14 जुलाई 2026
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विनेश फोगाट को सुप्रीम कोर्ट से राहत, 30-31 मई के एशियन गेम्स ट्रायल में मिली भागीदारी की अनुमति

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विनेश फोगाट को सुप्रीम कोर्ट से राहत, 30-31 मई के एशियन गेम्स ट्रायल में मिली भागीदारी की अनुमति

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने WFI की चुनौती खारिज करते हुए विनेश फोगाट को एशियन गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल में उतरने की इजाजत दे दी। अनुशासनहीनता और WADA नियम उल्लंघन के आरोपों के बीच यह फैसला भारतीय कुश्ती के भीतर चल रहे संस्थागत टकराव को उजागर करता है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मई को विनेश फोगाट को एशियन गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी।
ट्रायल 30 और 31 मई को निर्धारित हैं; SAI और IOA के स्वतंत्र पर्यवेक्षक मौजूद रहेंगे।
WFI ने विनेश पर अनुशासनहीनता और डोपिंग रोधी नियम उल्लंघन के आरोप लगाते हुए 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं पर रोक लगाई थी।
WFI ने WADA नियम 5.6.1 का हवाला देते हुए कहा था कि संन्यास से लौटने वाले खिलाड़ी को छह महीने का नोटिस पूरा करना अनिवार्य है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने WFI को नोटिस भेजने पर फटकार लगाई थी और मातृत्व सम्मान का उल्लेख किया था।

भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मई को बड़ी राहत देते हुए एशियन गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी। यह ट्रायल 30 और 31 मई को निर्धारित हैं। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) द्वारा लगाई गई रोक को अदालत ने इस प्रकार निष्प्रभावी कर दिया।

मुख्य घटनाक्रम

WFI ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसमें विनेश को ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। उच्च न्यायालय ने WFI को विनेश को नोटिस भेजने पर फटकार भी लगाई थी और कहा था कि देश में मातृत्व का सम्मान किया जाता है तथा फेडरेशन का पुराने सिलेक्शन मानदंडों से हटना बहुत कुछ कहता है।

ट्रायल की निगरानी व्यवस्था

न्यायालय के निर्देशानुसार 30-31 मई के सिलेक्शन ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग WFI द्वारा की जाएगी। इसके अतिरिक्त भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) का एक-एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक भी ट्रायल के दौरान उपस्थित रहेगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

WFI के आरोप और प्रतिबंध

WFI ने विनेश को 'कारण बताओ नोटिस' भेजकर चार सवालों के जवाब माँगे थे और उन पर अनुशासनहीनता तथा डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए थे। फेडरेशन ने 26 जून 2026 तक विनेश के किसी भी घरेलू प्रतियोगिता में भाग लेने पर रोक लगा दी थी, जिसके कारण वे नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में भी नहीं खेल सकी थीं।

WADA नियम और संन्यास से वापसी का विवाद

WFI का तर्क था कि WADA के नियम 5.6.1 के तहत संन्यास से वापसी कर रहे खिलाड़ियों को किसी भी टूर्नामेंट में खेलने से पहले कम से कम छह महीने का नोटिस पूरा करना अनिवार्य है। इसी आधार पर फेडरेशन ने विनेश की ट्रायल में भागीदारी की अपील को ठुकरा दिया था, जिसके बाद विनेश ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

क्या होगा आगे

सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद विनेश फोगाट अब एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय दल में जगह पाने की दौड़ में शामिल हो सकेंगी। ट्रायल के परिणाम और WFI की अनुशासनात्मक कार्रवाई की आगे की दिशा इस मामले में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विनेश फोगाट को सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मिली?
सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मई को विनेश फोगाट को एशियन गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दे दी। WFI ने दिल्ली उच्च न्यायालय के इसी आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जो खारिज हो गई।
एशियन गेम्स 2026 के लिए सिलेक्शन ट्रायल कब होंगे?
ट्रायल 30 और 31 मई को निर्धारित हैं। न्यायालय के आदेश के अनुसार इनकी वीडियो रिकॉर्डिंग WFI करेगी और SAI तथा IOA के स्वतंत्र पर्यवेक्षक मौजूद रहेंगे।
WFI ने विनेश फोगाट पर क्यों प्रतिबंध लगाया था?
WFI ने विनेश पर अनुशासनहीनता और डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर रोक लगाई थी। फेडरेशन ने 'कारण बताओ नोटिस' भेजकर चार सवालों के जवाब भी माँगे थे।
WADA नियम 5.6.1 क्या है और इसका विनेश के मामले से क्या संबंध है?
WADA नियम 5.6.1 के तहत संन्यास से वापसी कर रहे खिलाड़ियों को किसी भी प्रतियोगिता में खेलने से पहले कम से कम छह महीने का नोटिस पूरा करना अनिवार्य है। WFI ने इसी नियम का हवाला देकर विनेश को ट्रायल में भाग लेने से रोका था।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने WFI को फटकार क्यों लगाई थी?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने WFI को विनेश को नोटिस भेजने के तरीके पर फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा था कि देश में मातृत्व का सम्मान किया जाता है और WFI का पुराने सिलेक्शन मानदंडों से हटना बहुत कुछ कहता है।
राष्ट्र प्रेस
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