79वें कान फिल्म महोत्सव में 'द फ्योर्ड' को पाम डी ओर, मोंग्यू की दूसरी बड़ी जीत
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस के कान शहर में 23 मई 2026 की शाम को 79वें कान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का भव्य समापन हुआ। इस प्रतिष्ठित समारोह में रोमानियाई निर्देशक क्रिस्टियन मोंग्यू की फिल्म 'द फ्योर्ड' ने सर्वोच्च सम्मान पाम डी ओर अपने नाम किया। यह मोंग्यू की इस पुरस्कार पर दूसरी दावेदारी है, जो उन्हें विश्व सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित निर्देशकों की श्रेणी में और मज़बूती से स्थापित करती है।
पुरस्कार विजेता फिल्म की कहानी
'द फ्योर्ड' एक रोमानियाई-नॉर्वेजियन दंपति की संवेदनशील कहानी है, जो ग्रामीण परिवेश में बसने के बाद अपने पड़ोसियों के साथ जटिल सामाजिक संबंधों से गुज़रते हैं। यह फिल्म सांस्कृतिक टकराव और मानवीय संवाद के नाज़ुक धागों को बखूबी उकेरती है। गौरतलब है कि मोंग्यू ने इससे पहले 2007 में अपनी फिल्म 'फोर मंथ्स थ्री वीक्स एंड टू डेज' के लिए पाम डी ओर जीता था — और अब दो दशक बाद यह उपलब्धि दोहराई है।
अन्य प्रमुख पुरस्कार
जर्मन निर्देशक वेलेस्का ग्रिजेबाक की फिल्म 'हेल ग्राइंड' को जूरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। फ्रांसीसी निर्देशक व पटकथा लेखक इमैनुअल मार ने फिल्म 'नोट्रे सैल्यूट' के लिए सर्वश्रेष्ठ पटकथा का पुरस्कार जीता।
सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार इस बार साझा रहा — स्पेनिश निर्देशक जेवियर काल्वो और जेवियर एम्ब्रोसियो ने फिल्म 'द ब्लैक बॉल' के लिए यह सम्मान पाया, जबकि पोलिश निर्देशक पाविल पावलिकोव्स्की ने फिल्म 'फादरलैंड' के लिए इसे साझा किया।
अभिनय पुरस्कार
बेल्जियम के अभिनेता इमैनुएल माचिया और फ्रांसीसी अभिनेता वैलेंटीन कैम्पानेला ने फिल्म 'द कावर्ड' में अपने अभिनय के लिए संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता। सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जापानी निर्देशक रयुसुके हमागुची की फिल्म 'ऑल ऑफ सडन' की दोनों मुख्य अभिनेत्रियों — वर्जिनी एफिला और ताओ ओकामोतो — को संयुक्त रूप से मिला।
महोत्सव का महत्व
कान फिल्म महोत्सव विश्व सिनेमा का सबसे पुराना और सर्वाधिक प्रतिष्ठित मंच माना जाता है। इस वर्ष के पुरस्कारों में यूरोपीय सिनेमा का वर्चस्व स्पष्ट दिखा, जबकि एशियाई सिनेमा की उपस्थिति भी हमागुची की फिल्म के ज़रिए उल्लेखनीय रही। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक फिल्म उद्योग OTT और सिनेमाघरों के बीच संतुलन साधने की कोशिश में जुटा है — और कान जैसे महोत्सव सिनेमाई कला की प्रासंगिकता को बनाए रखने का काम करते हैं।