मणिपुर: कामजोंग में चार नागा ग्रामीणों की हत्या, म्यांमार से घुसपैठ का आरोप; CM ने की निंदा
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के कामजोंग जिले में 25 सितंबर 2026 को पिता-पुत्र समेत चार नागा ग्रामीणों के गोली से छलनी शव बरामद किए गए। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पड़ोसी म्यांमार से संदिग्ध उग्रवादियों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ कर गुरुवार को पाँच ग्रामीणों पर हमला किया, जिनमें से एक बचकर भागने में कामयाब रहा। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह और नगा समुदाय संगठनों ने इस नृशंस हत्याकांड की कड़ी निंदा की है।
घटनाक्रम और शवों की बरामदगी
पुलिस और स्थानीय निवासियों की संयुक्त खोज के बाद कामजोंग जिला मुख्यालय से लगभग 34 किलोमीटर दूर, म्यांमार सीमा के निकट एक सुनसान इलाके में स्थित पिलोंग गाँव से शव मिले। मृतकों की पहचान बेटरसन जाजो, वरेइशिम जाजो, उनके बेटे फामी जाजो और निंगथेम काशाक के रूप में हुई है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, घटना के समय पिलोंग बस्ती में पाँच नागरिक पहरा दे रहे थे। हमले के बाद उनमें से एक बचकर निकला और उसने तुरंत अधिकारियों को सतर्क किया, जिससे खोज अभियान शुरू हो सका।
संगठनों के आरोप और सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने तंगखुल समुदाय के चार नागरिकों की हत्या की कड़ी निंदा की और शोकसंतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा, 'हमारे समाज में हिंसा की ऐसी घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं है और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' उन्होंने शोकसंतप्त परिवारों के लिए शक्ति और सांत्वना की प्रार्थना भी की।
नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के मणिपुर प्रदेश अध्यक्ष अवांगबो न्यूमाई ने हत्याओं की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा (KNA-B) के कार्यकर्ता थे। उन्होंने सभी समुदायों से हिंसा त्यागने और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व बनाए रखने की अपील की।
तंगखुल नागा लोंग का बयान और सीमा सुरक्षा पर सवाल
प्रमुख नगा समुदाय संगठन तंगखुल नागा लोंग (TNL) की कार्यकारी समिति ने आरोप लगाया कि KNA-B के सशस्त्र कैडरों और अन्य सशस्त्र तत्वों ने म्यांमार की ओर से नाम्या नदी पार कर पिलोंग में नागरिकों पर हमला किया। संगठन ने इसे कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा पर नागा ग्रामीणों के खिलाफ सीमा पार हिंसा का तीसरा मामला बताया है।
TNL ने सीमा पार घुसपैठ की बार-बार होने वाली घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार तथा असम राइफल्स सहित सीमा सुरक्षा बलों की आलोचना की। संगठन ने कहा कि नगा नागरिक समाज समूह इस मुद्दे को बार-बार अधिकारियों के सामने उठा चुके हैं और सीमावर्ती संवेदनशील गाँवों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की माँग करते रहे हैं।
भौगोलिक संदर्भ और बड़ा खतरा
गौरतलब है कि मणिपुर के पाँच जिले — चुराचंदपुर, तेंगनुपाल, चंदेल, कामजोंग और उखरुल — म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। यह खुली सीमा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती रही है, क्योंकि म्यांमार में जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच सशस्त्र समूहों की गतिविधियाँ बढ़ी हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर पहले से ही आंतरिक जातीय तनाव से जूझ रहा है और सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
जाँच और आगे की स्थिति
पुलिस घटना की जाँच कर रही है और विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है। अधिकारियों ने अभी तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है। आने वाले दिनों में सुरक्षा बलों की तैनाती और सीमा पर गश्त बढ़ाने को लेकर सरकार का कदम अहम होगा।