रवि बिश्नोई: दो बार रिजेक्शन के बाद अंडर-19 में 17 विकेट, T20 डेब्यू में 'प्लेयर ऑफ द मैच'
सारांश
मुख्य बातें
टीम इंडिया के लेग-स्पिन गेंदबाज रवि बिश्नोई आज विश्व क्रिकेट में अपनी घातक गुगली और फ्लिपर के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनका यह सफर कभी आसान नहीं था। राजस्थान के जोधपुर जिले के बिरमी गाँव से निकले इस गेंदबाज को अंडर-19 ट्रायल्स में दो बार नकारा गया, बोर्ड परीक्षाएँ छोड़नी पड़ीं और सुविधाओं के अभाव से जूझना पड़ा — फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी।
जोधपुर से शुरू हुई क्रिकेट की यात्रा
5 सितंबर 2000 को जन्मे रवि बिश्नोई को बचपन से ही क्रिकेट का जुनून था। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने क्लब स्तर पर अपनी गेंदबाज़ी को धार दी। अंडर-16 और अंडर-19 दोनों ट्रायल्स में नाकामी हाथ लगी — अंडर-19 में तो उन्हें दो बार चयन से बाहर रखा गया। यह ऐसे समय में आया जब कई युवा खिलाड़ी इतनी ठोकरें खाकर खेल छोड़ देते हैं, लेकिन बिश्नोई ने अपनी काबिलियत पर भरोसा बनाए रखा।
बोर्ड एग्जाम छोड़ा, क्रिकेट को चुना
जब बिश्नोई 12वीं कक्षा में थे, तब राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें नेट गेंदबाज़ के रूप में चुना। वह अपनी बोर्ड परीक्षाएँ देना चाहते थे, लेकिन कोच की सलाह पर उन्होंने परीक्षाएँ छोड़कर क्रिकेट को प्राथमिकता दी। यह फैसला उनके करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। राजस्थान रॉयल्स के नेट्स में उनकी घूमती गेंदों ने सबका ध्यान खींचा।
अंडर-19 विश्व कप में ऐतिहासिक प्रदर्शन
2019-20 अंडर-19 विश्व कप में बिश्नोई की गुगली बल्लेबाज़ों के लिए अबूझ पहेली बन गई। उन्होंने 6 मैचों में 17 विकेट लेकर टूर्नामेंट के सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ का खिताब हासिल किया और भारत को अंडर-19 चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। गौरतलब है कि इसी प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नज़र में ला दिया।
IPL डेब्यू और अंतरराष्ट्रीय करियर
साल 2020 में बिश्नोई ने पंजाब किंग्स की ओर से आईपीएल में कदम रखा। आईपीएल में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद 2022 में उन्हें भारतीय T20 अंतरराष्ट्रीय टीम में जगह मिली। अंतरराष्ट्रीय डेब्यू में ही बिश्नोई ने अपना लोहा मनवाया — 4 ओवर में केवल 17 रन देकर 2 विकेट झटके और 'प्लेयर ऑफ द मैच' का पुरस्कार जीता।
अब तक का आँकड़ा
बिश्नोई अब तक भारत की ओर से 49 T20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं, जिनमें उन्होंने 67 विकेट हासिल किए हैं। भारत की ओर से खेले अपने एकमात्र वनडे मैच में उन्होंने 1 विकेट लिया। यह सफर बताता है कि अस्वीकृति के बाद भी दृढ़ता से काम करने वाले खिलाड़ी अंततः अपनी जगह बनाते हैं।