पृथ्वी शॉ जन्मदिन विशेष: टेस्ट डेब्यू पर शतक, अब IPL टीम में जगह नहीं — कहाँ चूके 'भविष्य के सचिन'?
सारांश
मुख्य बातें
पृथ्वी शॉ आज 9 नवंबर 2026 को 27 वर्ष के हो रहे हैं — एक ऐसा क्रिकेटर जिसने 18 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू पर शतक ठोककर पूरे देश को चौंका दिया था, लेकिन आज वह मुंबई की जगह महाराष्ट्र की घरेलू टीम के लिए खेल रहे हैं और पिछले दो आईपीएल सीज़न में एक भी मैच नहीं खेल पाए हैं। कभी सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग की तुलना पाने वाले इस बल्लेबाज का सफर भारतीय क्रिकेट की सबसे मार्मिक कहानियों में से एक बन गया है।
स्कूल मैदान से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक का उल्कापिंड सफर
पृथ्वी शॉ का जन्म 9 नवंबर 1999 को महाराष्ट्र के ठाणे में हुआ था। दाएँ हाथ के इस आक्रामक बल्लेबाज ने महज 14 साल की उम्र में 2013 में हैरिस शील्ड टूर्नामेंट में अपने स्कूल रिजवी स्प्रिंगफील्ड की ओर से 330 गेंदों पर 85 चौकों और 5 छक्कों की मदद से 546 रन बनाए थे, जो उस समय स्कूल क्रिकेट का सर्वोच्च स्कोर था।
इस उल्लेखनीय प्रदर्शन ने शॉ को सुर्खियों में ला दिया। लगातार दमदार बल्लेबाजी के दम पर उन्हें भारत की अंडर-19 टीम में जगह मिली और 2016 में वह अंडर-19 एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा बने। इसके करीब दो महीने बाद ही उन्होंने रणजी ट्रॉफी में मुंबई की ओर से डेब्यू करते हुए तमिलनाडु के खिलाफ दूसरी पारी में शतक जड़ा और टीम को जीत दिलाई।
गौरतलब है कि 17 साल 320 दिन की उम्र में शॉ ने दलीप ट्रॉफी में डेब्यू पर शतक लगाया और इस प्रतियोगिता में ऐसा करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। उनसे पहले यह कारनामा सचिन तेंदुलकर ने किया था।
2018: वह साल जब शॉ की दुनिया बदल गई
2018 शॉ के करियर का स्वर्णिम वर्ष रहा। उन्होंने अपनी कप्तानी में भारत को अंडर-19 विश्व कप का खिताब दिलाया, जिससे वह रातोंरात राष्ट्रीय नायक बन गए। उसी साल दिल्ली डेयरडेविल्स ने उन्हें ₹1.2 करोड़ में अपनी आईपीएल फ्रेंचाइजी से जोड़ा और शॉ ने अपने पहले सीज़न में 9 मैचों में 245 रन बनाए।
इसी साल 18 साल की उम्र में शॉ को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू का मौका मिला। उन्होंने अपनी पहली ही पारी में 154 गेंदों पर 134 रन बनाकर सबको स्तब्ध कर दिया। इस पारी ने क्रिकेट विशेषज्ञों को उनमें तेंदुलकर और सहवाग की झलक दिखाई — एक ऐसी तुलना जो उत्साहजनक भी थी और बोझिल भी।
फॉर्म, फिटनेस और अनुशासन की तिहरी मार
करियर की शुरुआत में मिली इस असाधारण सफलता को शॉ संभाल नहीं पाए। उनकी फॉर्म और फिटनेस में गिरावट दर्ज की गई और कथित तौर पर अनुशासन से जुड़े आरोप भी लगे। इन सबका सीधा असर उनके करियर पर पड़ा।
यह ऐसे समय में हुआ जब भारतीय क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर थी। भारतीय टीम से बाहर होने के बाद शॉ को अपनी घरेलू टीम मुंबई से भी बाहर होना पड़ा। आईपीएल में अवसर सिमटते गए और वह पिछले दो सीज़न में एक भी आईपीएल मैच नहीं खेल सके। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 23 जुलाई 2021 को श्रीलंका के खिलाफ एक वनडे था।
आँकड़ों में पृथ्वी शॉ का अंतरराष्ट्रीय सफर
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शॉ का रिकॉर्ड इस प्रकार है: 5 टेस्ट की 9 पारियों में 1 शतक और 2 अर्धशतक समेत 339 रन; 6 वनडे की 6 पारियों में 189 रन; और एकमात्र टी20 अंतरराष्ट्रीय में उनका खाता नहीं खुला था। तीनों फॉर्मेट में खेलने का अनुभव रखने वाले शॉ के ये आँकड़े उनकी क्षमता और उसका उपयोग न हो पाने के बीच की खाई को दर्शाते हैं।
क्या होगा आगे — वापसी की उम्मीद बाकी है
फिलहाल पृथ्वी शॉ महाराष्ट्र की घरेलू टीम के लिए सभी फॉर्मेट में सक्रिय हैं और अपनी फॉर्म व फिटनेस पर काम कर रहे हैं। यह विडंबनापूर्ण है कि उनकी ही कप्तानी में खेले शुभमन गिल आज भारतीय टीम के कप्तान बन चुके हैं, जबकि शॉ राष्ट्रीय टीम में वापसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 27 साल की उम्र में एक क्रिकेटर के पास अभी भी काफी समय होता है — और शॉ का यह जन्मदिन एक नई पारी की शुरुआत का अवसर भी हो सकता है।