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सैयद शाहिद हाकिम: 1960 रोम ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले महान फुटबॉलर

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सैयद शाहिद हाकिम: 1960 रोम ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले महान फुटबॉलर

सारांश

सैयद शाहिद हाकिम सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे — वे भारतीय फुटबॉल की उस पीढ़ी की आवाज़ थे जिसने सीमित संसाधनों में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराया। 1960 रोम ओलंपिक से लेकर ध्यानचंद पुरस्कार तक, उनका सफ़र भारतीय फुटबॉल के संघर्ष और समर्पण की जीती-जागती दास्तान है।

मुख्य बातें

सैयद शाहिद हाकिम का जन्म 23 जून 1939 को हैदराबाद में हुआ था।
उन्होंने 1960 के रोम ओलंपिक में भारतीय फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व किया; उस टीम के कोच उनके पिता सैयद अब्दुल रहीम थे।
भारत ने उस टूर्नामेंट में फ्रांस के खिलाफ 1-1 की बराबरी की, हालाँकि ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सके।
घरेलू फुटबॉल में सर्विसेज की ओर से खेलते हुए उन्होंने संतोष ट्रॉफी जीती और भारतीय वायु सेना टीम का भी प्रतिनिधित्व किया।
1988 एएफसी एशियन कप में अंतरराष्ट्रीय रेफरी के रूप में अंपायरिंग की।
भारत सरकार ने 2017 में उन्हें ध्यानचंद पुरस्कार और द्रोणाचार्य लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया।
22 अगस्त 2021 को 82 वर्ष की आयु में कलबुर्गी, कर्नाटक में निधन।

सैयद शाहिद हाकिम भारतीय फुटबॉल के उन चुनिंदा नामों में शामिल हैं, जिन्होंने एक खिलाड़ी और कोच — दोनों भूमिकाओं में देश के इस उपेक्षित खेल को जीवंत बनाए रखा। 23 जून 1939 को हैदराबाद में जन्मे हाकिम ने 1960 के रोम ओलंपिक में भारतीय फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व किया और बाद में कोचिंग के ज़रिए भारतीय फुटबॉल को नई पीढ़ी के खिलाड़ी दिए।

फुटबॉल की विरासत: पिता की छाया में सीखा खेल

शाहिद हाकिम को फुटबॉल की प्रेरणा उनके पिता सैयद अब्दुल रहीम से मिली, जो अपने दौर के प्रतिष्ठित फुटबॉलर थे और फॉरवर्ड की भूमिका में खेलते थे। पिता से ही उन्होंने खेल की बारीकियाँ सीखीं और फुटबॉल को ही अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। यह संयोग नहीं था कि जब शाहिद 1960 में रोम ओलंपिक में उतरे, तो उनके पिता अब्दुल रहीम उसी भारतीय टीम के मुख्य कोच थे।

रोम ओलंपिक 1960: भारत का यादगार प्रदर्शन

रोम ओलंपिक में भारतीय टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन टूर्नामेंट में फ्रांस के खिलाफ 1-1 की बराबरी ने यह साबित किया कि भारतीय फुटबॉल अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकता है। यह मैच आज भी भारतीय फुटबॉल इतिहास के गौरवशाली पलों में गिना जाता है।

घरेलू फुटबॉल में योगदान

राष्ट्रीय टीम के अलावा शाहिद हाकिम ने घरेलू फुटबॉल में सर्विसेज की ओर से खेला और प्रतिष्ठित संतोष ट्रॉफी जीती। उन्होंने भारतीय वायु सेना की टीम का भी प्रतिनिधित्व किया। खिलाड़ी के रूप में संन्यास के बाद वे अंतरराष्ट्रीय रेफरी भी बने और 1988 में एएफसी एशियन कप में अंपायरिंग की।

कोच के रूप में अमिट छाप

सैयद शाहिद हाकिम को एक खिलाड़ी से कहीं अधिक एक कोच के रूप में पहचाना जाता है। वे भारतीय राष्ट्रीय टीम के सहायक कोच रहे और उन्होंने घरेलू फुटबॉल में महिंद्रा यूनाइटेड, सालगांवकर और बंगाल मुंबई जैसे क्लबों को भी अपनी कोचिंग दी। उनके मार्गदर्शन में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी उभरे जिन्होंने आगे चलकर भारतीय फुटबॉल को समृद्ध किया।

सम्मान और विरासत

भारतीय फुटबॉल में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2017 में खेल क्षेत्र के सर्वोच्च सम्मान ध्यानचंद पुरस्कार से नवाज़ा। इसके अतिरिक्त उन्हें द्रोणाचार्य लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। 22 अगस्त 2021 को 82 वर्ष की आयु में कलबुर्गी, कर्नाटक में उनका निधन हो गया। उनका जीवन भारतीय फुटबॉल के लिए समर्पण की एक अटूट मिसाल है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब ध्यानचंद पुरस्कार उनके दरवाज़े पर आया। यह सवाल उठता है कि जिस खेल ने 1960 में फ्रांस को बराबरी पर रोका, उसे संस्थागत समर्थन क्यों नहीं मिला। हाकिम जैसे दिग्गजों की विरासत तब सार्थक होगी जब भारतीय फुटबॉल ढाँचा उनके योगदान को सिर्फ श्रद्धांजलि में नहीं, नीतिगत प्राथमिकता में भी याद करे।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैयद शाहिद हाकिम कौन थे?
सैयद शाहिद हाकिम भारतीय फुटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी और कोच थे, जिनका जन्म 23 जून 1939 को हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने 1960 के रोम ओलंपिक में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और बाद में महिंद्रा यूनाइटेड, सालगांवकर जैसे क्लबों को कोचिंग दी।
1960 रोम ओलंपिक में भारतीय फुटबॉल टीम का प्रदर्शन कैसा रहा?
भारतीय टीम 1960 रोम ओलंपिक में ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन उसने फ्रांस के खिलाफ 1-1 की बराबरी कर अपनी छाप छोड़ी। उस टीम के कोच शाहिद के पिता सैयद अब्दुल रहीम थे।
सैयद शाहिद हाकिम को कौन-से पुरस्कार मिले?
भारत सरकार ने 2017 में उन्हें खेल क्षेत्र के सर्वोच्च सम्मान ध्यानचंद पुरस्कार से नवाज़ा। इसके अलावा उन्हें द्रोणाचार्य लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
सैयद शाहिद हाकिम का निधन कब और कहाँ हुआ?
सैयद शाहिद हाकिम का निधन 22 अगस्त 2021 को 82 वर्ष की आयु में कलबुर्गी, कर्नाटक में हुआ। वे अपने पीछे भारतीय फुटबॉल की एक समृद्ध विरासत छोड़ गए।
सैयद शाहिद हाकिम ने किन क्लबों को कोचिंग दी?
कोच के रूप में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय टीम के सहायक कोच की भूमिका निभाई और घरेलू फुटबॉल में महिंद्रा यूनाइटेड, सालगांवकर और बंगाल मुंबई को कोचिंग दी। उनके मार्गदर्शन में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी उभरे।
राष्ट्र प्रेस
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