27 सितंबर 2026
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मणिपुर के सेनापति में दो नागा ग्रामीणों की गोली मारकर हत्या, दो घायल; 48 घंटे में 6 मौतें

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मणिपुर के सेनापति में दो नागा ग्रामीणों की गोली मारकर हत्या, दो घायल; 48 घंटे में 6 मौतें

सारांश

48 घंटों के भीतर मणिपुर में छह नागा नागरिक मारे गए — सेनापति के कलाजन गांव में दो, और कामजोंग के पिलोंग गांव में चार। म्यांमार सीमा से घुसपैठ के आरोप और साल में अब तक 60 से अधिक मौतों के बीच राज्य की कानून-व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है।

मुख्य बातें

सेनापति जिले के कलाजन गांव में 26 सितंबर 2026 को अज्ञात आतंकवादियों ने रॉकी माओ और कुमार पौमाई की गोली मारकर हत्या कर दी।
33 वर्षीय अदानी मानियो और 49 वर्षीय आशीहो सानी घायल, सेनापति के निजी अस्पताल में उपचाराधीन।
दो दिन पहले कामजोंग जिले में चार तांगखुल नागा ग्रामीणों की हत्या — म्यांमार सीमा से घुसे संदिग्ध उग्रवादियों पर आरोप।
पूर्व मुख्यमंत्री एन.
बीरेन सिंह ने बताया कि इस साल अब तक 60 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
अकेले सितंबर में 4 जिलों में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह और पूर्व सीएम बीरेन सिंह सहित कई नेताओं ने हत्याओं की कड़ी निंदा की।

मणिपुर के सेनापति जिले के कलाजन गांव में 26 सितंबर 2026 को अज्ञात आतंकवादियों ने दो नागा ग्रामीणों को गोली मारकर हत्या कर दी और दो अन्य को घायल कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को इस घटना की पुष्टि की। मृतकों की पहचान रॉकी माओ और कुमार पौमाई के रूप में हुई है।

घटनाक्रम का विवरण

पुलिस के अनुसार, सशस्त्र उग्रवादियों ने रात के अंधेरे में कलाजन गांव में घुसकर सोते समय दोनों ग्रामीणों को गोली मार दी। घायलों की पहचान 33 वर्षीय अदानी मानियो और 49 वर्षीय आशीहो सानी के रूप में हुई है, जिन्हें सेनापति जिले के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सेनापति जिला अस्पताल ले जाया गया।

यह घटना कामजोंग जिले में संदिग्ध आतंकवादियों द्वारा चार नागा पुरुषों की हत्या के मात्र दो दिन बाद हुई है, जिससे राज्य में हिंसा का सिलसिला और गहरा हो गया है।

कामजोंग में पहले की हत्याएँ

शुक्रवार को कामजोंग जिले के सुदूर पिलोंग गांव से चार ग्रामीणों के शव बरामद हुए, जो म्यांमार सीमा से लगभग 34 किलोमीटर दूर स्थित है। सभी पीड़ित तांगखुल नागा समुदाय से थे — बेटर्सन जाजो, वेरीशिम जाजो, फामी जाजो (वेरीशिम का पुत्र) और निंगथेम कशाक। स्थानीय निवासियों के अनुसार, गुरुवार 24 सितंबर को म्यांमार से घुसे संदिग्ध आतंकवादियों ने पाँच ग्रामीणों के एक समूह पर हमला किया। उनमें से एक बचकर भागने में सफल रहा और उसने स्थानीय अधिकारियों को सूचित किया। पुलिस और स्थानीय निवासियों की संयुक्त खोज के बाद शव मिले।

नेताओं की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा, 'आज सेनापति जिले के कलाजन गांव में अज्ञात आतंकवादियों द्वारा दो नागरिकों की हत्या और दो अन्य को घायल करने की मैं कड़ी निंदा करता हूं। यह हमला निर्दोष लोगों के खिलाफ हिंसा का एक कायरतापूर्ण कृत्य है।' उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर चेतावनी दी कि 'इस साल की शुरुआत से अब तक 60 से अधिक मौतें हो चुकी हैं और हिंसा का सिलसिला बेरोकटोक जारी है।' उन्होंने सवाल उठाया, 'हम कब तक दोषियों को सजा दिलाने और बिगड़ती कानून व्यवस्था को नियंत्रण में लाने के बजाय शवों की गिनती करते रहेंगे?'

