रिचर्ड पायबस का बयान: '159 रन नाकाफी थे, भारत से मुकाबले के लिए अफगानिस्तान को बहुत सुधार करना होगा'
सारांश
मुख्य बातें
अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के हेड कोच रिचर्ड पायबस ने स्वीकार किया कि 16 सितंबर को अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में भारत के हाथों सात विकेट से मिली हार का मुख्य कारण अफगानिस्तान की बल्लेबाज़ी की विफलता रही। पायबस ने कहा कि टीम का 159 रन का स्कोर उस विकेट पर बचाव के लिहाज़ से पर्याप्त नहीं था, और भारत जैसी शीर्ष टीम के खिलाफ कम से कम 200 रन का लक्ष्य ज़रूरी था।
मैच के बाद पायबस का विश्लेषण
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पायबस ने कहा, 'उस विकेट पर 200 का स्कोर गेंदबाज़ों के लिए कुछ मौका देता। मुझे लगा कि हमने सच में बहुत अच्छी गेंदबाज़ी की। नबी ने पहले कुछ ओवरों में बेहतरीन गेंदबाज़ी की, और नूर ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन हमने ऐसा कुल नहीं बनाया जिसका बचाव किया जा सके। यह सच में एक बहुत सुंदर विकेट है।'
उन्होंने यह भी माना कि पावरप्ले में गेंदबाज़ों के पास गलती की कोई गुंजाइश नहीं थी, क्योंकि भारत ने शुरुआती 6 ओवरों में ही करीब 80 रन जोड़ लिए थे।
पावरप्ले में कमज़ोरी और टॉस का महत्व
पायबस ने पावरप्ले को अफगानिस्तान की सबसे बड़ी कमज़ोरी बताया। उन्होंने कहा, 'हमने पावरप्ले में उतनी अच्छी गेंदबाज़ी नहीं की जितनी हम चाहते थे। दबाव की कमी साफ़ दिखी।' टॉस के बारे में उन्होंने कहा, 'उस विकेट पर कोई भी चेज़ करना चाहेगा, लेकिन हमें टॉस के दोनों नतीजों में अच्छा होना होगा।' आंकड़ों के अनुसार, अफगानिस्तान का औसत पावरप्ले स्कोर करीब 45 रन है, जिसे पायबस ने आने वाले महीनों में सुधारने का प्रमुख लक्ष्य बताया।
राशिद खान और टॉप ऑर्डर पर चर्चा
कोच पायबस राशिद खान के प्रदर्शन से संतुष्ट नज़र आए। उन्होंने कहा, 'राशिद एक ऑल-राउंडर के तौर पर खेल रहे हैं और उन्होंने आज बहुत खूबसूरती से बैटिंग की।' उन्होंने सुझाव दिया कि राशिद को बल्लेबाज़ी क्रम में ऊपर भेजकर विपक्षी टीम पर दबाव बनाया जा सकता है।
वहीं, टॉप ऑर्डर की चिंता बरकरार है। पायबस ने कहा कि वे रहमानुल्लाह गुरबाज़ से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखते हैं। उनके शब्दों में, 'गुरबाज़ आमतौर पर हमारा सबसे धमाकेदार बल्लेबाज़ होता है। मुझे यकीन है कि तीसरे मैच में उसके पास हमारे लिए कुछ खास होगा।'
अनुभव की कमी और भारत से सीख
पायबस ने माना कि शीर्ष टीमों के खिलाफ खेलने का सीमित अनुभव अफगानिस्तान के युवा खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, 'लड़कों को दुनिया की टॉप टीमों के खिलाफ खेलने के ज़्यादा मौके नहीं मिलते। यह हमारे सीखने का हिस्सा है। हम दुनिया के सबसे एलीट व्हाइट-बॉल क्रिकेटरों के साथ खेल रहे हैं — यह एक शिक्षा है।'
उन्होंने आईपीएल में नियमित रूप से खेलने से भारतीय बल्लेबाज़ों की ऐसी पिचों पर महारत को दोनों टीमों के बीच बड़ा अंतर बताया। उनके अनुसार, 'भारतीय जानते हैं कि इन विकेटों पर कैसे खेलना है। उनका खेल इन्हीं पर विकसित होता है। हमारे पास अफगानिस्तान में गुणवत्तापूर्ण विकेट नहीं हैं।'
पिच सुधार और आगे की राह
पायबस ने अफगानिस्तान में घरेलू पिचों की गुणवत्ता सुधारने पर ज़ोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि अफगानिस्तान एक अंतरराष्ट्रीय क्यूरेटर नियुक्त करने पर विचार कर सकता है ताकि घरेलू परिस्थितियों में निरंतरता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा, 'हमें अच्छी क्रिकेट विकेट चाहिए — यह इतनी सरल बात है। अच्छी पिचें खिलाड़ियों के विकास में भी मदद करेंगी।'
तीसरे और अंतिम टी20 में अफगानिस्तान के पास सम्मान बचाने का मौका होगा, लेकिन पायबस के बयानों से साफ़ है कि टीम के सामने बल्लेबाज़ी की संरचना और पावरप्ले प्रदर्शन को लेकर गहरे सवाल खड़े हैं।