ऋद्धिमान साहा: तेज गेंदबाज से भारत के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर तक का सफर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज ऋद्धिमान साहा का क्रिकेट करियर संघर्ष, धैर्य और असाधारण प्रतिभा की अनूठी मिसाल है। जिस खिलाड़ी ने अपने शुरुआती दिनों में एक तेज गेंदबाज के रूप में मैदान पर कदम रखा, वही आगे चलकर टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद विकेटकीपरों में गिना जाने लगा। फरवरी 2025 में उन्होंने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लिया और अब कोचिंग के क्षेत्र में अपना नया अध्याय लिख रहे हैं।
शुरुआत: तेज गेंदबाज से विकेटकीपर तक
ऋद्धिमान साहा का जन्म 24 अक्टूबर 1984 को शक्तिगढ़, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल में हुआ था। क्रिकेट की उपजाऊ ज़मीन माने जाने वाले बंगाल में पले-बढ़े साहा ने बचपन से ही इस खेल के प्रति गहरी रुचि विकसित की। शुरुआती दौर में वे तेज गेंदबाज के रूप में खेला करते थे, लेकिन धीरे-धीरे विकेटकीपिंग में उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई।
इसके बाद साहा ने विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में खुद को ढालने के लिए कठोर परिश्रम किया। यह परिवर्तन उनके करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। 2007 में उन्होंने बंगाल की ओर से प्रथम श्रेणी और लिस्ट ए क्रिकेट में पदार्पण किया।
धोनी की छाया और लंबा इंतजार
घरेलू क्रिकेट में निरंतर उम्दा प्रदर्शन के बावजूद साहा को राष्ट्रीय टीम में नियमित स्थान पाने के लिए वर्षों का धैर्य रखना पड़ा। इसकी मुख्य वजह थे महेंद्र सिंह धोनी, जो उस दौर में तीनों फॉर्मेट में भारत के स्थापित विकेटकीपर और कप्तान थे।
2010 में साहा ने भारत के लिए टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट में डेब्यू किया, किंतु नियमित जगह दिसंबर 2014 में धोनी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद ही मिली। यह ऐसे समय में आया जब साहा पहले से ही अपनी विकेटकीपिंग से विशेषज्ञों का ध्यान खींच चुके थे।
अंतरराष्ट्रीय करियर के आँकड़े
साहा ने भारत के लिए 40 टेस्ट मैचों की 56 पारियों में 3 शतक और 6 अर्धशतक की मदद से 1,353 रन बनाए। टेस्ट में उन्होंने 92 कैच लिए और 12 स्टंप किए — ये आँकड़े उनकी असाधारण विकेटकीपिंग दक्षता का प्रमाण हैं।
वनडे क्रिकेट में 9 मैचों की 5 पारियों में उन्होंने 41 रन बनाए, जिसमें 2 बार वे नाबाद रहे। वनडे में उनके नाम 17 कैच और 1 स्टंप दर्ज है। पूर्व कप्तान विराट कोहली ने साहा की विकेटकीपिंग की खुलकर प्रशंसा की थी और उन्हें अपने दौर का सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर बताया था।
घरेलू और आईपीएल करियर
बंगाल के लिए साहा का घरेलू करियर बेहद समृद्ध रहा। 2007 से 2025 के बीच 142 प्रथम श्रेणी मैचों की 210 पारियों में 14 शतक और 44 अर्धशतक सहित 7,169 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 346 कैच लिए और 38 स्टंप किए। 116 लिस्ट ए मैचों में उन्होंने 3 शतक और 20 अर्धशतक की मदद से 3,072 रन बनाए।
आईपीएल में साहा 2008 से 2024 तक कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR), चेन्नई सुपर किंग्स (CSK), पंजाब किंग्स, सनराइजर्स हैदराबाद और गुजरात टाइटंस जैसी फ्रेंचाइज़ी के साथ जुड़े रहे। 170 मैचों की 145 पारियों में उन्होंने 1 शतक और 13 अर्धशतक की मदद से 2,934 रन बनाए। उनका आईपीएल में सर्वाधिक स्कोर नाबाद 115 रन रहा।
संन्यास के बाद: कोचिंग की नई पारी
फरवरी 2025 में क्रिकेट से आधिकारिक संन्यास लेने के बाद साहा ने खेल से अपना नाता नहीं तोड़ा। वे अब बंगाल अंडर-23 पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के रूप में युवा प्रतिभाओं को तराश रहे हैं। ऋषभ पंत के उभरने के बाद टेस्ट टीम में जगह भले ही सीमित हुई, लेकिन साहा की विकेटकीपिंग विरासत अडिग रहेगी — और अब कोचिंग के ज़रिए वे अगली पीढ़ी को वही संस्कार देने की राह पर हैं।