बढ़ती हिंसा का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि अकेले सितंबर 2026 में तामेंगलोंग, कांगपोकपी, नोनी और कामजोंग जिलों में संदिग्ध आतंकवादियों की अलग-अलग गोलीबारी में कम से कम 13 लोग मारे जा चुके हैं। यह हिंसा मुख्यतः नागा बहुल क्षेत्रों में केंद्रित है और म्यांमार सीमा से सटे इलाकों में उग्रवादी घुसपैठ की आशंका लगातार गहराती जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और नागरिक दबाव पहले से ही बना हुआ है।

आगे की स्थिति

पुलिस ने मामले में जाँच शुरू कर दी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। कामजोंग के चारों पीड़ितों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए कामजोंग जिला अस्पताल ले जाया गया। सीमा पार से उग्रवादी गतिविधियों की पृष्ठभूमि में सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि म्यांमार सीमा प्रबंधन और उग्रवादी नेटवर्क के खिलाफ दीर्घकालिक रणनीति की अनुपस्थिति का संकेत है। इस साल 60 से अधिक मौतें और सितंबर में अकेले 13 हत्याएँ यह दर्शाती हैं कि निंदा के बयान पर्याप्त नहीं हैं। सवाल यह है कि केंद्र और राज्य सरकारें सीमापार घुसपैठ रोकने के लिए ठोस खुफिया और अर्धसैनिक समन्वय क्यों नहीं कर पा रहीं। जब तक दोषियों पर मुकदमा नहीं चलता और सीमा सुरक्षा प्रभावी नहीं होती, शोक संवेदनाओं और सोशल मीडिया पोस्ट से कुछ नहीं बदलेगा।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर के सेनापति में 26 सितंबर को क्या हुआ?
सेनापति जिले के कलाजन गांव में अज्ञात आतंकवादियों ने दो नागा ग्रामीणों — रॉकी माओ और कुमार पौमाई — की गोली मारकर हत्या कर दी और दो अन्य को घायल कर दिया। यह घटना शनिवार 26 सितंबर 2026 को हुई, जिसकी पुष्टि पुलिस अधिकारियों ने की।
कामजोंग में हुई हत्याओं का क्या विवरण है?
24 सितंबर को म्यांमार से आए संदिग्ध उग्रवादियों ने कामजोंग जिले के पिलोंग गांव में पाँच ग्रामीणों पर हमला किया, जिसमें चार — बेटर्सन जाजो, वेरीशिम जाजो, फामी जाजो और निंगथेम कशाक — मारे गए। एक ग्रामीण बचकर भागने में सफल रहा और उसने अधिकारियों को सूचित किया।
मणिपुर में इस साल कितनी हिंसक मौतें हुई हैं?
पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक मणिपुर में 60 से अधिक लोगों की हत्या हो चुकी है। अकेले सितंबर में तामेंगलोंग, कांगपोकपी, नोनी और कामजोंग जिलों में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं।
मणिपुर सरकार और नेताओं ने क्या प्रतिक्रिया दी?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने फेसबुक पर हमले को 'कायरतापूर्ण कृत्य' बताते हुए कड़ी निंदा की और घायलों के इलाज की जानकारी दी। पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई और जवाबदेही की माँग की।
क्या म्यांमार से उग्रवादी घुसपैठ की पुष्टि हुई है?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, कामजोंग की घटना में म्यांमार से संदिग्ध आतंकवादी सीमा पार कर भारत में घुसे। हालांकि, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है और जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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