6 जुलाई 2026
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विनेश फोगाट मामला: दिल्ली हाईकोर्ट का WFI को दो हफ्ते में 'कारण बताओ नोटिस' पर फैसला लेने का आदेश

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विनेश फोगाट मामला: दिल्ली हाईकोर्ट का WFI को दो हफ्ते में 'कारण बताओ नोटिस' पर फैसला लेने का आदेश

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने WFI को विनेश फोगाट के 'कारण बताओ नोटिस' पर दो हफ्ते में फैसला लेने का निर्देश दिया। तीन बार की ओलंपियन एशियन गेम्स ट्रायल में मीनाक्षी गोयत से 4-6 से हारकर टीम में जगह बनाने से चूक गईं। अब अनुशासनात्मक कार्रवाई का अगला दौर तय करेगा उनका भविष्य।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 जुलाई 2026 को WFI को विनेश फोगाट के 'कारण बताओ नोटिस' पर दो हफ्ते में फैसला लेने का आदेश दिया।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने एशियन गेम्स सिलेक्शन ट्रायल से बाहर किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका बेअसर मानकर खारिज की।
WFI ने अदालत को भरोसा दिलाया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई में अंतिम फैसले से पहले फोगाट को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
फोगाट को 9 मई को 15 पृष्ठों का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमें अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग उल्लंघन के आरोप हैं।
30-31 मई को इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में हुए ट्रायल में फोगाट महिला 53 किग्रा सेमीफाइनल में मीनाक्षी गोयत से 4-6 से हारकर 2026 एशियन गेम्स टीम से बाहर हो गईं।
फोगाट को WFI की व्यापक चयन नीति के मुद्दों पर अलग से नई रिट याचिका दायर करने की छूट दी गई है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार, 6 जुलाई 2026 को रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) को निर्देश दिया कि वह पहलवान विनेश फोगाट को 9 मई को जारी किए गए 'कारण बताओ नोटिस' पर दो हफ्ते के भीतर अपना फैसला सुनाए और उसे रिकॉर्ड पर लाए। साथ ही, अदालत ने एशियन गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल से बाहर किए जाने को चुनौती देने वाली फोगाट की याचिका को बेअसर मानते हुए खारिज कर दिया।

अदालत का आदेश और आधार

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की सिंगल-जज बेंच ने स्पष्ट किया कि यह रिट याचिका अब सुनवाई योग्य नहीं रही, क्योंकि पूर्व अदालती आदेशों के तहत फोगाट को सिलेक्शन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति पहले ही मिल चुकी थी। जस्टिस शर्मा ने अपने आदेश में दर्ज किया कि फोगाट ट्रायल में हिस्सा ले चुकी हैं, अतः भाग लेने से वंचित किए जाने की चुनौती अब निरर्थक हो चुकी है।

याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने WFI को यह भी निर्देश दिया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई में कोई अंतिम निर्णय लेने से पहले फोगाट को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाए। फेडरेशन ने जस्टिस शर्मा के समक्ष इस आशय का भरोसा भी दिलाया।

मुख्य घटनाक्रम: विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब शुरू हुआ जब WFI ने तीन बार की ओलंपियन विनेश फोगाट को 9 मई को 15 पृष्ठों का कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसमें अनुशासनहीनता, एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कुश्ती नियमों को तोड़ने के आरोप लगाए गए थे। फेडरेशन ने उन्हें 26 जून तक WFI-अनुमोदित प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अयोग्य भी घोषित कर दिया था।

इसके बाद फोगाट ने अनुशासनात्मक कार्रवाई और एशियन गेम्स सिलेक्शन ट्रायल के लिए बदले गए पात्रता मानदंडों, दोनों को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।

डिवीजन बेंच और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका

प्रारंभ में सिंगल-जज बेंच ने WFI का पक्ष सुने बिना फोगाट को 30-31 मई के सिलेक्शन ट्रायल में अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद फोगाट दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के पास पहुँचीं।

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने फोगाट को सिलेक्शन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी और महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि मातृत्व को किसी महिला एथलीट को पेशेवर अवसरों से वंचित करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। डिवीजन बेंच ने WFI के बदले हुए पात्रता मानदंडों पर भी सवाल उठाए और चयन प्रक्रिया की वीडियो-रिकॉर्डिंग स्वतंत्र पर्यवेक्षक की देखरेख में कराने का निर्देश दिया।

