मुजरबानी और ज़िम्बाब्वे के तेज़ गेंदबाज़ भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
मनिंदर ने लगातार प्लेइंग इलेवन बदलाव को सुनियोजित परीक्षण प्रक्रिया बताया — अगले 1 से 1.5 साल में स्थिरता आने की उम्मीद।
सूर्यवंशी , तिलक वर्मा , ईशान किशन , शिवम दुबे और सूर्यांश शेडगे के पास ज़िम्बाब्वे में खुद को साबित करने का मौका।

भारत के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह ने कहा है कि टी20 विश्व कप 2026 जीतने के बाद आयरलैंड और इंग्लैंड में लगातार सीरीज गँवाना नए कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली टीम इंडिया के लिए एक ज़रूरी 'रियलिटी चेक' साबित हुआ है। उनके अनुसार, यह झटका उस अति-आत्मविश्वास को तोड़ने के लिए आवश्यक था जो विश्व कप जीत के बाद टीम के इर्द-गिर्द बन गया था।

हार की असली वजह क्या रही

मनिंदर ने भारत-ज़िम्बाब्वे टी20 सीरीज के प्रसारक 'फैनकोड' द्वारा आयोजित एक विशेष बातचीत में कहा, 'मुझे लगता है कि हालात ने भी भूमिका निभाई। हमने भारत में विश्व कप जीता और यहीं आईपीएल खेला। भारत में गेंद बल्ले पर बहुत अच्छी तरह आती है, लेकिन इंग्लैंड में हालात थोड़े अलग थे। इसीलिए वहाँ ढलने में समय लगा और संघर्ष करना पड़ा।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि टीम के बारे में यह धारणा बन गई थी कि भारत के पास इतनी प्रतिभा है कि वह एक साथ तीन अलग-अलग टीमें बना सकता है। उनके अनुसार इस सोच ने ही अति-आत्मविश्वास को जन्म दिया।

चयनकर्ताओं के लिए अहम परीक्षण

मनिंदर सिंह ने कहा कि इन परिस्थितियों में एक क्रिकेटर खुद को कितनी जल्दी ढाल सकता है, यह सवाल अब चयनकर्ताओं की निगाह में सबसे ऊपर होगा। उन्होंने कहा, 'एक तरह से यह अच्छा है कि ऐसा झटका लगा, क्योंकि तीन टीमें बनाने वाला अति-आत्मविश्वास बहुत ज़्यादा था। वे उससे बाहर आएँगे।'

आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरे पर भारतीय बल्लेबाज गेंद की मूवमेंट और तेज़ उछाल का सामना करने में कमज़ोर पड़े। तेज़ गेंदबाज़ों की 'हार्ड लेंथ' गेंदों पर गलत शॉट चुनाव की वजह से विकेट गिरते रहे। इसके अलावा, प्लेइंग इलेवन में लगातार बदलाव और खिलाड़ियों की फिटनेस से जुड़ी चिंताएँ भी मुश्किलें बढ़ा रही थीं।

हरारे में नई चुनौती

हरारे स्पोर्ट्स क्लब के खुले मैदान और सीम-फ्रेंडली पिच पर भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए एक और कड़ी परीक्षा होगी। ज़िम्बाब्वे के तेज़ गेंदबाज़ ब्लेसिंग मुजरबानी, रिचर्ड नगारवा, ब्रैड इवांस और न्यूमैन न्यामहूरी की चौकड़ी शुरुआती ओवरों में सीम और उछाल से भारतीय बल्लेबाज़ों को परेशान कर सकती है।

मनिंदर ने कहा, 'वहाँ का स्टेडियम बहुत खुला है, इसलिए गेंद स्विंग करेगी। मैं यह देखने का इंतज़ार कर रहा हूँ कि सूर्यवंशी, तिलक वर्मा, ईशान किशन, शिवम दुबे और सूर्यांश शेडगे जैसे बल्लेबाज़ — जो इंग्लैंड में थोड़ा संघर्ष कर रहे थे — ऐसे हालात में खुद को कितनी जल्दी ढालते हैं।'

रोटेशन नीति पर नज़रिया

लगातार प्लेइंग इलेवन बदलने और कुलदीप यादव जैसे स्थापित खिलाड़ी को वनडे में मौका न देने पर भी सवाल उठे। मनिंदर ने इसे एक सुनियोजित परीक्षण प्रक्रिया बताया।

