मणिपुर के कामजोंग में 15 घर जलाए, कुकी नागरिक जंगलों में भागे; एक की मौत, चार घायल
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के कामजोंग जिले के चस्साद गांव में संदिग्ध उग्रवादियों ने 18 अक्टूबर 2026 को कुकी जनजातीय समुदाय के कम से कम 15 घरों को कथित तौर पर आग के हवाले कर दिया। इससे पहले शनिवार को दिनदहाड़े हुई गोलीबारी में कुकी समुदाय के नागरिक सेइखाओहाओ हाओकिप की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हो गए। आगजनी की घटना के बाद ग्रामीण अपने घर छोड़कर पास के जंगलों और सुरक्षा बलों के एक शिविर में शरण लेने को मजबूर हो गए।
मुख्य घटनाक्रम
शनिवार को दिन में चस्साद गांव में गोलीबारी हुई, जिसमें सेइखाओहाओ हाओकिप की जान गई और चार ग्रामीण घायल हुए। इसके बाद शनिवार देर रात संदिग्ध उग्रवादियों ने कुकी समुदाय के घरों में आग लगा दी। रविवार को स्थानीय सूत्रों और अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की, हालांकि खबर लिखे जाने तक पुलिसकर्मियों की कमी के कारण घटनास्थल का स्वतंत्र निरीक्षण नहीं हो सका था।
इसी रात कामजोंग जिला मुख्यालय में एक अलग घटना में तांगखुल नागा समुदाय के तीन नागरिक — टी. चिथुंग, एस. मालुंग और एम. शिथुंग — गोली लगने से घायल हो गए। बताया गया है कि इस हमले में प्रतिद्वंद्वी सशस्त्र समूह शामिल थे। तीनों को कामजोंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए हाओकिप की मौत पर दुख जताया। उन्होंने घरों को जलाने की घटना को 'असहनीय अपराध' बताया और कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन, राज्य पुलिस तथा सुरक्षा बलों को चौबीसों घंटे सतर्कता बनाए रखने, नागरिकों एवं उनकी संपत्ति की रक्षा करने और हिंसा के जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाने के निर्देश दिए हैं।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और कामजोंग पुलिस की संयुक्त टुकड़ी तैनात की गई है।
कुकी-जो काउंसिल की माँगें
कुकी-जो जनजातीय समुदाय के शीर्ष संगठन कुकी-जो काउंसिल (KZC) ने एक बयान में कहा कि कामजोंग जिले में, विशेष रूप से चस्साद गांव में, सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक रूप से बिगड़ गई है। संगठन के अनुसार, एक सप्ताह से कुछ अधिक समय के भीतर कुकी-जो समुदाय के चार नागरिकों की हत्या हुई है, जो निर्दोष लोगों की सुरक्षा में सरकार की विफलता को उजागर करती है।
KZC ने सवाल उठाया कि नागा राष्ट्रीय समाजवादी परिषद-इसाक मुइवा (NSCN-IM) के कैडरों को कथित तौर पर कामजोंग, उखरुल और चंदेल जिलों में स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति क्यों दी जा रही है, जबकि संघर्षविराम व्यवस्था नागालैंड तक सीमित मानी जाती है। संगठन ने भारत सरकार से इस पर स्पष्टीकरण और तत्काल कार्रवाई की माँग की।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कामजोंग में कुकी-जो नागरिकों को आवश्यक वस्तुएं खरीदने से रोकने वाला आर्थिक प्रतिबंध कथित तौर पर लागू है। उसने पुलिस स्टेशन और चस्साद गांव के बीच केंद्रीय सुरक्षा बलों की तत्काल तैनाती, मृतकों के परिवारों को अनुग्रह राशि और आगजनी में घर गंवाने वाले परिवारों को मुआवजे की माँग की।
संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र
चस्साद गांव और कामजोंग जिला मुख्यालय दोनों भारत-म्यांमार सीमा के निकट स्थित हैं। यह क्षेत्र विभिन्न सशस्त्र समूहों के बीच तनाव के कारण लंबे समय से सुरक्षा संबंधी चिंताओं का केंद्र रहा है। आगजनी से हुए नुकसान की पूरी सीमा, हमलों की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की पहचान की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यह हिंसा ऐसे समय में सामने आई है जब मणिपुर में मई 2023 से जातीय संघर्ष जारी है और राज्य में सामान्य स्थिति की बहाली एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले दिनों में सुरक्षा बलों की तैनाती और जाँच के नतीजे ही यह तय करेंगे कि इस संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।