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रवि शास्त्री: बल्लेबाज़, कोच और कमेंटेटर — तीनों भूमिकाओं में अमिट छाप

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रवि शास्त्री: बल्लेबाज़, कोच और कमेंटेटर — तीनों भूमिकाओं में अमिट छाप

सारांश

बल्लेबाज़ से कोच और कोच से कमेंटेटर — रवि शास्त्री का सफ़र भारतीय क्रिकेट की तीन पीढ़ियों को छूता है। 80 टेस्ट, विदेशी धरती पर ऐतिहासिक जीतें और 'धोनी फ़िनिशेस इन स्टाइल' — हर भूमिका में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

मुख्य बातें

रवि शास्त्री का जन्म 27 मई 1962 को मुंबई में हुआ; 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे।
भारत के लिए 80 टेस्ट ( 3,830 रन, 151 विकेट ) और 150 वनडे ( 3,108 रन, 129 विकेट ) खेले।
10 जनवरी 1985 को वानखेड़े में एक ओवर में छह छक्के ; ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट दोहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय ।
बतौर कोच ( 2017–2021 ): 43 टेस्ट में 25 जीत ; विदेशी टेस्ट जीत का रिकॉर्ड किसी भी अन्य भारतीय कोच से बेहतर।
कोचिंग में ऑस्ट्रेलिया को दो बार उसके घर में हराया; पहली विश्व टेस्ट चैंपियनशिप तालिका में भारत शीर्ष पर।
2011 विश्व कप फ़ाइनल में 'धोनी फ़िनिशेस इन स्टाइल' — भारतीय क्रिकेट की सबसे यादगार कमेंट्री पंक्तियों में से एक।

रवि शास्त्री भारतीय क्रिकेट के उन विरले व्यक्तित्वों में से हैं जिन्होंने मैदान पर बल्लेबाज़-गेंदबाज़ के रूप में, डगआउट में कोच के रूप में और माइक्रोफ़ोन के सामने कमेंटेटर के रूप में — तीनों मोर्चों पर अपनी अलग पहचान बनाई। 27 मई 1962 को मुंबई में जन्मे शास्त्री ने 1983 वनडे विश्व कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा बनकर अपने करियर की नींव रखी और उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

खिलाड़ी के रूप में करियर

1981 में भारतीय टीम में पदार्पण करने वाले शास्त्री ने दिसंबर 1992 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। दाएं हाथ से बल्लेबाज़ी और बाएं हाथ से स्पिन गेंदबाज़ी करने वाले इस ऑलराउंडर ने भारत के लिए 80 टेस्ट और 150 वनडे मैच खेले।

टेस्ट क्रिकेट में शास्त्री ने 11 शतक और 12 अर्धशतक की मदद से 3,830 रन बनाए और 151 विकेट हासिल किए। वनडे फ़ॉर्मेट में उनके नाम 4 शतक, 18 अर्धशतक, 3,108 रन और 129 विकेट दर्ज हैं। गौरतलब है कि शास्त्री ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट दोहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज़ थे — एक उपलब्धि जो आज भी उनके नाम दर्ज है।

10 जनवरी 1985 को वानखेड़े स्टेडियम में बड़ौदा के खिलाफ़ रणजी ट्रॉफी मैच में शास्त्री ने एक ओवर में छह गेंदों पर छह छक्के मारे — घरेलू क्रिकेट इतिहास का एक यादगार पल।

कमेंट्री बॉक्स में दमदार आवाज़

1992 में क्रिकेट से संन्यास के बाद शास्त्री ने माइक्रोफ़ोन थाम लिया। उनकी जोशीली, निर्भीक और प्रभावशाली आवाज़ ने उन्हें अंग्रेज़ी कमेंट्री के सबसे महँगे और माँगे जाने वाले नामों में शामिल कर दिया। 2011 वनडे विश्व कप के फ़ाइनल में महेंद्र सिंह धोनी के विजयी छक्के पर बोला गया उनका वाक्य — 'धोनी फ़िनिशेस इन स्टाइल' — आज भी करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के ज़ेहन में ताज़ा है।

