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कांगपोकपी बंद: दो कुकी युवकों की हत्या पर COTU का 48 घंटे का शटडाउन, दूसरे दिन भी जनजीवन ठप

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कांगपोकपी बंद: दो कुकी युवकों की हत्या पर COTU का 48 घंटे का शटडाउन, दूसरे दिन भी जनजीवन ठप

सारांश

मणिपुर के कांगपोकपी में दो कुकी युवकों की हत्या के बाद COTU का शटडाउन दूसरे दिन भी जारी रहा। मई 2023 से चले आ रहे जातीय संघर्ष में अब तक 310 लोगों की मौत हो चुकी है, और यह ताज़ा घटना उस खुले ज़ख्म पर नया दबाव है जिसे सरकार अब तक भर नहीं पाई।

मुख्य बातें

COTU ने कांगपोकपी जिले में शटडाउन को 48 घंटे और बढ़ाया; 3 नवंबर 2026 को लगातार दूसरे दिन जनजीवन प्रभावित रहा।
लापता टिंगिनलन चोंगलोई (21) और पाओगिनलाल हंगशिंग (20) के शव 1 नवंबर को बरामद हुए; दोनों 28 अक्टूबर को लापता हुए थे।
NH-2 पर सामान से लदे वाहन फँसे; दुकानें, बाज़ार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे।
मणिपुर पुलिस, CRPF , कोबरा, RAF और असम राइफल्स की संयुक्त टीमें तैनात।
मई 2023 से चले आ रहे मैतेई-कुकी जातीय संघर्ष में अब तक 310 लोगों की मौत, 49 लापता , हज़ारों विस्थापित।
इस वर्ष फरवरी से नागा-कुकी-जो झड़पों में 50 से अधिक मौतें दर्ज।

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को लगातार दूसरे दिन बंद का असर बना रहा, जब कुकी समुदाय के प्रमुख आदिवासी संगठन 'कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी' (COTU) ने दो कुकी युवकों — टिंगिनलन चोंगलोई (21) और पाओगिनलाल हंगशिंग (20) — की हत्या के मामले में मणिपुर सरकार की कथित निष्क्रियता के विरोध में शटडाउन को 48 घंटे और बढ़ा दिया। दोनों युवक 28 अक्टूबर को लापता हुए थे और उनके शव 1 नवंबर को संयुक्त सुरक्षा बल अभियान के बाद बरामद किए गए थे।

मुख्य घटनाक्रम

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, शटडाउन के कारण कांगपोकपी जिले में दुकानें, बाज़ार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। नेशनल हाईवे-2 (NH-2) के ज़रिए इंफाल जा रहे सामान से लदे कई वाहन कांगपोकपी जिले में प्रवेश नहीं कर सके और पड़ोसी सेनापति जिले में फँसे रहे, जहाँ मुख्य रूप से नागा समुदाय के लोग निवास करते हैं।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के उद्देश्य से पहाड़ी कांगपोकपी जिले में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF), कोबरा, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और असम राइफल्स की संयुक्त टीमों ने कई तलाशी अभियानों के बाद शव बरामद किए थे।

COTU का आरोप और शटडाउन का विस्तार

COTU ने एक बयान में कहा कि शटडाउन इसलिए बढ़ाया गया क्योंकि सरकार का रवैया 'शर्मनाक तरीके से अनिर्णायक' रहा है, उसकी 'चुप्पी अस्वीकार्य है' और वह 'दो निर्दोष कुकी-जो नागरिकों की क्रूर और अमानवीय हत्या' के मामले में न्याय दिलाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई करने में लगातार विफल रही है। संगठन ने स्पष्ट किया कि कुकी-जो समुदाय 'न्याय के बदले खोखले आश्वासनों और प्रशासनिक बहानेबाज़ी' को स्वीकार नहीं करेगा तथा दोषियों के विरुद्ध निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्रवाई की माँग की।

गौरतलब है कि शवों के बरामद होने के तुरंत बाद COTU ने रविवार से 24 घंटे के शटडाउन का आह्वान किया था। सोमवार शाम को संगठन ने इसे 48 घंटे और बढ़ाने की घोषणा की।

सरकार की प्रतिक्रिया

मणिपुर की उप मुख्यमंत्री नेमचा किपजेन ने इससे पहले संबंधित अधिकारियों से अपील की थी कि वे लापता दोनों युवकों को खोजने के लिए हर संभव प्रयास करें। अपने एक पूर्व बयान में किपजेन ने तफौ कुकी गाँव के पास से इन युवकों के कथित अपहरण की कड़ी निंदा भी की थी। वरिष्ठ नागा नेता और उप मुख्यमंत्री लोसी डिखो ने भी इन हत्याओं की निंदा की।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार जातीय तनाव को थामने के लिए पहले से दबाव में है और राजनीतिक वर्ग के लिए इस घटना पर ठोस कार्रवाई दिखाना नितांत आवश्यक हो गया है।

