अंडर-18 हॉकी एशिया कप: शूटआउट में चीन ने भारत को 3-1 से हराया, फाइनल से बाहर हुई भारतीय महिला टीम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय अंडर-18 महिला हॉकी टीम का अंडर-18 हॉकी एशिया कप 2026 के फाइनल में पहुँचने का सपना काकामिगाहारा में टूट गया, जब 5 जून को खेले गए सेमीफाइनल में चीन ने शूटआउट में 3-1 से जीत दर्ज की। नियमित समय में दोनों टीमें 2-2 की बराबरी पर रहीं, लेकिन पेनल्टी शूटआउट में चीनी गोलकीपर लियू जू के शानदार बचावों ने भारत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
भारत ने मुकाबले की शुरुआत आक्रामक अंदाज़ में की। महज़ तीसरे मिनट में कप्तान स्वीटी कुजूर ने मिडफील्ड से सर्कल के अंदर नौशीन नाज को सटीक पास दिया, और नौशीन ने करारे शॉट से भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी। पहले क्वार्टर में दोनों टीमों ने सर्कल के अंदर कई मौके बनाए, लेकिन स्कोर में बदलाव नहीं हुआ।
21वें मिनट में चीन को पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे भारतीय गोलकीपर महाक परिहार ने फेंग जियाक्सिन के ड्रैगफ्लिक को रोककर बेकार कर दिया। हालाँकि, 24वें मिनट में भारतीय डिफेंस की एक चूक का फायदा उठाते हुए चीन की ली जेयान ने फील्ड गोल दागकर बराबरी कर ली।
तीसरे और चौथे क्वार्टर का रोमांच
तीसरे क्वार्टर में 34वें मिनट में चीन को फिर पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन भारतीय बैकलाइन ने दृढ़ता से गोल होने से बचाया। 43वें मिनट में भारत को लगातार पेनल्टी कॉर्नर मिले, परन्तु चीनी डिफेंस को भेदना संभव नहीं हो सका। चौथे क्वार्टर के 48वें मिनट में चीन की झांग युझेंग ने पेनल्टी कॉर्नर के रिबाउंड पर गोल कर 2-1 की बढ़त बना ली, लेकिन भारत ने जल्द ही जवाब दिया।
54वें मिनट में किरण एक्का ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील कर स्कोर 2-2 कर दिया और मुकाबले को शूटआउट तक खींच लिया। यह गोल भारत के संघर्ष और टीम की मानसिक दृढ़ता का प्रमाण था।
शूटआउट में चीन का दबदबा
पेनल्टी शूटआउट में चीन की गोलकीपर लियू जू ने कई अहम बचाव किए। चीन की ओर से लू टोंग टोंग, गे चेन और गुओ जियाक्सिन ने शूटआउट में गोल दागे, जबकि भारत की तरफ से केवल संदीपा कुमारी ही गोल करने में सफल रहीं। अंततः चीन ने शूटआउट 3-1 से जीतकर फाइनल में प्रवेश किया।
भारत का प्रदर्शन और आगे की राह
गौरतलब है कि भारतीय टीम ने पूरे मुकाबले में कड़ी टक्कर दी और नियमित समय में चीन को बराबरी पर रोकने में सफल रही। कप्तान स्वीटी कुजूर की लीडरशिप और गोलकीपर महाक परिहार के कई अहम बचाव भारत की ताकत के रूप में उभरे। अब भारतीय टीम तीसरे स्थान के लिए होने वाले मैच में उतरेगी, जहाँ वह कांस्य पदक के लिए दावेदारी पेश करेगी।
यह हार निराशाजनक ज़रूर है, लेकिन युवा भारतीय खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन देश की हॉकी पाइपलाइन की मज़बूती का संकेत देता है।