कोच के रूप में ऐतिहासिक कार्यकाल

कोचिंग शास्त्री की शुरुआती योजना में नहीं थी, लेकिन 2014 में वे भारतीय टीम के डायरेक्टर बने और 2016 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 2017 से 2021 तक उन्होंने मुख्य कोच की ज़िम्मेदारी संभाली, जो टी20 विश्व कप 2021 की समाप्ति के साथ खत्म हुई।

आँकड़े उनके कार्यकाल की मज़बूती बयान करते हैं। 43 टेस्ट में भारत ने 25 जीते और 13 हारे76 वनडे में 51 जीत और 22 हार, तथा 65 टी20 में 45 जीत और 18 हार मिली। सबसे उल्लेखनीय रहा विदेशी धरती पर प्रदर्शन — 28 विदेशी टेस्ट में 13 जीत और 12 हार के साथ शास्त्री का विदेशी टेस्ट जीत का रिकॉर्ड किसी भी अन्य भारतीय कोच से बेहतर रहा।

विदेश में टेस्ट वर्चस्व

शास्त्री की कोचिंग में भारत ने श्रीलंका, वेस्टइंडीज़ और ऑस्ट्रेलिया को उनकी अपनी ज़मीन पर हराया — ऑस्ट्रेलिया को तो लगातार दो बार। इंग्लैंड के खिलाफ़ सीरीज़ में भारत 2-1 से आगे रहा। पहली विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में भारत शीर्ष पर था। यह ऐसे समय में आया जब विदेशी परिस्थितियों में भारतीय टीम की साख पहले से कहीं अधिक मज़बूत हो रही थी।

वर्तमान में कमेंट्री की वापसी

कोच पद छोड़ने के बाद शास्त्री एक बार फिर कमेंट्री बॉक्स में लौट आए हैं। पहले की तरह ही बेबाक, निष्पक्ष और ऊर्जावान अंदाज़ में वे क्रिकेट की दुनिया में अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। भले ही बतौर कोच उनके नाम कोई आईसीसी खिताब नहीं है, परंतु भारतीय क्रिकेट को जो आत्मविश्वास और निडरता उन्होंने दी, वह उनकी सबसे बड़ी विरासत मानी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर टूर्नामेंट के नॉकआउट चरणों में टीम बार-बार चूकती रही। यह विरोधाभास उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी बहस है — क्या टेस्ट श्रेष्ठता और सफ़ेद गेंद की विफलता एक साथ चल सकती है? कमेंट्री में उनकी वापसी यह भी बताती है कि भारतीय क्रिकेट में 'ब्रांड शास्त्री' की प्रासंगिकता मैदान के बाहर भी उतनी ही मज़बूत है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रवि शास्त्री का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर कब से कब तक रहा?
रवि शास्त्री ने 1981 में भारतीय टीम में पदार्पण किया और दिसंबर 1992 में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। इस दौरान उन्होंने 80 टेस्ट और 150 वनडे मैच खेले।
रवि शास्त्री ने बतौर कोच भारत को कौन-सी बड़ी उपलब्धियाँ दिलाईं?
शास्त्री की कोचिंग (2017–2021) में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में दो बार हराया, श्रीलंका और वेस्टइंडीज़ को भी उनकी धरती पर मात दी, और पहली विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। विदेशी टेस्ट जीत का उनका रिकॉर्ड किसी भी अन्य भारतीय कोच से बेहतर रहा।
रवि शास्त्री की सबसे मशहूर कमेंट्री पंक्ति कौन-सी है?
'धोनी फ़िनिशेस इन स्टाइल' — 2011 वनडे विश्व कप फ़ाइनल में महेंद्र सिंह धोनी के विजयी छक्के पर बोली गई यह पंक्ति भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार कमेंट्री में से एक मानी जाती है।
रवि शास्त्री ने एक ओवर में छह छक्के कब और कहाँ मारे थे?
10 जनवरी 1985 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में बड़ौदा के खिलाफ़ रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान शास्त्री ने एक ओवर की छह गेंदों पर छह छक्के मारे थे। यह घरेलू क्रिकेट इतिहास का एक ऐतिहासिक पल है।
क्या रवि शास्त्री अभी भी क्रिकेट से जुड़े हैं?
हाँ, 2021 में भारतीय टीम के मुख्य कोच पद से हटने के बाद रवि शास्त्री फिर से कमेंट्री बॉक्स में सक्रिय हैं। वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अंग्रेज़ी कमेंट्री के प्रमुख नामों में शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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