WFI ने इस अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सर्वोच्च न्यायालय ने सिलेक्शन ट्रायल जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट की कुछ अंतरिम टिप्पणियों पर चिंता भी जताई। बाद में ट्रायल पूरे होने पर सुप्रीम कोर्ट ने WFI की स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को बेअसर मानते हुए निपटा दिया और स्पष्ट किया कि उसके आदेश को WFI के विरुद्ध दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणियों की पुष्टि नहीं माना जाए।

सिलेक्शन ट्रायल में फोगाट का प्रदर्शन

फोगाट की वापसी की कोशिश को 30-31 मई को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित एशियन गेम्स चयन ट्रायल में झटका लगा। महिला 53 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में उन्हें मीनाक्षी गोयत के हाथों 4-6 से हार का सामना करना पड़ा और वे जापान के आइची-नागोया में होने वाले 2026 एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने में असफल रहीं।

आगे क्या होगा

अब WFI को दो हफ्तों के भीतर 'कारण बताओ नोटिस' पर अपना निर्णय फोगाट और अदालत को सूचित करना होगा। फोगाट के वकील ने सुनवाई के दौरान यह भी तर्क दिया था कि याचिका में WFI की व्यापक चयन नीति से जुड़े बड़े मुद्दे उठाए गए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मुद्दों के लिए अलग से नई रिट याचिका दायर की जा सकती है, और फोगाट को यह छूट दी गई है। गौरतलब है कि यह मामला भारतीय खेल प्रशासन में महिला एथलीटों के अधिकारों और फेडरेशन की जवाबदेही के व्यापक सवालों को भी उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक ऐतिहासिक सिद्धांत है जिसे WFI जैसी संस्थाएँ अनदेखा करती रही हैं। अब जब ट्रायल में फोगाट की हार हो चुकी है, असली सवाल यह है कि क्या 'कारण बताओ नोटिस' की अनुशासनात्मक प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, या यह महज़ औपचारिकता बनकर रह जाएगी। अदालत का हस्तक्षेप ज़रूरी था, लेकिन दीर्घकालिक सुधार के लिए खेल मंत्रालय को WFI की चयन नीतियों और अनुशासनात्मक ढाँचे की स्वतंत्र समीक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने WFI को क्या आदेश दिया है?
दिल्ली हाईकोर्ट ने WFI को निर्देश दिया है कि वह विनेश फोगाट को 9 मई को जारी 'कारण बताओ नोटिस' पर दो हफ्ते के भीतर फैसला ले और उसे रिकॉर्ड पर लाए। अनुशासनात्मक कार्रवाई में कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले फोगाट को अपना पक्ष रखने का अवसर देना भी अनिवार्य किया गया है।
विनेश फोगाट को WFI ने 'कारण बताओ नोटिस' क्यों जारी किया था?
WFI ने तीन बार की ओलंपियन विनेश फोगाट को 9 मई को 15 पृष्ठों का कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें अनुशासनहीनता, एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कुश्ती नियमों को तोड़ने के आरोप लगाए गए थे। फेडरेशन ने उन्हें 26 जून तक WFI-अनुमोदित प्रतियोगिताओं के लिए अयोग्य भी घोषित किया था।
एशियन गेम्स 2026 सिलेक्शन ट्रायल में विनेश फोगाट का क्या हुआ?
30-31 मई को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में हुए एशियन गेम्स चयन ट्रायल में विनेश फोगाट महिला 53 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में मीनाक्षी गोयत से 4-6 से हार गईं। इस हार के कारण वे जापान के आइची-नागोया में होने वाले 2026 एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में जगह नहीं बना सकीं।
डिवीजन बेंच ने फोगाट के मामले में क्या महत्वपूर्ण टिप्पणी की?
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि मातृत्व को किसी महिला एथलीट को पेशेवर मौकों से बाहर करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। बेंच ने WFI के बदले हुए पात्रता मानदंडों पर सवाल उठाते हुए चयन प्रक्रिया की वीडियो-रिकॉर्डिंग स्वतंत्र पर्यवेक्षक की देखरेख में कराने का भी निर्देश दिया था।
अब विनेश फोगाट के पास क्या कानूनी विकल्प हैं?
दिल्ली हाईकोर्ट ने फोगाट को WFI की व्यापक चयन नीति और अन्य बड़े मुद्दों पर अलग से नई रिट याचिका दायर करने की छूट दी है। फिलहाल WFI को दो हफ्ते में 'कारण बताओ नोटिस' पर फैसला सुनाना है, जिसके बाद फोगाट उस निर्णय को भी अदालत में चुनौती दे सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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