कांगपोकपी बंद: दो कुकी युवकों की हत्या पर COTU का 48 घंटे का शटडाउन, दूसरे दिन भी जनजीवन ठप
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को लगातार दूसरे दिन बंद का असर बना रहा, जब कुकी समुदाय के प्रमुख आदिवासी संगठन 'कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी' (COTU) ने दो कुकी युवकों — टिंगिनलन चोंगलोई (21) और पाओगिनलाल हंगशिंग (20) — की हत्या के मामले में मणिपुर सरकार की कथित निष्क्रियता के विरोध में शटडाउन को 48 घंटे और बढ़ा दिया। दोनों युवक 28 अक्टूबर को लापता हुए थे और उनके शव 1 नवंबर को संयुक्त सुरक्षा बल अभियान के बाद बरामद किए गए थे।
मुख्य घटनाक्रम
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, शटडाउन के कारण कांगपोकपी जिले में दुकानें, बाज़ार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। नेशनल हाईवे-2 (NH-2) के ज़रिए इंफाल जा रहे सामान से लदे कई वाहन कांगपोकपी जिले में प्रवेश नहीं कर सके और पड़ोसी सेनापति जिले में फँसे रहे, जहाँ मुख्य रूप से नागा समुदाय के लोग निवास करते हैं।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के उद्देश्य से पहाड़ी कांगपोकपी जिले में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF), कोबरा, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और असम राइफल्स की संयुक्त टीमों ने कई तलाशी अभियानों के बाद शव बरामद किए थे।
COTU का आरोप और शटडाउन का विस्तार
COTU ने एक बयान में कहा कि शटडाउन इसलिए बढ़ाया गया क्योंकि सरकार का रवैया 'शर्मनाक तरीके से अनिर्णायक' रहा है, उसकी 'चुप्पी अस्वीकार्य है' और वह 'दो निर्दोष कुकी-जो नागरिकों की क्रूर और अमानवीय हत्या' के मामले में न्याय दिलाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई करने में लगातार विफल रही है। संगठन ने स्पष्ट किया कि कुकी-जो समुदाय 'न्याय के बदले खोखले आश्वासनों और प्रशासनिक बहानेबाज़ी' को स्वीकार नहीं करेगा तथा दोषियों के विरुद्ध निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई की माँग की।
गौरतलब है कि शवों के बरामद होने के तुरंत बाद COTU ने रविवार से 24 घंटे के शटडाउन का आह्वान किया था। सोमवार शाम को संगठन ने इसे 48 घंटे और बढ़ाने की घोषणा की।
सरकार की प्रतिक्रिया
मणिपुर की उप मुख्यमंत्री नेमचा किपजेन ने इससे पहले संबंधित अधिकारियों से अपील की थी कि वे लापता दोनों युवकों को खोजने के लिए हर संभव प्रयास करें। अपने एक पूर्व बयान में किपजेन ने तफौ कुकी गाँव के पास से इन युवकों के कथित अपहरण की कड़ी निंदा भी की थी। वरिष्ठ नागा नेता और उप मुख्यमंत्री लोसी डिखो ने भी इन हत्याओं की निंदा की।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार जातीय तनाव को थामने के लिए पहले से दबाव में है और राजनीतिक वर्ग के लिए इस घटना पर ठोस कार्रवाई दिखाना नितांत आवश्यक हो गया है।
व्यापक संघर्ष की पृष्ठभूमि
आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष फरवरी से नागा और कुकी-जो समुदायों के बीच हुई झड़पों में 50 से अधिक लोग मारे गए हैं और दर्जनों घरों को आग लगा दी गई है। यह हिंसा मुख्य रूप से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तामेंगलोंग, नोनी और सेनापति जिलों में केंद्रित रही है।
इससे भी बड़े परिप्रेक्ष्य में, घाटी के मैतेई और पहाड़ी क्षेत्रों के कुकी समुदायों के बीच चल रहा जातीय संघर्ष — जो मई 2023 में भड़का था — अब तक कम-से-कम 310 लोगों की जान ले चुका है। 49 लोग अभी भी लापता हैं और हज़ारों लोग विस्थापित जीवन जीने को मजबूर हैं।
आगे क्या
COTU ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार ठोस कार्रवाई नहीं करती, शटडाउन जारी रहेगा। अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात रहने के बावजूद NH-2 पर आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से आम नागरिकों पर दबाव बढ़ रहा है। संघर्ष प्रभावित मणिपुर में जातीय विभाजन और प्रशासनिक विश्वसनीयता का संकट गहराता जा रहा है।