मनजीत सिंह: 2010 एशियन गेम्स में रोइंग के दो पदक, ध्यानचंद अवॉर्ड से सम्मानित भारतीय नौकायन के सितारे
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौकायन (रोइंग) के दिग्गज खिलाड़ी मनजीत सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने 2010 के ग्वांग्झू एशियन गेम्स में दो अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतकर भारतीय नौकायन इतिहास में अपना अमिट स्थान बनाया। इसके अलावा उन्होंने 2008 के बीजिंग और 2012 के लंदन ओलंपिक में पुरुषों की लाइटवेट डबल स्कल्स स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
करियर की शुरुआत और प्रशिक्षण
10 अक्टूबर 1988 को जन्मे मनजीत सिंह ने 17 वर्ष की उम्र में नौकायन की दुनिया में कदम रखा — एक ऐसा खेल जिसकी भारत में उस समय पहुँच और लोकप्रियता सीमित थी। उनके शुरुआती कोच इस्माइल बेग और बजरंग लाल रहे, जिनमें से इस्माइल बेग को मनजीत अपने पूरे करियर की सबसे बड़ी प्रेरणा मानते हैं। यह रोइंग में करियर बनाने का उनका साहसिक निर्णय ही था जिसने उन्हें अंततः राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
राष्ट्रीय टीम में चयन और उपलब्धियाँ
मनजीत ने जूनियर नेशनल्स में रजत पदक जीतने के बाद हैदराबाद में एशियन जूनियर चैंपियनशिप के प्रशिक्षण शिविर के दौरान राष्ट्रीय टीम में चयन का मौका पाया। 75 किग्रा भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने वाले मनजीत ने ओलंपिक में देवेंद्र खंडवाल और संदीप कुमार के साथ मिलकर लाइटवेट डबल स्कल्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
एशियन गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन
2010 के ग्वांग्झू एशियन गेम्स मनजीत सिंह के करियर का सबसे उज्ज्वल अध्याय रहा। उन्होंने इस प्रतिष्ठित बहु-खेल प्रतियोगिता में दो अलग-अलग स्पर्धाओं में भारत के लिए पदक जीते — एक उपलब्धि जो भारतीय नौकायन में बेहद दुर्लभ मानी जाती है। गौरतलब है कि नौकायन एक ऐसी विधा है जहाँ भारत की मौजूदगी वैश्विक स्तर पर धीरे-धीरे मजबूत हो रही है, और ऐसे में एकल एशियन गेम्स में दोहरी पदक उपलब्धि असाधारण मानी जाती है।
ध्यानचंद अवॉर्ड और राष्ट्रीय सम्मान
अगस्त 2020 में मनजीत सिंह को खेल जगत के सर्वोच्च सम्मानों में से एक — खेल में आजीवन उपलब्धि के लिए प्रतिष्ठित ध्यानचंद अवॉर्ड — से नवाज़ा गया। अवॉर्ड मिलने पर उन्होंने कहा था, 'यह अवॉर्ड मेरे लिए बहुत मायने रखता है। यह मेरे लिए लाइफटाइम अचीवमेंट है। इस अवॉर्ड के साथ एक अचीवमेंट का एहसास होता है, जिसका मैं छह साल से इंतजार कर रहा था।'
कोचिंग के ज़रिए नई पीढ़ी को तैयार करना
सक्रिय प्रतिस्पर्धा से दूर हो जाने के बाद मनजीत सिंह भारतीय नौकायन की अगली पीढ़ी को तैयार करने में जुट गए हैं। वे नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षित कर उनमें देश के लिए पदक लाने का जज्बा भर रहे हैं — यह ऐसे समय में और अधिक महत्वपूर्ण है जब भारत में नौकायन की लोकप्रियता क्रमशः बढ़ रही है और इस खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की जरूरत है।