19 अक्टूबर 2026
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मणिपुर हिंसा: इंफाल पूर्व में आतंकी हमले और थौबल झड़प में तीन की मौत, तीन लापता

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मणिपुर हिंसा: इंफाल पूर्व में आतंकी हमले और थौबल झड़प में तीन की मौत, तीन लापता

सारांश

मणिपुर में एक ही दिन तीन मोर्चों पर हिंसा — इंफाल पूर्व में लकड़ी काटने वालों पर आतंकी हमले में दो की मौत, थौबल में सामुदायिक झड़प में एक और की जान गई, और कामजोंग में 25 से अधिक घर जलाए गए। तीन लोग अब भी लापता हैं और राज्य के कई हिस्सों में सुरक्षा बल तैनात हैं।

मुख्य बातें

इंफाल पूर्व के नोंग्शम के पास पहाड़ी वन क्षेत्र में अज्ञात आतंकवादियों के हमले में दो लकड़ी काटने वालों की मौत , दो घायल।
हमले के बाद से तीन लोग लापता ; शवों की बरामदगी और हमलावरों की तलाश के लिए व्यापक अभियान जारी।
थौबल जिले के खंगाबोक गाँव में दो समुदायों की झड़प में लैशराम राकेश की गोली लगने से मौत; कई घर और वाहन जले।
जिला मजिस्ट्रेट ने BNSS धारा 163 के तहत खंगाबोक और संगायुम्फाम में निषेधाज्ञा लागू की।
कामजोंग जिले में 25 से अधिक घर जलाए गए; पिलोंग और स्किपे में नागा समुदाय के लगभग 14 घरों को आग के हवाले किया गया।
राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियाँ सभी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात।

मणिपुर के इंफाल पूर्व और थौबल जिले में 19 अक्टूबर 2026 को अलग-अलग हिंसक घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई, कई अन्य घायल हो गए और तीन लोग लापता बताए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एक घटना में अज्ञात आतंकवादियों ने लकड़ी काटने वालों पर घात लगाकर हमला किया, जबकि दूसरी घटना दो समुदायों के बीच हुई झड़प से उपजी थी।

नोंग्शम में आतंकी हमला: लकड़ी काटने वालों पर घात

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सोमवार सुबह इंफाल पूर्व के नोंग्शम के समीप पहाड़ी वन क्षेत्रों में लगभग 10 लोग लकड़ी इकट्ठा करने गए थे। इसी दौरान संदिग्ध आतंकवादियों ने उन पर अचानक गोलीबारी की, जिसमें दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए। घटना के बाद से तीन और लोग लापता हैं।

पीड़ितों के शवों को निकालने के प्रयास जारी हैं। अतिरिक्त सुरक्षा बल इलाके में पहुँच चुके हैं और लापता लोगों का पता लगाने तथा हमलावरों को पकड़ने के लिए व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया गया है।

थौबल जिले में सामुदायिक झड़प, निषेधाज्ञा लागू

रविवार रात इम्फाल से लगभग 25 किलोमीटर दक्षिण में स्थित थौबल पुलिस स्टेशन क्षेत्र के खंगाबोक गाँव में हिंसा भड़क उठी। पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों ने कथित तौर पर एक संगीत कार्यक्रम स्थल पर पत्थर फेंके, जिसके बाद खंगाबोक और पड़ोसी संगायुम्फाम के दो समुदायों के बीच पत्थरबाजी शुरू हो गई।

झड़पों के दौरान कुछ घरों और वाहनों में आग भी लगा दी गई। अज्ञात उपद्रवियों द्वारा चलाई गई एक गोली लैशराम राकेश के सिर में लगी, जिन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। पत्थरबाजी में कई अन्य लोग मामूली रूप से घायल हुए।

हिंसा को नियंत्रित करने के लिए थौबल जिला मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत रात 11 बजे से खंगाबोक और संगायुम्फाम में निषेधाज्ञा लागू की। आदेश में असामाजिक तत्वों की कथित गैरकानूनी गतिविधियों और जान-माल को खतरे का हवाला दिया गया है। आदेश में प्रतिबंध हटाने की तिथि स्पष्ट नहीं की गई है।

