पारुल चौधरी का एशियन गेम्स 2026 में दोहरा कमाल: 5000 मीटर में भी ब्रॉन्ज, दो पदकों की हैट्रिक
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय लंबी दूरी की धाविका पारुल चौधरी ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना दूसरा कांस्य पदक जीता। नागोया में 28 सितंबर 2026 को हुई महिलाओं की 5000 मीटर फाइनल दौड़ में पारुल ने 15:14.61 के समय के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। इसी प्रतियोगिता में वह इससे पहले 3000 मीटर स्टीपलचेज में भी कांस्य पदक जीत चुकी थीं, जिससे इन खेलों में उनका यह दूसरा पदक बन गया।
रेस का रोमांचक घटनाक्रम
दौड़ के शुरुआती चरण में कजाकिस्तान की नोराह तानुई ने आक्रामक अंदाज में बढ़त बना ली और बाकी धावकों से काफी आगे निकल गईं। बहरीन की विनफ्रेड यावी पीछा करने वाले समूह में शामिल रहीं और आधी दूरी के बाद धीरे-धीरे अंतर कम करने लगीं।
पारुल और उनकी साथी भारतीय धाविका सीमा कुमारी शुरुआत में बीच के समूह में दौड़ती रहीं। जैसे-जैसे रेस अपने निर्णायक दौर में पहुँची, पारुल मेडल की दौड़ में बनी रहीं जबकि सीमा पीछे छूट गईं। आखिरी लैप में यावी ने रफ्तार बढ़ाते हुए बढ़त ले ली, और जापान की नोजोमी तनाका ने रजत के लिए संघर्ष किया।
रेस के अंतिम चरण में पारुल ने जबरदस्त तेज़ी दिखाई और तानुई को पछाड़ते हुए तीसरा स्थान सुनिश्चित किया — यह उनके मानसिक संयम और तकनीकी दक्षता का प्रमाण था।
पदक तालिका और प्रमुख प्रतिस्पर्धी
विनफ्रेड यावी ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि नोजोमी तनाका ने रजत पदक अपने नाम किया। तनाका का सीजन-बेस्ट समय 14:58.35 था, जो इस रेस में सबसे तेज था, जबकि यावी 14:30.06 के शानदार सीजन-बेस्ट के साथ उतरी थीं। पारुल का सीजन-बेस्ट समय 15:04.26 था।
यावी का ऐतिहासिक ट्रेबल
बहरीन की विनफ्रेड यावी के लिए यह जीत एक ऐतिहासिक 'ट्रेबल' की तरह रही। उन्होंने नागोया में जारी इस महाद्वीपीय आयोजन में पहले ही 10,000 मीटर और 3000 मीटर स्टीपलचेज के खिताब अपने नाम कर लिए थे, और अब 5000 मीटर स्वर्ण के साथ उन्होंने यह असाधारण तिकड़ी पूरी की।
पारुल का एशियन गेम्स सफर
गौरतलब है कि पारुल ने एशियन गेम्स 2022 में महिलाओं की 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था। उस जीत की तुलना में इस बार रजत की जगह कांस्य पर संतोष करना पड़ा, लेकिन एक ही आयोजन में दो पदक जीतना उनकी बहुमुखी प्रतिभा और लंबी दूरी की दौड़ में भारतीय एथलेटिक्स के उभरते कद को रेखांकित करता है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय एथलेटिक्स अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपस्थिति लगातार मज़बूत कर रही है। पारुल की इस उपलब्धि से युवा भारतीय महिला धावकों को प्रेरणा मिलेगी। एशियन गेम्स 2026 में भारत के पदकों की संख्या में इस दोहरी सफलता का महत्वपूर्ण योगदान है, और आगामी वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में पारुल से बड़ी उम्मीदें होंगी।