विनेश फोगाट को एशियाई खेल 2026 ट्रायल्स में मिली जगह, डब्ल्यूएफआई ने दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश स्वीकारा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को स्वीकार कर लिया है जिसमें ओलंपियन विनेश फोगाट को एशियाई खेल 2026 के चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दी गई है। महासंघ के सूत्रों ने रविवार, 25 मई को पुष्टि की कि संस्था इस फैसले को चुनौती नहीं देगी। ये ट्रायल्स 30 और 31 मई को नई दिल्ली में आयोजित होने हैं।
मुख्य घटनाक्रम
दिल्ली हाईकोर्ट ने 24 मई को डब्ल्यूएफआई को निर्देश दिया था कि दो बार की विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता विनेश फोगाट को ट्रायल्स में हिस्सा लेने से नहीं रोका जाए। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि पूरी चयन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाए और इसकी निगरानी भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) तथा भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के स्वतंत्र पर्यवेक्षकों द्वारा की जाए। कोर्ट के आदेश के एक दिन बाद महासंघ ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा, 'हम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं और संघ इस फैसले को चुनौती नहीं देगा। विनेश फोगाट को ट्रायल्स में हिस्सा लेने दिया जाएगा।'
लॉजिस्टिक्स की बाधा
हालांकि, महासंघ ने यह भी संकेत दिया कि यदि फोगाट ट्रायल्स के जरिए क्वालिफाई भी कर लेती हैं, तो व्यावहारिक दिक्कतें आ सकती हैं, क्योंकि इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों की सूची इस महीने की शुरुआत में ही जापान भेजी जा चुकी है। सूत्रों के अनुसार, 'अब यह हमारे हाथ में नहीं है। अगर किसी तरह हम उन्हें एक 'आइकॉनिक खिलाड़ी' के तौर पर टीम में शामिल कर भी लेते हैं, तो उन्हें 50 किलोग्राम वर्ग में ही मुकाबला करना होगा।'
अदालत की टिप्पणियाँ और मातृत्व का सवाल
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अपने आदेश में डब्ल्यूएफआई की चयन नीति की कड़ी आलोचना की। अदालत ने कहा कि महासंघ की नीति में फोगाट के मातृत्व अवकाश और प्रसव के बाद ठीक होने की अवधि को ठीक से ध्यान में नहीं रखा गया, जो पात्रता मानदंडों के तहत सूचीबद्ध क्वालिफाइंग प्रतियोगिताओं के साथ ही पड़ रही थी। बेंच ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मातृत्व को जीवन का एक स्वाभाविक और बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू माना जाना चाहिए, जिसके लिए विशेष व्यवस्था और संस्थागत संवेदनशीलता की जरूरत होती है।' अदालत ने यह भी जोड़ा कि फोगाट को ट्रायल्स से बाहर रखना उनकी लंबित रिट याचिका को बेमानी बना देता।
डब्ल्यूएफआई के नोटिस पर न्यायालय की फटकार
अदालत ने इस महीने की शुरुआत में फोगाट को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में डब्ल्यूएफआई द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा की भी आलोचना की। यह नोटिस पेरिस ओलंपिक के फाइनल से उनके अयोग्य घोषित होने के संदर्भ में जारी किया गया था, जो 'वेट-इन' में असफल रहने के कारण हुआ था। बेंच ने फेडरेशन की उन टिप्पणियों को 'निंदनीय' और 'बदले की भावना से प्रेरित' बताया, जिनमें उस घटना को 'राष्ट्रीय शर्मिंदगी' कहा गया था। गौरतलब है कि अदालत ने यह भी पाया कि डब्ल्यूएफआई के पिछले दिशानिर्देशों के तहत 'प्रतिष्ठित खिलाड़ियों' को सामान्य पात्रता शर्तें पूरी किए बिना भी ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दी गई थी — जो महासंघ की 'एकसमान नीति' के दावे को कमजोर करता है।
आगे क्या होगा
फोगाट का भाग्य अब 30-31 मई के ट्रायल्स पर टिका है। यदि वे क्वालिफाई करती हैं, तो महासंघ और आईओए को जापान को भेजी जा चुकी सूची में संशोधन की प्रक्रिया तलाशनी होगी। यह मामला भारतीय खेल नीति में मातृत्व संरक्षण की व्यापक बहस को भी नई दिशा दे सकता है।