29 सितंबर 2026
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राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन चुनाव: सुप्रीम कोर्ट ने नतीजे रोके, सीलबंद लिफाफे में रखे जाएंगे परिणाम

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राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन चुनाव: सुप्रीम कोर्ट ने नतीजे रोके, सीलबंद लिफाफे में रखे जाएंगे परिणाम

सारांश

भारतीय महिला क्रिकेटर मेघा गौर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव नतीजों को सीलबंद रखने का आदेश दिया। आरोप है कि मतदाता सूची में एक भी महिला का नाम नहीं — यह विवाद भारतीय खेल प्रशासन में लैंगिक समानता के बड़े सवाल को फिर से केंद्र में ले आया है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 सितंबर 2026 को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) चुनाव के नतीजे सीलबंद लिफाफे में रखने का आदेश दिया।
याचिका भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व सदस्य मेघा गौर ने दाखिल की; आरोप — मतदाता सूची में एक भी महिला नहीं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत , जस्टिस बागची और जस्टिस वी.
मोहना की पीठ ने सुनवाई की।
याचिकाकर्ता को राजस्थान उच्च न्यायालय में जाने का निर्देश भी दिया गया।
याचिका में स्पोर्ट्स कोड, एसोसिएशन संविधान और कोर्ट के पूर्व आदेशों के उल्लंघन का आरोप; तीन नए ज़िले बनाने की कोशिश पर भी आपत्ति।

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 सितंबर 2026 को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव परिणामों की घोषणा पर रोक लगा दी है और निर्देश दिया कि नतीजे सीलबंद लिफाफे में रखे जाएँ। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व सदस्य मेघा गौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह आदेश पारित किया और याचिकाकर्ता को राजस्थान उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का भी निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

मेघा गौर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की मतदाता सूची में एक भी महिला का नाम नहीं है, जिसके चलते कोई महिला उम्मीदवार भी मैदान में नहीं उतर सकती। याचिका के अनुसार, स्पोर्ट्स कोड, एसोसिएशन के अपने संविधान और न्यायालय के पूर्व आदेशों का उल्लंघन करते हुए जल्दबाज़ी में चुनाव कराने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, एसोसिएशन के तहत तीन नए ज़िले बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है, जिसे याचिका में अनुचित बताया गया।

कोर्ट में क्या हुआ

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने पीठ को बताया कि चुनाव मंगलवार को होने हैं।

जस्टिस बागची ने पूछा, 'आप यह मामला राजस्थान उच्च न्यायालय के सामने क्यों नहीं रखते? क्या हम चल रहे चुनाव पर रोक लगा सकते हैं?' इस पर गुरुस्वामी ने दृढ़ता से कहा कि यह चुनाव 'पूरी तरह से गैरकानूनी' है।

वरिष्ठ अधिवक्ता की दो प्रमुख माँगें

सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने अदालत के सामने दो माँगें रखीं। पहली — चुनाव तत्काल रोके जाएँ, क्योंकि जो मतदाता सूची तैयार की गई है, उसमें एक भी महिला का नाम नहीं है, और इस प्रकार महिला उम्मीदवारी की कोई संभावना नहीं बचती। दूसरी — देश में खेल प्रशासन को बेहतर, संवैधानिक और न्यायसंगत बनाया जाए।

गुरुस्वामी ने कहा कि 'यह वह समय है जब भारत की वर्ल्ड कप टीम वर्ल्ड चैंपियन है। देश भर में युवा लड़कियाँ क्रिकेट खेल रही हैं। राजस्थान में, जहाँ क्रिकेट की शानदार परंपरा है और जिसकी आईपीएल टीम जीत रही है, महिलाओं को दबाना किसी भी ऐसी चीज़ के बिल्कुल खिलाफ है जिसे हम संवैधानिक, न्यायसंगत या स्वीकार्य समझते हैं।'

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चुनाव-प्रक्रिया चल सकती है, किंतु परिणाम घोषित नहीं किए जाएँगे। नतीजों को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखा जाएगा। इसके साथ ही याचिकाकर्ता को राजस्थान उच्च न्यायालय में जाने का निर्देश भी दिया गया।

महिला खेल प्रशासन का व्यापक सवाल

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन कर रही है और महिला खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर राष्ट्रीय जागरूकता बढ़ी है। गौरतलब है कि खेल प्रशासन में महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा पहले भी विभिन्न राज्य क्रिकेट एसोसिएशनों में उठता रहा है। यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य क्रिकेट निकाय के चुनावों में लैंगिक समावेश को लेकर अदालत का दरवाज़ा खटखटाया गया हो।

अब सभी की निगाहें राजस्थान उच्च न्यायालय पर होंगी, जहाँ इस विवाद का अगला अध्याय लिखा जाएगा और यह तय होगा कि आरसीए चुनाव किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ महिला खिलाड़ियों की मैदान पर उपस्थिति और प्रशासन में उनकी अनुपस्थिति के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। जब भारतीय महिला टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व चैंपियन का दर्जा हासिल कर रही है, तब एक प्रमुख राज्य एसोसिएशन की मतदाता सूची में एक भी महिला का न होना महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित बहिष्करण का संकेत है। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप स्वागत योग्य है, पर असली सवाल यह है कि BCCI और राज्य एसोसिएशनों में लैंगिक समावेश के लिए कोई बाध्यकारी व्यवस्था क्यों नहीं है — और क्या राजस्थान उच्च न्यायालय उस शून्य को भरने की हिम्मत दिखाएगा।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन चुनाव पर क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि RCA चुनाव हो सकते हैं, लेकिन परिणाम घोषित नहीं किए जाएँगे और उन्हें सीलबंद लिफाफे में रखा जाएगा। साथ ही याचिकाकर्ता को राजस्थान उच्च न्यायालय में जाने का निर्देश दिया गया।
मेघा गौर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों दाखिल की?
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व सदस्य मेघा गौर ने आरोप लगाया कि RCA की मतदाता सूची में एक भी महिला का नाम नहीं है, जिससे महिला उम्मीदवारी पूरी तरह असंभव हो जाती है। याचिका में स्पोर्ट्स कोड और एसोसिएशन के संविधान के उल्लंघन का भी आरोप है।
इस मामले की सुनवाई किस पीठ ने की?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने मेघा गौर की याचिका पर सुनवाई की और यह आदेश पारित किया।
याचिका में RCA पर और कौन से आरोप लगाए गए हैं?
याचिका में आरोप है कि RCA स्पोर्ट्स कोड, अपने संविधान और न्यायालय के पूर्व आदेशों का उल्लंघन करते हुए जल्दबाज़ी में चुनाव करा रही है। इसके अलावा, एसोसिएशन के तहत तीन नए ज़िले बनाने की कोशिश को भी याचिका में चुनौती दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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