वैभव सूर्यवंशी: T20I में अर्धशतक जड़ने वाले दुनिया के सबसे युवा बल्लेबाज, 15 साल 118 दिन की उम्र में रचा इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
वैभव सूर्यवंशी ने 24 जुलाई 2026 को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में जिम्बाब्वे के विरुद्ध मात्र 19 गेंदों में 50 रन की विस्फोटक पारी खेलकर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक लगाने वाले दुनिया के सबसे युवा बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया। उस वक्त उनकी उम्र महज 15 साल और 118 दिन थी। इस पारी में उन्होंने 4 छक्के और 4 चौके जड़े, जिसने हरारे के मैदान पर मौजूद दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
किसका रिकॉर्ड तोड़ा
वैभव ने यह उपलब्धि हासिल करते हुए जिब्राल्टर के बल्लेबाज लुई ब्रूस का रिकॉर्ड ध्वस्त किया, जिन्होंने 2021 में माल्टा के विरुद्ध 16 साल और 56 दिन की उम्र में यह कारनामा किया था। इस सूची में तीसरे स्थान पर कविन चड्ढा हैं, जिन्होंने 2026 में इंडोनेशिया की तरफ से खेलते हुए 16 साल और 76 दिन की उम्र में स्वीडन के विरुद्ध अर्धशतक लगाया था।
चौथे पायदान पर सिएरा लियोन के अलुसीन तुरे हैं, जिन्होंने 16 साल और 89 दिन की उम्र में 2023 में घाना के खिलाफ यह उपलब्धि हासिल की थी। पाँचवें स्थान पर भूटान के तेनजिन रबगी (16 साल 118 दिन) हैं, जिन्होंने 2023 में चीन के खिलाफ अपना पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक जड़ा था।
पूर्ण-सदस्यीय टीमों में भी अग्रणी
पूर्ण-सदस्यीय ICC टीमों के बल्लेबाजों में वैभव इस मामले में शीर्ष पर हैं। दूसरे स्थान पर अफगानिस्तान के रहमानुल्लाह गुरबाज हैं, जिन्होंने 2019 में जिम्बाब्वे के विरुद्ध 17 साल और 296 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी — वैभव उनसे करीब दो साल छोटे हैं।
भारतीय क्रिकेट के सबसे युवा खिलाड़ियों में
वैभव सूर्यवंशी ने 15 साल और 99 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था, जिसके साथ उन्होंने सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ते हुए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। 'मास्टर-ब्लास्टर' तेंदुलकर ने 16 साल और 205 दिन की उम्र में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। भारतीय महिला क्रिकेटरों में शेफाली वर्मा (15 साल और 239 दिन) सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय पदार्पण के मामले में शीर्ष पर हैं।
जिम्बाब्वे दौरे से पहले का सफर
वैभव ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच इंग्लैंड दौरे पर खेला था, जिसमें वे केवल 14 रन बना सके। उसी सीरीज के अगले दो मुकाबलों में उन्होंने 13 और 15 रन जोड़े। हालाँकि, जिम्बाब्वे दौरे पर वैभव ने अपनी असली प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए एक ऐसी पारी खेली जो क्रिकेट इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय क्रिकेट युवा प्रतिभाओं को तेज़ी से अंतरराष्ट्रीय मंच देने की नीति पर चल रहा है।
आगे की राह
गौरतलब है कि वैभव अभी भी अपने करियर के बिल्कुल शुरुआती दौर में हैं। उनकी इस पारी ने न केवल रिकॉर्ड बुक में उनका नाम दर्ज कराया, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर उम्मीदें भी बढ़ा दी हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों की नज़रें अब उनके अगले मुकाबलों पर टिकी होंगी।