मणिपुर: कांगपोकपी में COTU का 24 घंटे बंद, कुकी-जो समुदाय ने न्याय और सुरक्षा की माँग उठाई
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के कांगपोकपी जिले में कुकी-जो समुदाय के प्रमुख संगठन कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (COTU) ने 20 अक्टूबर 2026 की आधी रात से 21 अक्टूबर 2026 की आधी रात तक 24 घंटे के पूर्ण बंद का आह्वान किया है। संगठन ने यह कदम न्याय, जवाबदेही और समुदाय की सुरक्षा की माँग को लेकर उठाया है। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और जीवनरक्षक स्थितियों को बंद से छूट दी गई है।
बंद की पृष्ठभूमि और कारण
COTU के सूचना एवं प्रचार प्रभाग द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि कुकी-जो समुदाय के लोग लंबे समय से जानमाल के नुकसान, घरों के विनाश, जबरन विस्थापन और असुरक्षा जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। संगठन का आरोप है कि इन कठिनाइयों के बावजूद न्याय सुनिश्चित करने, सुरक्षा बहाल करने और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं।
यह बंद ऐसे समय में घोषित हुआ है जब मणिपुर में जातीय हिंसा से उपजे हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। गौरतलब है कि राज्य में मई 2023 से शुरू हुई हिंसा के बाद विभिन्न समुदायों के बीच तनाव बना हुआ है।
गिरफ्तारियों पर आपत्ति
बयान में तीन मैतेई नागरिकों की हत्या के मामले में कुकी-जो समुदाय के लोगों की कथित तौर पर अंधाधुंध गिरफ्तारी पर गहरी चिंता जताई गई है। COTU का कहना है कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच के ज़रिए संलिप्तता सिद्ध किए बिना इस प्रकार की गिरफ्तारियाँ न्यायसंगत नहीं हैं।
संगठन ने यह भी उल्लेख किया कि NSCN-IM द्वारा पाओलेनमुंग थांगेओ की हत्या ने समुदाय में दर्द और असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है।
नुकसान के आँकड़े
COTU ने अपने बयान में हिंसा से हुए नुकसान के आँकड़े प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि इस संघर्ष में कुकी-जो समुदाय के 32 लोगों की जान गई, 30 गाँव जला दिए गए, 271 मकान नष्ट हुए और 2,516 लोग जबरन विस्थापित हुए। संगठन के अनुसार ये आँकड़े उन परिवारों की पीड़ा को दर्शाते हैं जो अब भी अपना जीवन पटरी पर लाने के लिए संघर्षरत हैं।
बंद का स्वरूप और अपील
COTU ने स्पष्ट किया है कि यह बंद शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। संगठन ने कुकी-जो समुदाय के लोगों से एकजुटता और अनुशासन के साथ बंद में भाग लेने की अपील की है। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और अन्य जीवनरक्षक स्थितियों को छूट दी गई है।
आगे क्या
यह बंद मणिपुर की जटिल जातीय स्थिति में एक और तनावपूर्ण अध्याय जोड़ता है। राज्य और केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विश्लेषकों के अनुसार, स्थायी शांति के लिए सभी समुदायों के बीच संवाद और विश्वास-निर्माण की प्रक्रिया को तेज़ करना अनिवार्य होगा।