राजस्थान निकाय चुनाव: आंतरिक कलह रोकने को कांग्रेस ने बदला टिकट वितरण का तरीका, गहलोत ने माँगी एकजुटता
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने राजस्थान के आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में आंतरिक गुटबाजी पर लगाम लगाने के लिए उम्मीदवार चयन की अपनी रणनीति में अहम बदलाव किया है। पार्टी ने तय किया है कि चुने गए उम्मीदवारों को सीधे आधिकारिक चुनाव चिह्न जारी किया जाएगा, ताकि टिकट को लेकर होने वाले दावे-प्रतिदावे और भ्रम की स्थिति से बचा जा सके। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पार्टी के भीतर कई स्तरों पर टिकट बंटवारे को लेकर जोड़-तोड़ जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय नेता, पार्टी कार्यकर्ता और टिकट के दावेदार एक साथ अपने-अपने पसंदीदा नाम आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जटिल हो गई है। इस आंतरिक प्रतिस्पर्धा के बीच कांग्रेस का नया फैसला यह स्पष्ट करने की कोशिश है कि किसे पार्टी का वास्तविक समर्थन प्राप्त है। 31 अगस्त 2026 तक पार्टी की अंतिम सूची की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार बना हुआ है।
नई रणनीति का उद्देश्य
नई व्यवस्था के तहत, कांग्रेस द्वारा अधिकृत उम्मीदवार को सीधे पार्टी का चुनाव चिह्न सौंपा जाएगा। इसका मकसद संगठन के भीतर यह भ्रम दूर करना है कि किसे आधिकारिक उम्मीदवार माना जाए। गौरतलब है कि अतीत में टिकट न मिलने पर असंतुष्ट दावेदारों के बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घटनाएँ कांग्रेस के लिए नुकसानदेह रही हैं।
हालाँकि, सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक चयन के बाद भी आखिरी समय में नाम बदले जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे दावेदारों में अनिश्चितता बनी हुई है।
कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती
राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस को दो मोर्चों पर एक साथ लड़ना है। पहला — ऐसे उम्मीदवार चुनना जो अपने-अपने वार्ड में जीत सुनिश्चित कर सकें। दूसरा — टिकट से वंचित नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी के विरुद्ध जाने से रोकना। पार्टी इन निर्णयों में स्थानीय राजनीतिक समीकरण, पुराने कार्यकर्ताओं की दावेदारी और उम्मीदवारों की जीत की संभावना जैसे कारकों को तौल रही है।
गहलोत की एकजुटता की अपील
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आगामी स्थानीय निकाय चुनाव लोकतंत्र और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए बेहद अहम हैं और पार्टी को भारतीय जनता पार्टी (BJP) को करारा जवाब देना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में BJP सत्ता में है और कांग्रेस निकाय चुनावों को अपनी पुनर्वापसी के अवसर के रूप में देख रही है।
आगे क्या
फिलहाल उम्मीदवारों की अंतिम सूची और उनकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। चुनाव चिह्न सीधे देने की नई पद्धति से यह तो स्पष्ट होगा कि पार्टी का आधिकारिक प्रत्याशी कौन है, लेकिन क्या यह बागी उम्मीदवारों की समस्या को पूरी तरह रोक पाएगी — यह देखना बाकी है। राजस्थान कांग्रेस की इस रणनीति का असर आने वाले हफ्तों में उम्मीदवार घोषणाओं के साथ स्पष्ट होगा।