8 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बेंगलुरु पुलिस का 'ऑपरेशन मुक्ता': अवैध प्रवासियों की तलाश में 500 से अधिक जवान तैनात

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बेंगलुरु पुलिस का 'ऑपरेशन मुक्ता': अवैध प्रवासियों की तलाश में 500 से अधिक जवान तैनात

सारांश

बेंगलुरु पुलिस का 'ऑपरेशन मुक्ता' महज एक रूटीन जाँच नहीं — यह शहर के तकनीकी गलियारों में कथित तौर पर बसे अवैध विदेशी नागरिकों के विरुद्ध अब तक का सबसे बड़ा सत्यापन अभियान है। 500 से अधिक जवान, 30 से ज़्यादा स्थान, और फर्जी भारतीय दस्तावेजों की जाँच — यह अभियान बेंगलुरु की सुरक्षा चुनौती की गहराई उजागर करता है।

मुख्य बातें

बेंगलुरु पुलिस ने 8 अगस्त 2026 को 'ऑपरेशन मुक्ता' की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान करना है।
500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात; व्हाइटफ़ील्ड , कडुगोडी और महादेवपुरा सहित 30 से अधिक स्थानों पर छापेमारी।
अभियान में अब तक 50 से अधिक संदिग्ध चिह्नित; 4 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की गई।
पुलिस आधार कार्ड और वोटर आईडी की जाँच कर रही है — आशंका है कि कुछ विदेशी नागरिकों ने फर्जी भारतीय दस्तावेज बनवाए हैं।
संदिग्धों की जानकारी FRRO को दी जाएगी; निर्वासन आदेश मिलने पर कानूनी कार्रवाई होगी।
अनधिकृत प्रवास में सहायता करने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई की चेतावनी।

बेंगलुरु पुलिस ने 8 अगस्त 2026 को 'ऑपरेशन मुक्ता' नामक विशेष अभियान की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य शहर के विभिन्न इलाकों में कथित तौर पर रह रहे अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें चिह्नित करना है। बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर शुरू हुए इस अभियान में 500 से अधिक पुलिसकर्मी और अधिकारी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

अभियान के तहत पुलिस टीमों ने व्हाइटफ़ील्ड, कडुगोडी, महादेवपुरा और अन्य इलाकों में छापेमारी कर दस्तावेजों की जाँच की। ये तीनों क्षेत्र बेंगलुरु के प्रमुख टेक्नोलॉजी कॉरिडोर का हिस्सा हैं, जहाँ दर्जनों बहुराष्ट्रीय आईटी और बायोटेक्नोलॉजी कंपनियाँ स्थित हैं। व्हाइटफ़ील्ड डिवीजन में अकेले 30 से अधिक स्थानों पर तलाशी ली गई है।

पुलिस अधिकारी का बयान

व्हाइटफ़ील्ड डिवीजन के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) सिदुल्ला अदावत ने बताया कि यह अभियान बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर के आदेश पर पूरे शहर में एकसाथ चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "अगर किसी संदिग्ध व्यक्ति के पास किसी दूसरे देश का पहचान पत्र या ऐसा कोई सुराग मिलता है जिससे यह पता चले कि वे बिना इजाजत के यहाँ रह रहे विदेशी नागरिक हैं, तो मामले की जानकारी फ़ॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िस (FRRO) को दी जाएगी।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सक्षम अधिकारियों से निर्वासन आदेश मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अब तक की कार्रवाई

पुलिस सूत्रों के अनुसार, अभियान के दौरान अब तक 50 से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों का पता लगाया गया है, जिनमें से 4 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की जा चुकी है। कथित तौर पर खासतौर पर संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ लोगों को उनके संबंधित देशों में वापस भेजा जा चुका है।

फर्जी दस्तावेज़ों पर शक

पुलिस संदिग्धों के आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड की भी गहन जाँच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि कुछ विदेशी नागरिकों ने स्थानीय मददगारों की सहायता से भारतीय पहचान-पत्र हासिल कर लिए होंगे। डीसीपी अदावत ने चेताया कि ऐसे अनधिकृत प्रवास में सहायता करने वालों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आगे क्या होगा

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान निर्बाध रूप से जारी रहेगा और अभियान के दौरान एकत्र किए गए दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन को लेकर प्रशासनिक सतर्कता बढ़ी है। गौरतलब है कि बेंगलुरु जैसे महानगरों में निर्माण और अनौपचारिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर कार्यरत हैं, जिससे सत्यापन प्रक्रिया और भी जटिल हो जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि प्रक्रियागत है — फर्जी आधार और वोटर आईडी की जाँच उस व्यापक तंत्र की विफलता को उजागर करती है जिसने इन दस्तावेजों को जारी होने दिया। बेंगलुरु जैसे महानगर में जहाँ लाखों अंतर-राज्यीय प्रवासी मजदूर वैध रूप से काम करते हैं, वहाँ अवैध और वैध प्रवासी के बीच की रेखा खींचना प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील कार्य है। यह अभियान तब और महत्त्वपूर्ण हो जाता है जब राष्ट्रीय स्तर पर अवैध प्रवास को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है। असली कसौटी यह है कि क्या यह अभियान विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए वास्तविक अवैध प्रवासियों तक पहुँचता है, या निर्दोष प्रवासी मजदूरों पर अनावश्यक दबाव बनाता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन मुक्ता' क्या है और इसे क्यों शुरू किया गया?
'ऑपरेशन मुक्ता' बेंगलुरु पुलिस का एक विशेष सत्यापन अभियान है, जो 8 अगस्त 2026 को शहर में कथित तौर पर रह रहे अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए शुरू किया गया। यह अभियान बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर पूरे शहर में एकसाथ चलाया जा रहा है।
अभियान में अब तक कितने लोगों को चिह्नित किया गया है?
पुलिस सूत्रों के अनुसार अब तक 50 से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों का पता लगाया गया है, जिनमें से 4 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की जा चुकी है। जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं, उनकी आगे जाँच-पड़ताल जारी है।
किन इलाकों में यह अभियान चलाया जा रहा है?
अभियान के तहत व्हाइटफ़ील्ड, कडुगोडी और महादेवपुरा सहित बेंगलुरु के कई प्रमुख इलाकों में छापेमारी हो रही है। व्हाइटफ़ील्ड डिवीजन में अकेले 30 से अधिक स्थानों पर तलाशी ली जा रही है।
अवैध प्रवासी पाए जाने पर क्या कार्रवाई होगी?
संदिग्ध अवैध विदेशी नागरिकों की जानकारी फ़ॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िस (FRRO) को दी जाएगी। सक्षम अधिकारियों से निर्वासन आदेश प्राप्त होने के बाद संबंधित व्यक्तियों को उनके देश वापस भेजा जाएगा।
क्या अवैध प्रवास में मदद करने वालों पर भी कार्रवाई होगी?
हाँ, डीसीपी सिदुल्ला अदावत ने स्पष्ट किया है कि जो स्थानीय निवासी या अन्य व्यक्ति अवैध विदेशी नागरिकों को आश्रय देने या उनकी मदद करने में संलिप्त पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले