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आफस्पा 1 अक्टूबर से मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में छह महीने के लिए बढ़ाया गया

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आफस्पा 1 अक्टूबर से मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में छह महीने के लिए बढ़ाया गया

सारांश

केंद्र सरकार ने मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में आफस्पा को 1 अक्टूबर 2026 से छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। मणिपुर में 260 से अधिक मौतों वाली जातीय हिंसा की पृष्ठभूमि में यह फैसला नागरिक संगठनों के विरोध के बावजूद आया है।

मुख्य बातें

गृह मंत्रालय ने 25 सितंबर 2026 को तीन अलग-अलग अधिसूचनाएँ जारी कर मणिपुर , नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में आफस्पा को 1 अक्टूबर 2026 से छह महीने के लिए बढ़ाया।
मणिपुर में इम्फाल घाटी के पाँच जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर पूरा राज्य 'अशांत क्षेत्र' घोषित।
नागालैंड के 9 जिले और 5 अन्य जिलों के 21 थाना क्षेत्र आफस्पा के दायरे में।
अरुणाचल प्रदेश में तिरप , चांगलांग , लोंगडिंग और नामसाई के तीन थाना क्षेत्र शामिल।
3 मई 2023 से मणिपुर में जातीय हिंसा में 260 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
MSF , मेइरा पाइबिस सहित कई संगठन लंबे समय से आफस्पा हटाने की माँग कर रहे हैं।

केंद्र सरकार ने मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (आफस्पा) को अगले छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय (MHA) की ओर से 25 सितंबर 2026 को जारी तीन अलग-अलग अधिसूचनाओं के अनुसार यह विस्तार 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा। राज्यों की कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है।

मणिपुर में क्या लागू होगा

गृह मंत्रालय ने मणिपुर में इम्फाल घाटी के पाँच जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राज्य को 'अशांत क्षेत्र' घोषित किया है। जिन जिलों के कुछ थाना क्षेत्रों को आफस्पा के दायरे से बाहर रखा गया है, उनमें इम्फाल पश्चिम, इम्फाल पूर्व, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग शामिल हैं।

गौरतलब है कि मणिपुर में 3 मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो-ह्मार समुदायों के बीच जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। फरवरी 2025 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, जिसे मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के पदभार संभालने के बाद हटाया गया।

नागालैंड और अरुणाचल में विस्तार

नागालैंड में आफस्पा को नौ जिलों — दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेडिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक, पेरेन और मेलुरी — में अगले छह महीने के लिए बढ़ाया गया है। इसके अलावा कोहिमा, मोकोकचुंग, लोंगलेंग, वोखा और जुन्हेबोटो जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों को भी 'अशांत क्षेत्र' घोषित किया गया है।

अरुणाचल प्रदेश में तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों के साथ-साथ नामसाई जिले के नामसाई, महादेवपुर और चौखाम थाना क्षेत्रों में भी आफस्पा की अवधि 1 अक्टूबर 2026 से अगले छह महीने तक बढ़ा दी गई है।

आफस्पा से मिलने वाले विशेष अधिकार

आफस्पा के तहत अधिसूचित 'अशांत क्षेत्रों' में तैनात सुरक्षा बलों को तलाशी लेने, बिना वारंट गिरफ्तारी करने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक समझे जाने पर बल प्रयोग करने के विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं।

विरोध और नागरिक समाज की आवाज़

पूर्वोत्तर के कई संगठन लंबे समय से आफस्पा हटाने की माँग करते रहे हैं। इनमें मणिपुर स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF), नुपी खुनाई-यैरिपोक और मेइरा पाइबिस शामिल हैं। आलोचकों का कहना है कि यह कानून मानवाधिकारों की दृष्टि से विवादास्पद है और इसे हटाने में देरी स्थानीय असंतोष को और गहरा करती है।

पूर्वोत्तर में आफस्पा की बदलती तस्वीर

यह ऐसे समय में आया है जब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पहले ही घोषित कर चुके हैं कि राज्य के कई हिस्सों से आफस्पा हटाया जा चुका है। बेहतर सुरक्षा स्थिति के कारण त्रिपुरा से 2015, मेघालय से 2018 और मिजोरम से 1980 के दशक में आफस्पा वापस लिया जा चुका है। इस पृष्ठभूमि में मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल में विस्तार पूर्वोत्तर की विभिन्न सुरक्षा स्थितियों को रेखांकित करता है। आने वाले महीनों में इन तीनों राज्यों की ज़मीनी स्थिति में बदलाव आफस्पा की भावी समीक्षा की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

त्रिपुरा और मेघालय में आफस्पा हटाने को 'शांति की उपलब्धि' के रूप में प्रस्तुत किया गया, वहीं मणिपुर में राजनीतिक समाधान के अभाव में कानून ही एकमात्र जवाब बना हुआ है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं उठाती कि आफस्पा का विस्तार सुरक्षा की ज़रूरत को तो मानता है, लेकिन उन समुदायों के भरोसे को नहीं बनाता जो इसे हटाने की माँग कर रहे हैं। जब तक संवाद और राजनीतिक पुनर्मिलन की प्रक्रिया नहीं चलती, हर छह महीने पर यही अधिसूचना एक अस्थायी पट्टी बनती रहेगी।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आफस्पा क्या है और इसे क्यों बढ़ाया गया?
आफस्पा यानी सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम एक कानून है जो 'अशांत क्षेत्रों' में तैनात सुरक्षा बलों को बिना वारंट तलाशी, गिरफ्तारी और बल प्रयोग के अधिकार देता है। गृह मंत्रालय ने राज्यों की कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में इसे 1 अक्टूबर 2026 से छह महीने के लिए बढ़ाने का फैसला किया।
मणिपुर में आफस्पा के दायरे से कौन-से क्षेत्र बाहर हैं?
मणिपुर में इम्फाल पश्चिम, इम्फाल पूर्व, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को आफस्पा के दायरे से बाहर रखा गया है। इन क्षेत्रों को छोड़कर बाकी पूरे राज्य को 'अशांत क्षेत्र' घोषित किया गया है।
मणिपुर में जातीय हिंसा की स्थिति क्या है?
मणिपुर में 3 मई 2023 से मैतेई और कुकी-जो-ह्मार समुदायों के बीच जारी जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। फरवरी 2025 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, जिसे मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के पदभार संभालने के बाद हटाया गया।
नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के किन जिलों में आफस्पा लागू होगा?
नागालैंड में दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेडिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक, पेरेन और मेलुरी सहित नौ जिले और पाँच अन्य जिलों के 21 थाना क्षेत्र आफस्पा के दायरे में आएंगे। अरुणाचल प्रदेश में तिरप, चांगलांग, लोंगडिंग जिले और नामसाई जिले के तीन थाना क्षेत्र 1 अक्टूबर 2026 से आफस्पा के अंतर्गत रहेंगे।
पूर्वोत्तर के किन राज्यों से आफस्पा पहले हटाया जा चुका है?
बेहतर सुरक्षा स्थिति के चलते त्रिपुरा से 2015, मेघालय से 2018 और मिजोरम से 1980 के दशक में आफस्पा हटाया जा चुका है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी घोषित किया है कि राज्य के कई हिस्सों से यह कानून वापस लिया जा चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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