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विल्सन जोन्स: बिलियर्ड्स विश्व चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय, 12 बार जीता राष्ट्रीय खिताब

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विल्सन जोन्स: बिलियर्ड्स विश्व चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय, 12 बार जीता राष्ट्रीय खिताब

सारांश

विल्सन जोन्स — वह नाम जिसने भारतीय बिलियर्ड्स को दुनिया के नक्शे पर रखा। 1958 में विश्व चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय, 12 राष्ट्रीय खिताब, पद्म श्री और द्रोणाचार्य — यह सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं, एक खेल की नींव की कहानी है।

मुख्य बातें

विल्सन जोन्स 1958 में बिलियर्ड्स विश्व चैंपियनशिप जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।
उन्होंने करियर में 12 बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती; पहला खिताब 1950 में हासिल किया।
1964 में दूसरी बार विश्व चैंपियन बने; 1967 में खिलाड़ी के रूप में संन्यास लिया।
भारत सरकार ने उन्हें 1962 में अर्जुन पुरस्कार और 1965 में पद्म श्री से सम्मानित किया।
1996 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाज़ा गया; कोच के रूप में ओम अग्रवाल और अशोक शांडिल्य को तराशा।
5 अक्टूबर 2003 को निधन; भारतीय बिलियर्ड्स में उनकी विरासत अमर है।

भारतीय बिलियर्ड्स के इतिहास में विल्सन जोन्स का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। वह इस खेल में विश्व चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी थे और उन्होंने अपनी उपलब्धियों से भारतीय बिलियर्ड्स को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। आज भले ही पंकज आडवाणी इस खेल का सबसे जाना-पहचाना नाम हों, लेकिन वह ज़मीन विल्सन जोन्स ने तैयार की थी।

खेल से प्रेम की शुरुआत

विल्सन जोन्स को बचपन से ही खेलों का गहरा शौक था। हॉकी और क्रिकेट के अलावा वह कंचे खेलने में भी निपुण थे। बिलियर्ड्स से उनका पहला परिचय तब हुआ जब वह खिड़की से अपने अंकल को यह खेल खेलते हुए देखा करते थे। धीरे-धीरे इस खेल की बारीकियों ने उन्हें अपनी ओर खींच लिया।

17 वर्ष की आयु में उन्होंने बिलियर्ड्स खेलना शुरू किया। उन दिनों वह दिन में फैक्ट्री में काम करते और शाम को क्यू-बॉल थामते — यह अनुशासन और लगन ही उनकी सफलता की नींव बनी।

राष्ट्रीय स्तर पर उभरना

1949 में विल्सन पहली बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उतरे, जहाँ टी.जे. सेल्वाराज ने उन्हें हराया। लेकिन यह हार उन्हें तोड़ नहीं सकी। ठीक अगले वर्ष 1950 में उन्होंने वही मुकाबला पलटा और सेल्वाराज को हराकर राष्ट्रीय चैंपियन का ताज पहना। अपने करियर में उन्होंने कुल 12 बार राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया — एक ऐसा कीर्तिमान जो उनकी निरंतरता और वर्चस्व की गवाही देता है।

विश्व चैंपियनशिप का सफर

अंतरराष्ट्रीय मंच पर राह आसान नहीं थी। 1951, 1952 और 1954 में विश्व चैंपियनशिप में असफलता मिली। परंतु 1958 में विल्सन ने इतिहास रच दिया — शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने विश्व चैंपियनशिप जीती और बिलियर्ड्स में विश्व खिताब हासिल करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए।

1962 में वह फिर फाइनल तक पहुँचे, लेकिन इस बार खिताब हाथ से फिसल गया। दो वर्ष बाद 1964 में उन्होंने एक बार और विश्व चैंपियनशिप जीती और अपने नाम दो विश्व खिताब दर्ज किए।

संन्यास और कोचिंग की विरासत

1967 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतने के बाद विल्सन जोन्स ने बतौर खिलाड़ी बिलियर्ड्स को अलविदा कह दिया। संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग की राह पकड़ी और अपनी विशेषज्ञता अगली पीढ़ी को सौंपी। ओम अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल और अशोक शांडिल्य जैसे खिलाड़ी उनके मार्गदर्शन में ही निखरे।

पुरस्कार और सम्मान

भारत सरकार और महाराष्ट्र सरकार ने उनके योगदान को कई बार सराहा। उन्हें 1962 में अर्जुन पुरस्कार, 1965 में पद्म श्री, 1990 में महाराष्ट्र गौरव पुरस्कार और 1996 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाज़ा गया — यह सम्मानों की वह सूची है जो खिलाड़ी और गुरु दोनों रूपों में उनकी महानता को रेखांकित करती है।

5 अक्टूबर 2003 को विल्सन जोन्स का निधन हो गया, लेकिन भारतीय बिलियर्ड्स में उनकी विरासत आज भी जीवंत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना स्पॉन्सरशिप के। आज जब बिलियर्ड्स पंकज आडवाणी के दबदबे से पहचाना जाता है, तो यह भूलना आसान है कि आडवाणी जिस ज़मीन पर खड़े हैं, उसे जोन्स ने अपने हाथों से तैयार किया था। असली सवाल यह है कि क्या भारतीय खेल प्रशासन ने जोन्स जैसे अग्रदूतों को वह स्थायी स्मृति दी है जिसके वे हकदार हैं — या उनकी विरासत केवल पुरस्कारों की सूची तक सिमटकर रह गई है?
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विल्सन जोन्स कौन थे?
विल्सन जोन्स भारत के पहले बिलियर्ड्स विश्व चैंपियन थे। उन्होंने 1958 में पहली बार और 1964 में दूसरी बार विश्व खिताब जीता, और अपने करियर में 12 राष्ट्रीय चैंपियनशिप हासिल कीं।
विल्सन जोन्स ने बिलियर्ड्स कब शुरू किया?
विल्सन जोन्स ने 17 वर्ष की आयु में बिलियर्ड्स खेलना शुरू किया। वह दिन में फैक्ट्री में काम करते और शाम को अभ्यास करते थे।
विल्सन जोन्स को कौन-कौन से सरकारी पुरस्कार मिले?
उन्हें 1962 में अर्जुन पुरस्कार, 1965 में पद्म श्री, 1990 में महाराष्ट्र गौरव पुरस्कार और 1996 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
विल्सन जोन्स ने किन खिलाड़ियों को कोचिंग दी?
संन्यास के बाद विल्सन जोन्स ने कोचिंग की ओर रुख किया और ओम अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल तथा अशोक शांडिल्य जैसे खिलाड़ियों को बिलियर्ड्स की बारीकियाँ सिखाईं।
विल्सन जोन्स का निधन कब हुआ?
विल्सन जोन्स का निधन 5 अक्टूबर 2003 को हुआ। वह भारतीय बिलियर्ड्स के उस युग के प्रतीक थे जिसने इस खेल को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
राष्ट्र प्रेस
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