सोमन राणा ने ग्लासगो में शॉट पुट F57 में जीता गोल्ड, सेना में गंवाया था दाहिना पैर
सारांश
मुख्य बातें
पैरा एथलीट सोमन राणा ने 2 अगस्त 2026 को ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शॉट पुट F57 स्पर्धा में 13.40 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय सेना में सेवा के दौरान अपना दाहिना पैर गंवा चुके सोमन ने यह उपलब्धि उन तमाम बाधाओं को पार करके हासिल की, जो किसी आम इंसान की कल्पना से परे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सोमन राणा ने 13.40 मीटर के अपने सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ स्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल किया। यह उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। गौरतलब है कि सोमन इससे पहले 2022 के एशियाई खेलों में रजत पदक जीत चुके हैं, और अब कॉमनवेल्थ स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर का नया शिखर छुआ है।
संघर्ष और हौसले की कहानी
सोमन ने बताया, 'मैं भारतीय सेना से हूं। साल 2006 में ड्यूटी के दौरान मैंने अपना दाहिना पैर गंवा दिया था। इसके बाद मैं ड्यूटी करता रहा, लेकिन फिर मुझे पैरालंपिक खेलों के बारे में पता चला और मैंने साल 2017 से इसके लिए तैयारी शुरू की।' उन्होंने स्वीकार किया कि कृत्रिम पैर लगाकर खेलों की तैयारी करना शुरुआत में बेहद कठिन था। उनके शब्दों में, 'एक पैर गंवाने के बाद पहले बहुत सोचता था, क्योंकि आदमी आम चोट लगने के बाद ठीक से चल नहीं पाता है और मेरा तो एक पैर चला गया था। नकली पैर को लगाकर, उसकी आदत बनाकर खेलों में उतरना बहुत मुश्किल था। मुश्किलों को आसान करते-करते मैं यहां तक पहुंचा।'
प्रेरणा का स्रोत
सोमन ने बताया कि अन्य पैरा एथलीटों को देखकर उनके भीतर जीत का जज़्बा जागा। उन्होंने कहा, 'शुरुआत में समझ नहीं आ रहा था कि नकली पैर लगाकर कैसे चल पाऊंगा और कैसे खेलों में हिस्सा ले पाऊंगा। हालांकि, बाकी पैरा एथलीटों को मैंने देखा, जिनका पूरा पैर ही नहीं था। फिर मुझे लगा कि उनके मुकाबले कम से कम मेरा पैर कुछ तो चलने लायक है — इस तरह से मुझे प्रेरणा मिली।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत के पैरा एथलीट अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
समर्थन और समर्पण
सोमन ने अपनी सफलता का श्रेय पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (PCI), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), भारतीय सेना और अपने परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि सबका सपोर्ट होने की वजह से वे यहां पहुंचकर देश के लिए मेडल जीत सके। उन्होंने यह स्वर्ण पदक इन सभी को समर्पित किया।
आगे की राह
कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक के साथ सोमन राणा अब भविष्य के पैरालंपिक लक्ष्यों की ओर और मज़बूती से बढ़ेंगे। उनकी यह उपलब्धि देश के उन हज़ारों पूर्व सैनिकों के लिए भी प्रेरणा है जो शारीरिक चुनौतियों के बावजूद नई राह तलाश रहे हैं।