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पीटी उषा: 9 साल में स्कूल चैंपियन को हराया, एशियाई खेलों में 11 पदक जीते, बनीं 'उड़न परी'

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पीटी उषा: 9 साल में स्कूल चैंपियन को हराया, एशियाई खेलों में 11 पदक जीते, बनीं 'उड़न परी'

सारांश

गरीबी में पली-बढ़ी एक लड़की ने 9 साल में स्कूल चैंपियन को हराया, एशियाई खेलों में 11 पदक जीते और 1984 ओलंपिक फाइनल तक पहुँचने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं। पीटी उषा की कहानी पदकों से कहीं बड़ी है — यह भारतीय महिला एथलेटिक्स की नींव की कहानी है।

मुख्य बातें

पीटी उषा का जन्म 27 जून 1964 को केरल के पय्योली गाँव में हुआ।
9 साल की उम्र में उन्होंने अपने से तीन साल बड़े स्कूल चैंपियन को हराकर पहचान बनाई।
1980 में कराची में पाकिस्तान ओपन नेशनल मीट से अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत; 4 स्वर्ण पदक जीते।
1984 लॉस एंजिल्स ओलंपिक फाइनल तक पहुँचने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं।
एशियाई खेलों में कुल 11 पदक (जिनमें 4 स्वर्ण ); एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 23 पदक ।
2022 में भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष चुनी गईं।

पीटी उषा — जिन्हें 'भारत की उड़न परी' कहा जाता है — ने ट्रैक और फील्ड की दुनिया में वह मुकाम हासिल किया जो भारतीय महिला एथलेटिक्स के इतिहास में अभूतपूर्व था। 27 जून 1964 को केरल के कोझिकोड जिले के पय्योली गाँव में जन्मी उषा ने गरीबी से शुरू हुई अपनी यात्रा को अंतरराष्ट्रीय सम्मान तक पहुँचाया। 9 साल की उम्र में अपने से तीन साल बड़े स्कूल चैंपियन को हराकर उन्होंने साबित कर दिया था कि यह लड़की साधारण नहीं है।

संघर्ष से शुरू हुआ सफर

उषा का बचपन आर्थिक तंगी में बीता — एक दौर ऐसा भी था जब उनके पास जूते खरीदने तक के पैसे नहीं थे। बावजूद इसके, दौड़ने का जुनून उन्हें स्कूल के मैदान से जिला स्तर की प्रतियोगिताओं तक ले गया। उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए केरल सरकार ने उन्हें ₹250 की छात्रवृत्ति से नवाजा — उस समय की परिस्थितियों में यह राशि उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी। आगे की ट्रेनिंग और पढ़ाई के लिए उन्होंने एक विशेष स्कूल में दाखिला लिया।

कोच नाम्बियार और करियर की उड़ान

1976 में राष्ट्रीय स्कूल गेम्स में शानदार प्रदर्शन के बाद उषा प्रसिद्ध कोच ओएम नाम्बियार की नज़रों में आईं, और फिर उनके करियर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1980 में कराची में आयोजित पाकिस्तान ओपन नेशनल मीट से उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की विधिवत शुरुआत हुई, जहाँ उन्होंने 4 स्वर्ण पदक जीते।

ओलंपिक और एशियाई खेलों में ऐतिहासिक प्रदर्शन

उषा ने 1980, 1984 और 1988 के ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में वह 400 मीटर बाधा दौड़ के फाइनल तक पहुँचीं और यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं — हालाँकि पदक मामूली अंतर से चूक गया। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन एशियाई खेलों में सामने आया, जहाँ उन्होंने भारत के लिए कुल 11 पदक जीते, जिनमें 4 स्वर्ण शामिल हैं। इसके अलावा एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 23 पदक अपने नाम किए — एक रिकॉर्ड जो दशकों तक अटूट रहा।

सम्मान और पहचान

महज 20 साल की उम्र में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1985 में उन्हें पद्म श्री प्रदान किया गया। उनके प्रशंसकों ने उन्हें कई नामों से नवाजा — 'पायोली एक्सप्रेस', 'भारत की उड़न परी', 'गोल्डन गर्ल' और 'क्वीन ऑफ ट्रैक एंड फील्ड'2022 में उन्हें भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) का अध्यक्ष चुना गया और वह अब तक इस पद पर बनी हुई हैं।

विरासत और प्रेरणा

पीटी उषा की कहानी केवल पदकों की नहीं, बल्कि उन लाखों लड़कियों की प्रेरणा की है जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेल के मैदान में उतरने का साहस रखती हैं। उनका सफर यह बताता है कि प्रतिभा और दृढ़ संकल्प मिलकर किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं — और भारतीय एथलेटिक्स की अगली पीढ़ी उनकी विरासत से ऊर्जा लेती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका एक और पहलू है जो कम चर्चा में आता है — 1984 ओलंपिक में सेकंड के सौवें हिस्से से चूका पदक भारतीय खेल ढाँचे की उस खामी को उजागर करता है जो दशकों बाद भी पूरी तरह नहीं भरी। उषा को जो संसाधन और समर्थन मिला, वह उनकी अपनी जिद का नतीजा था, न कि किसी सुनियोजित खेल नीति का। IOA अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति एक सांकेतिक कदम है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या वह उस ढाँचागत बदलाव की नींव रख पाएंगी जो उनकी पीढ़ी को नसीब नहीं हुआ था।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीटी उषा का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
पीटी उषा का जन्म 27 जून 1964 को केरल के कोझिकोड जिले के पय्योली गाँव में हुआ था। उनका बचपन आर्थिक तंगी में बीता, लेकिन दौड़ने के जुनून ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया।
पीटी उषा ने एशियाई खेलों में कितने पदक जीते?
पीटी उषा ने एशियाई खेलों में कुल 11 पदक जीते, जिनमें 4 स्वर्ण पदक शामिल हैं। इसके अलावा एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 23 पदक अपने नाम किए।
1984 ओलंपिक में पीटी उषा का प्रदर्शन कैसा रहा?
1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में पीटी उषा 400 मीटर बाधा दौड़ के फाइनल तक पहुँचीं और यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं। हालाँकि वह पदक से मामूली अंतर से चूक गईं।
पीटी उषा को 'उड़न परी' क्यों कहा जाता है?
पीटी उषा की असाधारण गति और ट्रैक पर उनके दबदबे के कारण प्रशंसकों ने उन्हें 'भारत की उड़न परी' का नाम दिया। उन्हें 'पायोली एक्सप्रेस' , 'गोल्डन गर्ल' और 'क्वीन ऑफ ट्रैक एंड फील्ड' के नाम से भी जाना जाता है।
पीटी उषा को कौन-कौन से राष्ट्रीय सम्मान मिले हैं?
पीटी उषा को महज 20 साल की उम्र में अर्जुन पुरस्कार और 1985 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। 2022 में उन्हें भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) का अध्यक्ष चुना गया।
राष्ट्र प्रेस
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