उन्होंने कहा, 'शायद वे खिलाड़ियों को परख रहे हैं। गौतम गंभीर और कोचिंग स्टाफ यह देख रहे हैं कि कौन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दबाव के लिए मानसिक रूप से तैयार है। अगले 1 से 1.5 साल में इस बारे में और स्पष्टता आ जाएगी, और शायद तब इतने बदलाव न दिखें।'

युवा खिलाड़ियों के लिए मौका

मनिंदर सिंह ने ज़िम्बाब्वे दौरे को युवा बल्लेबाज़ों के लिए खुद को साबित करने का अवसर बताया। उनके अनुसार, 'इन लड़कों के पास साबित करने के लिए कुछ होगा — कि आयरलैंड और इंग्लैंड में जो हुआ वह सिर्फ एक ऐसी सीरीज थी जिसमें लय नहीं बन पाई। यह एक और मौका है यह दिखाने का कि वे मुश्किल हालात में भी ढल सकते हैं।' आने वाले हफ्तों में टीम इंडिया का प्रदर्शन बताएगा कि यह 'रियलिटी चेक' वास्तव में कितना काम आया।

संपादकीय दृष्टिकोण

उससे सीखना ज़रूरी है। आयरलैंड और इंग्लैंड में हार केवल परिस्थितियों की देन नहीं थी; लगातार प्लेइंग इलेवन बदलाव और कुलदीप यादव जैसे अनुभवी खिलाड़ी को बाहर रखने जैसे फैसले भी सवालों के घेरे में हैं। ज़िम्बाब्वे के खिलाफ जीत इस संकट को ढक सकती है, लेकिन तकनीकी कमज़ोरियाँ — खासकर सीम और स्विंग के खिलाफ — अगर अनसुलझी रहीं तो बड़े टूर्नामेंट में फिर सामने आएँगी। रोटेशन को 'परीक्षण प्रक्रिया' कहना तब तक विश्वसनीय नहीं लगता जब तक चयन के मानदंड पारदर्शी न हों।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनिंदर सिंह ने टीम इंडिया की हार को 'रियलिटी चेक' क्यों कहा?
मनिंदर सिंह का कहना है कि टी20 विश्व कप 2026 जीत के बाद टीम में यह अति-आत्मविश्वास आ गया था कि भारत एक साथ तीन अलग टीमें बना सकता है। आयरलैंड और इंग्लैंड में सीरीज हार ने इस सोच को तोड़ा, जो उनके अनुसार टीम के दीर्घकालिक विकास के लिए ज़रूरी था।
इंग्लैंड में भारतीय बल्लेबाज़ क्यों संघर्ष करते दिखे?
मनिंदर सिंह के अनुसार, भारतीय खिलाड़ी भारत और आईपीएल की पिचों पर खेलने के आदी हैं जहाँ गेंद बल्ले पर अच्छी तरह आती है। इंग्लैंड में गेंद की मूवमेंट, तेज़ उछाल और 'हार्ड लेंथ' गेंदों के खिलाफ गलत शॉट चुनाव की वजह से विकेट गिरते रहे।
ज़िम्बाब्वे दौरे पर किन खिलाड़ियों पर रहेगी नज़र?
मनिंदर सिंह ने सूर्यवंशी, तिलक वर्मा, ईशान किशन, शिवम दुबे और सूर्यांश शेडगे का नाम लिया — ये वे खिलाड़ी हैं जो इंग्लैंड में संघर्ष करते दिखे। हरारे के खुले मैदान पर स्विंग और सीम की परिस्थितियों में इनका प्रदर्शन चयनकर्ताओं के लिए अहम होगा।
प्लेइंग इलेवन में लगातार बदलाव क्यों हो रहे हैं?
मनिंदर सिंह का मानना है कि कोच गौतम गंभीर और चयनकर्ता अगले 1 से 1.5 साल के लिए उन खिलाड़ियों की पहचान कर रहे हैं जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दबाव को मानसिक रूप से झेल सकते हैं। उनके अनुसार, यह एक सुनियोजित परीक्षण प्रक्रिया है।
ज़िम्बाब्वे के कौन से गेंदबाज़ भारत के लिए खतरा बन सकते हैं?
ब्लेसिंग मुजरबानी, रिचर्ड नगारवा, ब्रैड इवांस और न्यूमैन न्यामहूरी की तेज़ गेंदबाज़ी चौकड़ी हरारे स्पोर्ट्स क्लब के खुले मैदान पर सीम और उछाल का फायदा उठाकर भारतीय बल्लेबाज़ों को शुरुआती ओवरों में मुश्किल में डाल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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