कामजोंग में 25 से अधिक घर जलाए गए

इस बीच, कामजोंग जिले में पिछले 24 घंटों में अलग-अलग घटनाओं में 25 से अधिक घरों में संदिग्ध उग्रवादियों ने आग लगा दी। हमलों में नागा और कुकी दोनों आबादी वाले क्षेत्रों को निशाना बनाया गया, जिससे नागरिकों को अपने घर छोड़कर जंगलों और पास के एक सुरक्षा शिविर में शरण लेनी पड़ी।

रविवार को भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित पिलोंग और स्किपे गाँवों में अज्ञात हमलावरों ने नागा समुदाय के लगभग 14 खाली घरों में आग लगाई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन घरों को पहले हुए हमलों के बाद छोड़ दिया गया था। घटनाओं के बाद अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

सुरक्षा बलों की तैनाती और मौजूदा स्थिति

पुलिस ने बताया कि सोमवार सुबह तक थौबल में स्थिति नियंत्रण में आ गई थी। राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियाँ प्रभावित इलाकों में तैनात की गई हैं। इंफाल पूर्व में लापता लोगों की तलाश और हमलावरों की धरपकड़ के लिए तलाशी अभियान जारी है।

यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में जातीय हिंसा का दौर लंबे समय से जारी है और राज्य में शांति बहाली की कोशिशें अभी भी चल रही हैं। कामजोंग, इंफाल पूर्व और थौबल में एक साथ हुई ये घटनाएँ बताती हैं कि संघर्ष का भौगोलिक दायरा बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

थौबल और कामजोंग — तीन अलग-अलग जिलों में हिंसा की घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि संघर्ष का दायरा सिकुड़ने के बजाय फैल रहा है। गौरतलब है कि नागा, कुकी और मैतेई — तीनों समुदायों के प्रभावित होने की खबरें हैं, जो यह दर्शाता है कि हिंसा किसी एक जातीय रेखा तक सीमित नहीं रही। भारत-म्यांमार सीमा पर कामजोंग में घरों को जलाया जाना एक नई भौगोलिक जटिलता जोड़ता है जिस पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को जवाब देना होगा। सुरक्षा बलों की तैनाती तात्कालिक प्रतिक्रिया है, लेकिन जब तक राजनीतिक समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, ये घटनाएँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में 19 अक्टूबर को क्या हुआ?
19 अक्टूबर 2026 को मणिपुर के इंफाल पूर्व, थौबल और कामजोंग जिलों में अलग-अलग हिंसक घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई, कई घायल हुए और तीन लोग लापता बताए जा रहे हैं। इंफाल पूर्व में आतंकवादियों ने लकड़ी काटने वालों पर हमला किया, जबकि थौबल में दो समुदायों के बीच झड़प हुई।
इंफाल पूर्व में हमले में कौन मारे गए?
पुलिस के अनुसार नोंग्शम के पास पहाड़ी वन क्षेत्र में लकड़ी इकट्ठा करने गए समूह पर अज्ञात आतंकवादियों ने घात लगाकर हमला किया, जिसमें दो व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
थौबल में निषेधाज्ञा क्यों लगाई गई?
थौबल जिले के खंगाबोक गाँव में एक संगीत कार्यक्रम के दौरान पत्थरबाजी से भड़की सामुदायिक हिंसा के बाद जिला मजिस्ट्रेट ने BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की। इस हिंसा में एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई और कई घर व वाहन जला दिए गए।
कामजोंग में क्या हुआ और कितने घर जले?
कामजोंग जिले में पिछले 24 घंटों में संदिग्ध उग्रवादियों ने 25 से अधिक घरों में आग लगा दी, जिसमें भारत-म्यांमार सीमा के पास पिलोंग और स्किपे गाँवों में नागा समुदाय के लगभग 14 खाली घर शामिल हैं। नागरिकों को जंगलों और सुरक्षा शिविरों में शरण लेनी पड़ी।
लापता तीन लोगों की तलाश कहाँ तक पहुँची?
पुलिस के अनुसार इंफाल पूर्व में आतंकी हमले के बाद से तीन लोग लापता हैं। अतिरिक्त सुरक्षा बल क्षेत्र में पहुँच चुके हैं और लापता लोगों का पता लगाने व हमलावरों को पकड़ने के लिए व्यापक तलाशी अभियान जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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