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मैनुअल फ्रेडरिक जन्मदिन विशेष: ओलंपिक कांस्य विजेता, केरल के पहले ओलंपिक मेडलिस्ट हॉकी गोलकीपर

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मैनुअल फ्रेडरिक जन्मदिन विशेष: ओलंपिक कांस्य विजेता, केरल के पहले ओलंपिक मेडलिस्ट हॉकी गोलकीपर

सारांश

20 अक्टूबर को जन्मे मैनुअल फ्रेडरिक ने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर केरल के पहले ओलंपिक मेडलिस्ट बनने का गौरव हासिल किया। 'टाइगर' के नाम से मशहूर इस गोलकीपर की विरासत आज भी भारतीय हॉकी की पहचान है।

मुख्य बातें

मैनुअल फ्रेडरिक का जन्म 20 अक्टूबर 1947 को केरल के कन्नूर में हुआ था।
1972 के म्यूनिख ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के साथ कांस्य पदक जीतकर वे केरल से ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने।
उन्होंने 1971 से सात वर्षों तक भारतीय राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और 1973 नीदरलैंड्स व 1978 अर्जेंटीना हॉकी विश्व कप में भाग लिया।
केरल से दूसरे ओलंपिक मेडलिस्ट पी.
श्रीजेश हैं — दोनों ही हॉकी गोलकीपर हैं।
भारत सरकार ने उन्हें 2019 में मेजर ध्यानचंद अवॉर्ड से सम्मानित किया।
31 अक्टूबर 2025 को 78 वर्ष की आयु में बेंगलुरु में उनका निधन हुआ।

भारतीय हॉकी के स्वर्णिम युग के प्रतीक मैनुअल फ्रेडरिक का जन्म 20 अक्टूबर 1947 को केरल के कन्नूर शहर में हुआ था। बतौर गोलकीपर उन्होंने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के साथ कांस्य पदक जीता और केरल से ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी बनने का गौरव प्राप्त किया। 31 अक्टूबर 2025 को 78 वर्ष की आयु में बेंगलुरु में उनका निधन हो गया था।

प्रारंभिक जीवन और खेल की शुरुआत

मैनुअल फ्रेडरिक ने अपने खेल जीवन की शुरुआत कन्नूर में फुटबॉल से की थी। हॉकी से उनका परिचय तब हुआ जब उन्हें बेंगलुरु में आर्मी की स्कूल टीम में भर्ती किया गया। इसी मंच से उन्होंने गोलकीपिंग की बारीकियाँ सीखीं और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की नींव रखी।

राष्ट्रीय टीम और प्रमुख उपलब्धियाँ

फ्रेडरिक ने 1971 में भारतीय हॉकी टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की और लगातार सात वर्षों तक देश का प्रतिनिधित्व किया। उनके करियर का सर्वोच्च पड़ाव 1972 में म्यूनिख में आयोजित ओलंपिक खेल रहे, जहाँ भारत ने कांस्य पदक जीता।

गौरतलब है कि उन्होंने दो हॉकी विश्व कपों में भी भारत का झंडा बुलंद किया — नीदरलैंड्स (1973) और अर्जेंटीना (1978)। 1973 के विश्व कप में भारतीय टीम ने रजत पदक हासिल किया था।

केरल की ओलंपिक विरासत में योगदान

फ्रेडरिक केरल से ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी थे। उनके बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले दूसरे केरलवासी पी. आर. श्रीजेश हैं, जिन्होंने 5 अगस्त 2021 को टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के साथ कांस्य पदक जीता। यह एक दिलचस्प संयोग है कि केरल के लिए दोनों ओलंपिक पदक राष्ट्रीय हॉकी टीम के गोलकीपरों ने जीते।

क्लब करियर और 'टाइगर' की पहचान

फ्रेडरिक का क्लब करियर भी उतना ही शानदार रहा। उन्होंने कर्नाटक में ASC और HAL, तथा सर्विसेज, उत्तर प्रदेश और ऐतिहासिक मोहन बागान क्लब का प्रतिनिधित्व किया। पेनल्टी स्ट्रोक बचाने में उनकी महारत और निडर गोलकीपिंग शैली के कारण साथी खिलाड़ी उन्हें स्नेह से 'टाइगर' कहकर पुकारते थे।

सम्मान और विरासत

भारतीय खेलों में उनके असाधारण योगदान के लिए फ्रेडरिक को 2019 में प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद अवॉर्ड से नवाज़ा गया — यह भारत सरकार का खेल के क्षेत्र में जीवनकाल उपलब्धि के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। उनका निधन 31 अक्टूबर 2025 को बेंगलुरु में हुआ, लेकिन केरल और भारतीय हॉकी के इतिहास में उनकी विरासत अमिट रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस दौर का दस्तावेज़ है जब भारतीय हॉकी विश्व की सर्वश्रेष्ठ टीमों में गिनी जाती थी। दिलचस्प यह है कि केरल के दोनों ओलंपिक मेडलिस्ट — फ्रेडरिक और श्रीजेश — गोलकीपर हैं, जो इस राज्य की गोलकीपिंग परंपरा की गहराई को दर्शाता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस ऐतिहासिक संयोग को नज़रअंदाज़ कर देती है। फ्रेडरिक को 2019 में मिले मेजर ध्यानचंद अवॉर्ड से यह भी स्पष्ट होता है कि उनका अवदान दशकों बाद भी उतना ही प्रासंगिक है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैनुअल फ्रेडरिक कौन थे?
मैनुअल फ्रेडरिक भारतीय पुरुष हॉकी टीम के गोलकीपर थे, जिन्होंने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीता। वे केरल राज्य से ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने।
मैनुअल फ्रेडरिक ने ओलंपिक में कौन-सा पदक जीता था?
फ्रेडरिक ने 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के साथ कांस्य पदक जीता था। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का सबसे महत्वपूर्ण क्षण था।
केरल से दूसरे ओलंपिक मेडलिस्ट कौन हैं?
फ्रेडरिक के बाद केरल से ओलंपिक पदक जीतने वाले दूसरे खिलाड़ी पी. आर. श्रीजेश हैं, जिन्होंने 5 अगस्त 2021 को टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के साथ कांस्य पदक जीता। दोनों ही हॉकी टीम के गोलकीपर हैं।
मैनुअल फ्रेडरिक को 'टाइगर' क्यों कहा जाता था?
फ्रेडरिक की निडर और साहसिक गोलकीपिंग शैली तथा पेनल्टी स्ट्रोक बचाने की महारत के कारण उनके साथी खिलाड़ी उन्हें 'टाइगर' कहकर पुकारते थे।
मैनुअल फ्रेडरिक को कौन-सा राष्ट्रीय सम्मान मिला था?
भारत सरकार ने मैनुअल फ्रेडरिक को 2019 में मेजर ध्यानचंद अवॉर्ड से सम्मानित किया, जो खेल के क्षेत्र में जीवनकाल उपलब्धि के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित सम्मान है।
राष्ट्र प्रेस
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