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सौरव घोषाल: विश्व रैंकिंग टॉप-10 में पहुँचने वाले पहले भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी की प्रेरक गाथा

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सौरव घोषाल: विश्व रैंकिंग टॉप-10 में पहुँचने वाले पहले भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी की प्रेरक गाथा

सारांश

सौरव घोषाल ने वह किया जो पहले किसी भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी ने नहीं किया था — विश्व रैंकिंग के टॉप-10 में जगह बनाई, 10 PSA खिताब जीते और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड समेत कई पदक हासिल किए। अप्रैल 2024 में संन्यास के साथ एक युग का अंत हुआ, लेकिन उनकी विरासत भारतीय स्क्वैश की नींव बन चुकी है।

मुख्य बातें

सौरव घोषाल का जन्म 10 अगस्त 1986 को कोलकाता में हुआ; उन्होंने 2003 में PSA सर्किट पर पदार्पण किया।
2018-19 में वे विश्व रैंकिंग के टॉप-10 में पहुँचने वाले पहले भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी बने।
PSA टूर पर 511 में से 281 मैच जीते; 18 फाइनल में से 10 खिताब हासिल किए।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में सिंगल्स व मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज; दीपिका पल्लीकल के साथ वर्ल्ड डबल्स मिक्स्ड में गोल्ड ।
स्क्वैश में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2007 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित।
अप्रैल 2024 में पेशेवर स्क्वैश से संन्यास लिया।

भारतीय स्क्वैश के सबसे चमकदार नाम सौरव घोषाल ने अपने दो दशक लंबे पेशेवर करियर में जो मुकाम हासिल किए, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। 10 अगस्त 1986 को कोलकाता में जन्मे घोषाल ने अनुशासन और अथक परिश्रम के बल पर भारतीय स्क्वैश को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित किया। अप्रैल 2024 में पेशेवर स्क्वैश से संन्यास लेने तक उन्होंने PSA टूर पर 511 में से 281 मैच जीते और 18 फाइनल में से 10 खिताब अपने नाम किए।

शुरुआती सफर: कोलकाता से चेन्नई तक

घोषाल ने रैकेट थामना कोलकाता रैकेट क्लब में सीखा। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वे चेन्नई स्थित ICL स्क्वैश एकेडमी पहुँचे, जहाँ उन्होंने इस खेल की बारीकियाँ आत्मसात कीं। 2003 में उन्होंने PSA सर्किट पर पदार्पण किया और जल्द ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने लगे।

ऐतिहासिक उपलब्धियाँ और 'पहले भारतीय' के कीर्तिमान

2004 में सौरव ब्रिटिश जूनियर ओपन अंडर-19 स्क्वैश खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने — यह उस दौर का संकेत था जो आगे आने वाला था। 2006 के दोहा एशियन गेम्स में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता।

2013 में उन्होंने वर्ल्ड स्क्वैश चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई — ऐसा करने वाले पहले भारतीय2014 के एशियन गेम्स में सिंगल्स स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर वे फिर इतिहास रचने वाले पहले भारतीय बने। 2018-19 में वे विश्व रैंकिंग के टॉप-10 में पहुँचने वाले पहले भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी बने — यह उपलब्धि भारतीय स्क्वैश के इतिहास में मील का पत्थर मानी जाती है।

अंतिम वर्षों की चमक: कॉमनवेल्थ गोल्ड और PSA खिताब

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में घोषाल ने सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स दोनों स्पर्धाओं में ब्रॉन्ज मेडल जीते। उसी वर्ष वर्ल्ड डबल्स चैंपियनशिप के मिक्स्ड डबल्स इवेंट में उन्होंने दीपिका पल्लीकल के साथ जोड़ी बनाकर गोल्ड मेडल हासिल किया। नवंबर 2021 में मलेशियन ओपन स्क्वैश चैंपियनशिप का फाइनल जीतकर उन्होंने अपना अंतिम PSA खिताब अपने नाम किया।

सम्मान और विरासत

स्क्वैश में उत्कृष्ट योगदान के लिए सौरव घोषाल को 2007 में भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह ऐसे समय में आया जब भारत में स्क्वैश अभी भी मुख्यधारा के खेलों की छाया में था — घोषाल ने उस धारणा को बदलने में अहम भूमिका निभाई।

गौरतलब है कि घोषाल की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है — उन्होंने भारत में स्क्वैश के प्रति युवाओं की रुचि जगाने और इस खेल के ढाँचे को मज़बूत करने में भी योगदान दिया। उनका करियर यह साबित करता है कि सीमित संसाधनों और कम चर्चित खेल में भी अनुशासन और निरंतर मेहनत से वैश्विक शिखर छुआ जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह उस खेल से आया जिसे आज भी ओलंपिक में जगह नहीं मिली है। उनके करियर की उपलब्धियाँ क्रिकेट-केंद्रित मीडिया कवरेज में प्रायः हाशिये पर रहीं, जबकि वे एशियन गेम्स सिल्वर और वर्ल्ड डबल्स गोल्ड जैसे मेडल जीत रहे थे। यह सवाल उठाना ज़रूरी है कि क्या भारत अपने गैर-क्रिकेट चैंपियनों को वह संस्थागत समर्थन और सार्वजनिक पहचान देता है जिसके वे हकदार हैं — क्योंकि घोषाल जैसे खिलाड़ी अपवाद हैं, व्यवस्था की देन नहीं।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौरव घोषाल कौन हैं और उन्होंने स्क्वैश में क्या हासिल किया?
सौरव घोषाल भारत के सबसे सफल स्क्वैश खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 2018-19 में विश्व रैंकिंग के टॉप-10 में पहुँचने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रचा। उन्होंने PSA टूर पर 10 खिताब, एशियन गेम्स सिल्वर, कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक और वर्ल्ड डबल्स गोल्ड सहित अनेक उपलब्धियाँ हासिल कीं।
सौरव घोषाल ने पेशेवर स्क्वैश से संन्यास कब लिया?
सौरव घोषाल ने अप्रैल 2024 में पेशेवर स्क्वैश से संन्यास लिया। अपने करियर में उन्होंने PSA टूर पर 511 में से 281 मैच जीते और 18 फाइनल में से 10 खिताब अपने नाम किए।
सौरव घोषाल को अर्जुन पुरस्कार कब मिला?
सौरव घोषाल को स्क्वैश में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2007 में भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उस समय मिला जब वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए लगातार बड़े टूर्नामेंटों में अपनी पहचान बना रहे थे।
घोषाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में कितने पदक जीते?
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में सौरव घोषाल ने सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स दोनों स्पर्धाओं में ब्रॉन्ज मेडल जीते। उसी वर्ष उन्होंने दीपिका पल्लीकल के साथ वर्ल्ड डबल्स चैंपियनशिप के मिक्स्ड डबल्स इवेंट में गोल्ड मेडल भी हासिल किया।
सौरव घोषाल ने स्क्वैश की शुरुआत कहाँ से की?
सौरव घोषाल ने कोलकाता रैकेट क्लब में स्क्वैश खेलना शुरू किया। स्कूली शिक्षा के बाद वे चेन्नई स्थित ICL स्क्वैश एकेडमी पहुँचे, जहाँ उन्होंने इस खेल की बारीकियाँ सीखीं और 2003 में PSA सर्किट पर पेशेवर करियर की शुरुआत की।
राष्ट्र प्रेस
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