पंकज आडवाणी: 10 साल की उम्र में स्नूकर से शुरुआत, 28 विश्व खिताब जीतकर रचा इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय बिलियर्ड्स और स्नूकर के सर्वकालिक महान खिलाड़ी पंकज आडवाणी ने महज 10 साल की उम्र में पहली बार स्नूकर टेबल पर क्यू थामी और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। पुणे, महाराष्ट्र में जन्मे इस खिलाड़ी ने अपने ऐतिहासिक करियर में बिलियर्ड्स और स्नूकर को मिलाकर कुल 28 विश्व खिताब अपने नाम किए — एक ऐसी उपलब्धि जो विश्व खेल इतिहास में दुर्लभ है।
बचपन और खेल से पहली मुलाकात
24 जुलाई 1985 को पुणे में जन्मे पंकज आडवाणी के बचपन के दिनों में भारत में बिलियर्ड्स और स्नूकर को बेहद सीमित पहचान मिली थी। उनके बड़े भाई स्नूकर खेलते थे और छोटे पंकज घंटों उन्हें देखते रहते थे। धीरे-धीरे यह जिज्ञासा जुनून में बदल गई और 10 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली बार स्नूकर टेबल पर हाथ आजमाया।
गुरु की छत्रछाया में निखरी प्रतिभा
पंकज को उनके पहले कोच के रूप में द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता अरविंद सावूर का मार्गदर्शन मिला। सावूर की देखरेख में पंकज ने इस खेल की बारीकियाँ सीखीं और अपनी तकनीक को धार दी। इसी प्रशिक्षण का परिणाम था कि मात्र 17 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला खिताब जीत लिया।
ऐतिहासिक उपलब्धियाँ और विश्व रिकॉर्ड
पंकज ने 2003 में आईबीएसएफ विश्व स्नूकर चैंपियनशिप जीतकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी धाक जमाई। इसके बाद 2005 में उन्होंने वह कारनामा किया जो इससे पहले दुनिया में कोई नहीं कर सका था — एक ही वर्ष में आईबीएसएफ वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप के प्वाइंट और टाइम दोनों प्रारूप जीतकर 'ग्रैंड डबल' पूरा किया। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वे विश्व के पहले खिलाड़ी बने।
2014 में आईबीएसएफ वर्ल्ड-6 रेड स्नूकर चैंपियनशिप का खिताब जीतकर पंकज ने एक और विश्व कीर्तिमान स्थापित किया — बिलियर्ड्स और स्नूकर दोनों खेलों में छोटी और बड़ी, दोनों स्पर्धाओं में विजय प्राप्त करने वाले वे दुनिया के एकमात्र खिलाड़ी बने।
एशियाई खेलों में स्वर्णिम प्रदर्शन
पंकज आडवाणी का एशियाई खेलों में प्रदर्शन भी उतना ही शानदार रहा। उन्होंने 2006 और 2010 के एशियाई खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिलाए, जिससे देश में इस खेल की साख और भी बढ़ी।
राष्ट्रीय सम्मान और विरासत
पंकज की असाधारण उपलब्धियों को भारत सरकार ने भी मान्यता दी। उन्हें 2004 में अर्जुन पुरस्कार, 2006 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न, 2009 में पद्म श्री और 2018 में पद्म भूषण से नवाजा गया। यह ऐसे समय में आया जब भारत में बिलियर्ड्स और स्नूकर को मुख्यधारा के खेलों की तुलना में बेहद कम ध्यान मिलता था। पंकज की सफलताओं ने इस खेल को देश में एक नई पहचान और नई पीढ़ी को प्रेरणा दी।