बेंगलुरु में पकड़े 31 बांग्लादेशी अवैध प्रवासी मालदा पहुँचे, BSF को सौंपकर होगा निर्वासन
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक पुलिस के 'ऑपरेशन मुक्त' के तहत बेंगलुरु में गिरफ्तार किए गए 31 बांग्लादेशी नागरिकों को 2 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थानांतरित किया गया है, जहाँ से उन्हें बांग्लादेश वापस भेजने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन सभी के पास कथित तौर पर भारत में वैध उपस्थिति साबित करने वाले दस्तावेज़ नहीं थे और ये रोज़गार की तलाश में बेंगलुरु आए थे।
मुख्य घटनाक्रम
मालदा जिला पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि कर्नाटक पुलिस की टीम मंगलवार देर रात 31 बंदियों के साथ मालदा टाउन स्टेशन पहुँची। इसके बाद इन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस को सौंप दिया गया, जो इन्हें बस से जिले के एक अस्थायी हिरासत केंद्र ले गई।
विशेष निगरानी में कर्नाटक पुलिस के 20 कर्मियों के दल ने ट्रेन से पूरी यात्रा के दौरान इन बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित की। फिलहाल इन्हें बांग्लादेश की सीमा से सटे मालदा के एक अस्थायी हिरासत केंद्र में रखा गया है।
ऑपरेशन मुक्त: कैसे हुई कार्रवाई
कर्नाटक पुलिस ने 9 अगस्त 2026 को 'ऑपरेशन मुक्त' नामक विशेष अभियान चलाया था, जिसका उद्देश्य संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान करना था। इस अभियान में 2,944 लोगों के दस्तावेज़ों का सत्यापन किया गया।
जाँच के दौरान 105 बांग्लादेशी नागरिकों को संदिग्ध अवैध प्रवासी के रूप में चिह्नित किया गया, जिनमें से 31 को बेंगलुरु में गिरफ्तार किया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये सभी पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते कथित तौर पर अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे। इन्हें करीब तीन महीने पहले गिरफ्तार कर बेंगलुरु के एक हिरासत केंद्र में रखा गया था।
निर्वासन की प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, आवश्यक कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद इस समूह को सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपा जाएगा, जो भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा करती है। इसके बाद उन्हें बांग्लादेश वापस भेजा जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध घुसपैठ के विरुद्ध कड़े कदम उठाने का बार-बार आह्वान किया है और वैध दस्तावेज़ों के बिना भारत में प्रवेश करने वालों की पहचान कर उन्हें निर्वासित करने पर ज़ोर दिया है।
पश्चिम बंगाल में बदला प्रशासनिक रुख
गौरतलब है कि इस वर्ष मई 2026 में पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद राज्य प्रशासन ने संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के विरुद्ध निगरानी और कार्रवाई तेज़ कर दी है। हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए कई सीमावर्ती क्षेत्रों में अस्थायी हिरासत केंद्र स्थापित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घुसपैठ के मामले में 'जीरो टॉलरेंस' का रुख अपनाया है और अधिकारी संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई जारी रखे हुए हैं।
आगे क्या होगा
BSF को सौंपे जाने के बाद इन 31 बांग्लादेशी नागरिकों का औपचारिक निर्वासन होने की उम्मीद है। यह मामला अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय और सीमा प्रबंधन की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, जहाँ कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्य ने पश्चिम बंगाल की सीमावर्ती एजेंसियों के साथ मिलकर निर्वासन प्रक्रिया को अंजाम दिया।