व्यापक संघर्ष की पृष्ठभूमि

आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष फरवरी से नागा और कुकी-जो समुदायों के बीच हुई झड़पों में 50 से अधिक लोग मारे गए हैं और दर्जनों घरों को आग लगा दी गई है। यह हिंसा मुख्य रूप से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तामेंगलोंग, नोनी और सेनापति जिलों में केंद्रित रही है।

इससे भी बड़े परिप्रेक्ष्य में, घाटी के मैतेई और पहाड़ी क्षेत्रों के कुकी समुदायों के बीच चल रहा जातीय संघर्ष — जो मई 2023 में भड़का था — अब तक कम-से-कम 310 लोगों की जान ले चुका है। 49 लोग अभी भी लापता हैं और हज़ारों लोग विस्थापित जीवन जीने को मजबूर हैं।

आगे क्या

COTU ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार ठोस कार्रवाई नहीं करती, शटडाउन जारी रहेगा। अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात रहने के बावजूद NH-2 पर आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से आम नागरिकों पर दबाव बढ़ रहा है। संघर्ष प्रभावित मणिपुर में जातीय विभाजन और प्रशासनिक विश्वसनीयता का संकट गहराता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

49 लापता और हज़ारों विस्थापित नागरिकों के बावजूद राज्य सरकार की प्रतिक्रिया बार-बार 'निंदा और आश्वासन' तक सिमटती दिखी है — ठोस न्यायिक जवाबदेही कहीं नज़र नहीं आती। इस वर्ष नागा-कुकी-जो झड़पों में 50 से अधिक मौतें यह भी संकेत देती हैं कि हिंसा का भूगोल अब सिर्फ मैतेई-कुकी विभाजन तक नहीं रहा। जब तक केंद्र और राज्य सरकार दोषियों पर समयबद्ध कार्रवाई और पारदर्शी जाँच सुनिश्चित नहीं करतीं, ऐसे शटडाउन और तनाव मणिपुर की नई 'सामान्यता' बनते रहेंगे।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांगपोकपी में COTU ने शटडाउन क्यों बुलाया?
कुकी समुदाय के संगठन COTU ने यह शटडाउन इसलिए बुलाया क्योंकि 28 अक्टूबर को लापता हुए दो कुकी युवकों — टिंगिनलन चोंगलोई और पाओगिनलाल हंगशिंग — के शव 1 नवंबर को बरामद हुए और संगठन का आरोप है कि मणिपुर सरकार ने इस हत्या मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
कांगपोकपी के दो लापता कुकी युवक कौन थे?
लापता युवकों की पहचान टिंगिनलन चोंगलोई (21 वर्ष) और पाओगिनलाल हंगशिंग (20 वर्ष) के रूप में हुई है। कथित तौर पर अज्ञात उपद्रवियों ने 28 अक्टूबर को तफौ कुकी गाँव के पास इनका अपहरण किया था, और 1 नवंबर को संयुक्त सुरक्षा बल अभियान के बाद उनके शव बरामद हुए।
कांगपोकपी बंद का आम जनता पर क्या असर पड़ा?
शटडाउन के कारण कांगपोकपी जिले में दुकानें, बाज़ार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। NH-2 के रास्ते इंफाल जाने वाले सामान से लदे वाहन जिले में प्रवेश नहीं कर सके और पड़ोसी सेनापति जिले में फँसे रहे, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई।
मणिपुर में मैतेई-कुकी जातीय संघर्ष कितना गंभीर हो चुका है?
मई 2023 में शुरू हुए मैतेई-कुकी जातीय संघर्ष में अब तक कम-से-कम 310 लोगों की जान जा चुकी है, 49 लोग अभी भी लापता हैं और हज़ारों लोग विस्थापित हैं। इसके अतिरिक्त इस वर्ष फरवरी से नागा और कुकी-जो समुदायों के बीच अलग झड़पों में 50 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
मणिपुर सरकार ने इस हत्याकांड पर क्या प्रतिक्रिया दी?
मणिपुर की उप मुख्यमंत्री नेमचा किपजेन ने युवकों के लापता होने के बाद अधिकारियों से उन्हें खोजने की अपील की थी और कथित अपहरण की निंदा की थी। उप मुख्यमंत्री लोसी डिखो ने भी हत्याओं की निंदा की, हालाँकि COTU का आरोप है कि सरकार ने दोषियों के विरुद्ध अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
राष्ट्र प्रेस
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