क्या है पेंचक सिलाट: इंडोनेशियाई युद्ध शैली जिसमें फुर्ती और आत्मरक्षा का समावेश है?
सारांश
Key Takeaways
- पेंचक सिलाट आत्मरक्षा का एक प्रभावी साधन है।
- यह खेल इंडोनेशियाई संस्कृति का हिस्सा है।
- भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफल हो रहे हैं।
- पेंचक सिलाट संतुलन और फुर्ती में सुधार करता है।
- यह कला मानसिक अनुशासन को बढ़ावा देती है।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। इंडोनेशिया से उत्पन्न पारंपरिक मार्शल आर्ट 'पेंचक सिलाट' आत्मरक्षा, फुर्ती, संतुलन और मानसिक अनुशासन पर जोर देता है। यह खेल एशियन गेम्स में अपनी पहचान बना चुका है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रसिद्ध है।
यह कला इंडोनेशियाई और मलय संस्कृति से जुड़ी है, जो प्राचीन समय में युवाओं के प्रशिक्षण का एक हिस्सा थी। इसमें मानसिक भावना, कला, संस्कृति, आत्मरक्षा और खेल के तत्व शामिल हैं।
'पेंचक' शब्द जावा के पश्चिमी हिस्से की सुंदानी भाषा के 'पेंका' से लिया गया है। सदियों से सुंदानी लोग इस खेल का अभ्यास करते आ रहे हैं। जावा के लोग इसे 'पेंचक' कहते हैं, जबकि सुमात्रा, बोर्नियो और मलय इसे 'सिलाट' कहते हैं। 18 मई 1948 को इंडोनेशियाई युद्ध शैलियों के लिए एक एकीकृत नाम 'पेंचक सिलाट' चुना गया।
पेंचक प्रशिक्षण का बाहरी पहलू है, जिसे सामान्य दर्शक प्रदर्शन के रूप में देख सकते हैं। वहीं, सिलाट आत्मरक्षा और युद्ध की गहराई है, जिसे छात्रों को तब सिखाया जाता है जब वे तैयार हों।
'पेंचक सिलाट' एक ऐसी मार्शल आर्ट है जो शरीर की स्वाभाविक क्रियाओं पर आधारित है। इसका अभ्यास संतुलन, फुर्ती और शारीरिक नियंत्रण में सुधार करता है। यह खेल फिटनेस, कला की सुंदरता या पारंपरिक आत्मरक्षा प्रणाली सीखने के लिए किया जाता है।
दुनिया भर में पेंचक सिलाट कई देशों में संगठित रूप से खेला जाता है, जहां हर देश का एक राष्ट्रीय महासंघ होता है। अंतरराष्ट्रीय महासंघ 'पेर्सेकुटुआन पेंचक सिलाट अंतराबांगा' सभी संघों को जोड़ता है, जो पेंचक सिलाट का सर्वोच्च संगठन है। यह महासंघ विश्व स्तर पर इसके प्रचार-प्रसार और विकास का कार्य करता है।
'पर्सेकुतुआन पेंचक सिलाट अंतराबांग्सा' की स्थापना 11 मार्च 1980 को इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर और ब्रुनेई ने मिलकर की थी। इसके संस्थापक सदस्यों में इकातन पेंचक सिलाट इंडोनेशिया, पर्सेकुतुआन सिलाट केबांगसान मलेशिया, पर्सेकुतुआन सिलाट सिंगापुरा और पर्सेकुतुआन सिलाट केबांगसान ब्रुनेई दारुस्सलाम शामिल हैं।
एक मार्शल आर्ट के रूप में, पेंचक सिलाट आत्मरक्षा की एक प्रभावी प्रणाली है, जिसमें ऊपरी और निचले अंगों की तकनीकों पर समान जोर दिया जाता है। इसमें मुक्के मारना, लात मारना और प्रतिद्वंद्वी को गिराना शामिल है।
हाल के वर्षों में, पेंचक सिलाट दक्षिण पूर्व एशिया के बाहर कई देशों में फैल गया है, जिनमें हॉलैंड, जर्मनी, इटली, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, जापान और अन्य देश शामिल हैं। आज यह खेल लोगों के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
इस खेल में 2 अलग-अलग टीमों के 2 पेसिलैट के बीच मुकाबला होता है, जो स्ट्राइकिंग, ब्लॉकिंग, टेकडाउन और स्वीपिंग तकनीकों का उपयोग करते हैं। मैच में 2-1 मिनट के 3 राउंड होते हैं, और हर राउंड के बीच 1 मिनट का ब्रेक होता है। अंत में जो खिलाड़ी सबसे अधिक अंक प्राप्त करता है, वह विजेता होता है।
आर्टिस्टिक श्रेणी को 4 विभिन्न उप-श्रेणियों में बांटा गया है: तुंगगल (एक खिलाड़ी), गांडा (दो खिलाड़ी), रेगु (तीन खिलाड़ी), और सोलो क्रिएटिव (एक खिलाड़ी)।
भारत ने पेंचक सिलाट के खेल में हाल के वर्षों में आशाजनक प्रगति की है। भारतीय खिलाड़ी एशियाई पेंचक सिलाट चैंपियनशिप, साउथ एशियन चैंपियनशिप और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आमंत्रण टूर्नामेंटों में पदक जीत चुके हैं। हालांकि, भारत अभी भी पारंपरिक रूप से मजबूत देशों जैसे इंडोनेशिया और मलेशिया से पीछे है, लेकिन निरंतर अभ्यास, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर और सरकारी समर्थन के माध्यम से भारत भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखता है।