मणिपुर हिंसा पर खड़गे का BJP पर प्रहार: 300 मौतें, 24,530 विस्थापित — 'न्याय और स्थायी शांति चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को मणिपुर में जारी हिंसा पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि राज्य न्याय, सम्मान, संवैधानिक अधिकारों और स्थायी शांति का हकदार है। यह बयान उस वक्त आया जब 19 अक्टूबर को कांगपोकपी जिले के खोंगबल तंगखुल क्षेत्र में संदिग्ध सशस्त्र उग्रवादियों की गोलीबारी में मैतेई समुदाय के तीन ग्रामीणों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।
ताज़ा घटनाक्रम
मणिपुर पुलिस के अनुसार, 19 अक्टूबर को सगोलमांग पुलिस स्टेशन के अंतर्गत खोंगबल तंगखुल में लकड़ी इकट्ठा करने गए लगभग 14 ग्रामीणों के समूह पर संदिग्ध सशस्त्र आतंकवादियों ने गोलीबारी की। इस हमले में मैतेई समुदाय के तीन ग्रामीणों की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए।
खड़गे ने इस घटना को 'भयावह हत्या' बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। गौरतलब है कि मई 2023 से अब तक मणिपुर में 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 24,530 लोग राहत शिविरों में विस्थापित जीवन जी रहे हैं।
खड़गे के तीखे सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सामने तीन सीधे सवाल रखे। उन्होंने पूछा कि जून 2023 में गठित अमित शाह की शांति समिति का क्या हुआ? इस संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में शांति बहाल करने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए?
खड़गे ने यह भी जानना चाहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति की सिफारिशों पर क्या कार्रवाई की गई। साथ ही, उन्होंने पूछा कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने राहत शिविरों में 31 अप्राकृतिक मौतों का मुद्दा उठाया है, तो हजारों विस्थापित अभी भी शिविरों में क्यों हैं? महिलाओं, बच्चों और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए क्या किया गया?
BJP पर शासन-विफलता का आरोप
खड़गे ने कहा कि BJP की राजनीतिक चालें — चाहे राष्ट्रपति शासन लागू करना हो, मुख्यमंत्री बदलना हो या अपनी सरकार पुनः स्थापित करना हो — शांति लाने में नाकाम रही हैं। उनके अनुसार, तीन वर्षों से अधिक का यह रक्तपात कानून-व्यवस्था, संवैधानिक अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा में BJP की 'घोर विफलता' का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी संसद में दिए गए अपने 'तथाकथित आश्वासन' पर बुरी तरह विफल रहे हैं। खड़गे का कहना है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा और स्थिरता को BJP के राजनीतिक स्वार्थ के लिए बंधक नहीं बनाया जा सकता।
आम जनता पर असर
खड़गे के अनुसार, इस संकट का सबसे अधिक खामियाजा महिलाओं, बच्चों और कमजोर परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। 24,530 से अधिक लोग अभी भी दयनीय परिस्थितियों में राहत शिविरों में जीवन बिता रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सर्वोच्च न्यायालय भी शिविरों में अप्राकृतिक मौतों पर सवाल उठा चुका है।
आगे की राह
कांग्रेस अध्यक्ष ने मोदी और शाह से तत्काल जवाबदेही की माँग की है। फिलहाल मणिपुर पुलिस ताजा हमले की जाँच में जुटी है। राज्य में स्थायी शांति और विस्थापितों के पुनर्वास का मार्ग अभी भी अनिश्चित बना हुआ है — और इस बार विपक्ष ने सरकार को सीधे जवाब देने पर मजबूर किया है।