मणिपुर के थौबल में सामुदायिक हिंसा: गोली लगने से एक की मौत, कामजोंग में 25 घर जले
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के थौबल जिले के खंगाबोक गाँव में 19 अक्टूबर 2026 की रात दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प में एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई और कई अन्य पथराव में घायल हो गए। घटना के बाद थौबल के जिला मजिस्ट्रेट ने प्रभावित दो गाँवों में रात्रिकालीन निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
घटनाक्रम कैसे शुरू हुआ
पुलिस के अनुसार, रविवार रात राज्य की राजधानी इंफाल से लगभग 25 किलोमीटर दक्षिण में स्थित थौबल पुलिस थाना क्षेत्र के खंगाबोक गाँव में एक संगीत कार्यक्रम चल रहा था। कथित तौर पर लोगों के एक समूह ने उस मैदान पर पथराव शुरू किया, जिसके बाद हिंसा खंगाबोक और पड़ोसी गाँव संगाियुमफम के दो समुदायों के बीच बड़े पैमाने पर भड़क उठी।
झड़प के दौरान अज्ञात उपद्रवियों ने गोलीबारी भी की। एक गोली लैशराम राकेश के सिर में लगी, जिन्हें तुरंत नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके अलावा कई घरों और वाहनों में भी आग लगा दी गई।
निषेधाज्ञा और सुरक्षा बलों की तैनाती
थौबल जिला मजिस्ट्रेट ने रविवार रात भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी की। इसके तहत खंगाबोक और संगाियुमफम के निवासियों को रात 11 बजे के बाद घरों से बाहर न निकलने का निर्देश दिया गया। आदेश में पाबंदियाँ हटाने की समयसीमा नहीं बताई गई है।
हिंसा को और अधिक फैलने से रोकने के लिए प्रभावित गाँवों में राज्य और केंद्र के अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। पुलिस के अनुसार, सोमवार सुबह तक स्थिति नियंत्रण में आ गई थी।
कामजोंग में अलग से 25 घर जले
इसी बीच, पिछले 24 घंटों में मणिपुर के कामजोंग जिले में अलग-अलग घटनाओं में 25 से अधिक घरों में आग लगा दी गई। संदिग्ध उग्रवादियों ने नागा और कुकी समुदायों के इलाकों को निशाना बनाया, जिसके चलते स्थानीय निवासियों को अपने घर छोड़कर जंगलों और पास के सुरक्षा शिविरों में शरण लेनी पड़ी।
रविवार को भारत-म्यांमार सीमा के पास पिलोंग और स्किप गाँवों में अज्ञात उपद्रवियों ने नागा समुदाय के लगभग 14 खाली घरों में आग लगाई। पुलिस के अनुसार, पूर्व में हुए हमलों के बाद इन घरों को पहले ही खाली करा लिया गया था। इन घटनाओं के बाद इन क्षेत्रों में भी अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि मणिपुर में जातीय तनाव की यह घटनाएँ उस लंबे संघर्ष की कड़ी हैं जो मई 2023 से जारी है। राज्य में मैतेई, कुकी-ज़ो, और नागा समुदायों के बीच भूमि, आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें शांति वार्ता के प्रयास जारी रखे हुए हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं।
आगे की स्थिति
प्रशासन ने दोनों प्रभावित क्षेत्रों में शांति-व्यवस्था बहाल करने के लिए सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ाई है। पुलिस ने गोलीबारी और आगज़नी के मामलों में अज्ञात उपद्रवियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जाँच शुरू कर दी है। स्थिति पर नज़र रखी जा रही है और आगे के घटनाक्रम के अनुसार निषेधाज्ञा की समीक्षा की जाएगी।