मणिपुर में ताज़ी हिंसा: कामजोंग-उखरुल में तीन की मौत, पुलिस स्टेशन पर हमले का दावा
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के कामजोंग और उखरुल जिलों में 10 अक्टूबर 2026 को पिछले 24 घंटों में सशस्त्र समूहों के बीच भड़की ताज़ी झड़पों में एक महिला सहित तीन लोगों की मौत हो गई। कांगपोकपी जिले में भी भारी गोलीबारी की खबर है, जबकि कामजोंग पुलिस स्टेशन में आग लगाए जाने का दावा किया जा रहा है — हालाँकि पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रसारित इन खबरों और वीडियो को खारिज किया है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कामजोंग जिले के चासाद गांव में शुक्रवार रात डोमखोनेई तोउथांग नामक 42 वर्षीय महिला — जो पाँच बच्चों की माँ थीं — को गर्दन के पास गोली लगी और कुछ ही मिनटों में उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद कुकी और नागा सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई जो शनिवार सुबह तक जारी रही।
उसी झड़प में माइकल न्गामिनलेन हाओकिप नामक 23 वर्षीय युवक की भी मौत हो गई। हिंसा के दौरान कथित तौर पर दस घरों को आग के हवाले कर दिया गया।
उखरुल जिले में एक अलग घटना में, संदीप राय (40 वर्ष), जो नेपाली समुदाय से ताल्लुक रखते थे, को चेपु याओलेन के निकट संदिग्ध हमलावरों द्वारा उनकी गाड़ी पर गोलीबारी कर मार डाला गया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
चासाद में हिंसा के बाद कामजोंग जिला प्रशासन ने चासाद पुलिस गेट जंक्शन के 400 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। जिला मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है, जिसमें पाँच या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने, आग्नेयास्त्र ले जाने और प्रतिबंधित क्षेत्र में आवागमन पर रोक लगाई गई है। सुरक्षाकर्मियों, ड्यूटी पर तैनात मजिस्ट्रेटों और आवश्यक सेवाओं के कर्मियों को इन प्रतिबंधों से छूट दी गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री का बयान
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में एक ही दिन में हुई हिंसक घटनाओं में सात लोग मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि म्यांमार स्थित संदिग्ध आतंकवादियों ने कथित तौर पर कामजोंग जिले के निंगचो गांव पर हमला किया। सिंह ने कुकी रिवोल्यूशनरी आर्मी (KRA) के कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर घात लगाकर संदीप राय की हत्या का भी उल्लेख किया।
सिंह ने सवाल उठाया: 'हम कितने कमज़ोर हो गए हैं कि सशस्त्र उग्रवादी इतनी बेखौफ होकर लोगों की हत्या कर रहे हैं, पुलिस थानों को जला रहे हैं और भारतीय राज्य की सत्ता को चुनौती दे रहे हैं?' उन्होंने अवैध हथियारों की बरामदगी, सशस्त्र समूहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने की माँग की।
कुकी संगठनों का पक्ष
कुकी संगठनों ने चासाद घटना का एक भिन्न विवरण प्रस्तुत किया है। कुकी मानवाधिकार मंच (KHRF) के अनुसार, हिंसा तब भड़की जब महिलाओं के एक समूह ने गांव के स्वयंसेवकों की कथित गिरफ्तारी और हिरासत के विरोध में प्रदर्शन किया। मंच का दावा है कि डोमखोनेई तोउथांग को इसी विरोध प्रदर्शन के दौरान गोली लगी। कुकी छात्र संगठन और कुकी सीएसओ कार्य समिति, उखरुल सहित कई कुकी संगठनों ने उनकी हत्या की निंदा करते हुए कथित रूप से जिम्मेदार सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
आगे की स्थिति
गौरतलब है कि मणिपुर में यह हिंसा उस दीर्घकालिक जातीय संघर्ष की एक और कड़ी है जो मई 2023 से जारी है और जिसमें अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। कांगपोकपी जिले के मकुई अशंग और तापोन में भी आईटी रोड पर भारी गोलीबारी की खबरें हैं, और दो नागा व्यक्तियों के लापता होने की सूचना है। सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बावजूद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।