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सोमन राणा ने ग्लासगो में शॉट पुट F57 में जीता गोल्ड, सेना में गंवाया था दाहिना पैर

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सोमन राणा ने ग्लासगो में शॉट पुट F57 में जीता गोल्ड, सेना में गंवाया था दाहिना पैर

सारांश

सेना की ड्यूटी में दाहिना पैर गंवाने के बाद 2017 से शुरू की तैयारी, और 2026 में ग्लासगो में 13.40 मीटर के थ्रो के साथ कॉमनवेल्थ गोल्ड — सोमन राणा की कहानी सिर्फ खेल की नहीं, असाधारण इरादे की है।

मुख्य बातें

सोमन राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 , ग्लासगो में शॉट पुट F57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।
उनका विजयी थ्रो 13.40 मीटर रहा, जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
सोमन ने 2006 में भारतीय सेना की ड्यूटी के दौरान अपना दाहिना पैर गंवाया था।
उन्होंने 2017 से पैरा खेलों की तैयारी शुरू की और 2022 एशियाई खेलों में रजत पदक भी जीत चुके हैं।
उन्होंने यह पदक PCI , SAI , भारतीय सेना और अपने परिवार को समर्पित किया।

पैरा एथलीट सोमन राणा ने 2 अगस्त 2026 को ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शॉट पुट F57 स्पर्धा में 13.40 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय सेना में सेवा के दौरान अपना दाहिना पैर गंवा चुके सोमन ने यह उपलब्धि उन तमाम बाधाओं को पार करके हासिल की, जो किसी आम इंसान की कल्पना से परे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

सोमन राणा ने 13.40 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ स्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल किया। यह उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। गौरतलब है कि सोमन इससे पहले 2022 के एशियाई खेलों में रजत पदक जीत चुके हैं, और अब कॉमनवेल्थ स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर का नया शिखर छुआ है।

संघर्ष और हौसले की कहानी

सोमन ने बताया, 'मैं भारतीय सेना से हूं। साल 2006 में ड्यूटी के दौरान मैंने अपना दाहिना पैर गंवा दिया था। इसके बाद मैं ड्यूटी करता रहा, लेकिन फिर मुझे पैरालंपिक खेलों के बारे में पता चला और मैंने साल 2017 से इसके लिए तैयारी शुरू की।' उन्होंने स्वीकार किया कि कृत्रिम पैर लगाकर खेलों की तैयारी करना शुरुआत में बेहद कठिन था। उनके शब्दों में, 'एक पैर गंवाने के बाद पहले बहुत सोचता था, क्योंकि आदमी आम चोट लगने के बाद ठीक से चल नहीं पाता है और मेरा तो एक पैर चला गया था। नकली पैर को लगाकर, उसकी आदत बनाकर खेलों में उतरना बहुत मुश्किल था। मुश्किलों को आसान करते-करते मैं यहां तक पहुंचा।'

प्रेरणा का स्रोत

सोमन ने बताया कि अन्य पैरा एथलीटों को देखकर उनके भीतर जीत का जज़्बा जागा। उन्होंने कहा, 'शुरुआत में समझ नहीं आ रहा था कि नकली पैर लगाकर कैसे चल पाऊंगा और कैसे खेलों में हिस्सा ले पाऊंगा। हालांकि, बाकी पैरा एथलीटों को मैंने देखा, जिनका पूरा पैर ही नहीं था। फिर मुझे लगा कि उनके मुकाबले कम से कम मेरा पैर कुछ तो चलने लायक है — इस तरह से मुझे प्रेरणा मिली।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत के पैरा एथलीट अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

समर्थन और समर्पण

सोमन ने अपनी सफलता का श्रेय पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (PCI), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), भारतीय सेना और अपने परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि सबका सपोर्ट होने की वजह से वे यहां पहुंचकर देश के लिए मेडल जीत सके। उन्होंने यह स्वर्ण पदक इन सभी को समर्पित किया।

आगे की राह

कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक के साथ सोमन राणा अब भविष्य के पैरालंपिक लक्ष्यों की ओर और मज़बूती से बढ़ेंगे। उनकी यह उपलब्धि देश के उन हज़ारों पूर्व सैनिकों के लिए भी प्रेरणा है जो शारीरिक चुनौतियों के बावजूद नई राह तलाश रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन एथलीटों को मिलने वाला संस्थागत समर्थन अभी भी पर्याप्त नहीं है। सोमन ने स्वयं PCI, SAI और सेना का आभार जताया, लेकिन यह भी तथ्य है कि कृत्रिम अंग और पुनर्वास सुविधाएं अधिकांश पूर्व सैनिकों तक नहीं पहुंचतीं। एक पैर गंवाने के बाद 11 साल बाद खेलों में आना और फिर कॉमनवेल्थ स्वर्ण जीतना — यह व्यक्तिगत जिजीविषा की जीत है, लेकिन नीति-निर्माताओं को यह भी सोचना होगा कि ऐसे और कितने सोमन राणा अवसर के अभाव में अनदेखे रह जाते हैं।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोमन राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कौन-सा पदक जीता?
सोमन राणा ने 2 अगस्त 2026 को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शॉट पुट F57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। उनका विजयी थ्रो 13.40 मीटर रहा, जो उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
सोमन राणा ने अपना पैर कैसे गंवाया?
सोमन राणा ने 2006 में भारतीय सेना में ड्यूटी के दौरान अपना दाहिना पैर गंवाया था। इसके बाद भी वे सेना में सेवा जारी रखते रहे और 2017 में पैरा खेलों की तैयारी शुरू की।
सोमन राणा ने पैरा खेलों की तैयारी कब शुरू की?
सोमन राणा ने 2017 में पैरालंपिक खेलों के बारे में जानकारी मिलने के बाद तैयारी शुरू की। इससे पहले 2022 के एशियाई खेलों में उन्होंने रजत पदक जीता था और अब 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
सोमन राणा को किसने प्रेरित किया?
सोमन राणा ने बताया कि अन्य पैरा एथलीटों को देखकर उन्हें प्रेरणा मिली, जिनका पूरा पैर ही नहीं था। उन्होंने महसूस किया कि उनकी स्थिति उन एथलीटों से बेहतर है और उन्हें खेलों में भाग लेना चाहिए।
सोमन राणा ने अपना गोल्ड मेडल किसे समर्पित किया?
सोमन राणा ने अपना कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (PCI), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), भारतीय सेना और अपने परिवार को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि इन सभी के समर्थन के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं होती।
राष्ट्र प्रेस
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