25 सितंबर 2026
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मणिपुर: कामजोंग में चार नागा ग्रामीणों की हत्या, म्यांमार से घुसपैठ का आरोप; CM ने की निंदा

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मणिपुर: कामजोंग में चार नागा ग्रामीणों की हत्या, म्यांमार से घुसपैठ का आरोप; CM ने की निंदा

सारांश

म्यांमार सीमा से सटे मणिपुर के कामजोंग में चार नागा ग्रामीणों की गोली मारकर हत्या कर दी गई — यह इसी इलाके में सीमा पार हिंसा का तीसरा मामला है। बिना बाड़ की 398 किमी लंबी सीमा और म्यांमार की बिगड़ती स्थिति ने भारत के लिए एक गंभीर सुरक्षा संकट खड़ा कर दिया है।

मुख्य बातें

25 सितंबर 2026 को मणिपुर के कामजोंग जिले के पिलोंग गाँव से पिता-पुत्र समेत चार नागा ग्रामीणों के शव बरामद किए गए।
मृतकों की पहचान बेटरसन जाजो , वरेइशिम जाजो , फामी जाजो और निंगथेम काशाक के रूप में हुई।
शव जिला मुख्यालय से 34 किलोमीटर दूर म्यांमार सीमा के पास मिले; पाँचवाँ ग्रामीण भागने में सफल रहा।
तंगखुल नागा लोंग (TNL) ने इसे कामजोंग में सीमा पार हिंसा का तीसरा मामला बताया; KNA-B पर आरोप।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने हत्याओं की निंदा की और कहा — 'ऐसी हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।' मणिपुर के पाँच जिले म्यांमार के साथ 398 किमी लंबी बिना बाड़ वाली सीमा साझा करते हैं।

मणिपुर के कामजोंग जिले में 25 सितंबर 2026 को पिता-पुत्र समेत चार नागा ग्रामीणों के गोली से छलनी शव बरामद किए गए। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पड़ोसी म्यांमार से संदिग्ध उग्रवादियों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ कर गुरुवार को पाँच ग्रामीणों पर हमला किया, जिनमें से एक बचकर भागने में कामयाब रहा। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह और नगा समुदाय संगठनों ने इस नृशंस हत्याकांड की कड़ी निंदा की है।

घटनाक्रम और शवों की बरामदगी

पुलिस और स्थानीय निवासियों की संयुक्त खोज के बाद कामजोंग जिला मुख्यालय से लगभग 34 किलोमीटर दूर, म्यांमार सीमा के निकट एक सुनसान इलाके में स्थित पिलोंग गाँव से शव मिले। मृतकों की पहचान बेटरसन जाजो, वरेइशिम जाजो, उनके बेटे फामी जाजो और निंगथेम काशाक के रूप में हुई है।

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, घटना के समय पिलोंग बस्ती में पाँच नागरिक पहरा दे रहे थे। हमले के बाद उनमें से एक बचकर निकला और उसने तुरंत अधिकारियों को सतर्क किया, जिससे खोज अभियान शुरू हो सका।

संगठनों के आरोप और सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने तंगखुल समुदाय के चार नागरिकों की हत्या की कड़ी निंदा की और शोकसंतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा, 'हमारे समाज में हिंसा की ऐसी घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं है और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' उन्होंने शोकसंतप्त परिवारों के लिए शक्ति और सांत्वना की प्रार्थना भी की।

नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के मणिपुर प्रदेश अध्यक्ष अवांगबो न्यूमाई ने हत्याओं की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा (KNA-B) के कार्यकर्ता थे। उन्होंने सभी समुदायों से हिंसा त्यागने और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व बनाए रखने की अपील की।

तंगखुल नागा लोंग का बयान और सीमा सुरक्षा पर सवाल

प्रमुख नगा समुदाय संगठन तंगखुल नागा लोंग (TNL) की कार्यकारी समिति ने आरोप लगाया कि KNA-B के सशस्त्र कैडरों और अन्य सशस्त्र तत्वों ने म्यांमार की ओर से नाम्या नदी पार कर पिलोंग में नागरिकों पर हमला किया। संगठन ने इसे कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा पर नागा ग्रामीणों के खिलाफ सीमा पार हिंसा का तीसरा मामला बताया है।

TNL ने सीमा पार घुसपैठ की बार-बार होने वाली घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार तथा असम राइफल्स सहित सीमा सुरक्षा बलों की आलोचना की। संगठन ने कहा कि नगा नागरिक समाज समूह इस मुद्दे को बार-बार अधिकारियों के सामने उठा चुके हैं और सीमावर्ती संवेदनशील गाँवों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की माँग करते रहे हैं।

भौगोलिक संदर्भ और बड़ा खतरा

गौरतलब है कि मणिपुर के पाँच जिले — चुराचंदपुर, तेंगनुपाल, चंदेल, कामजोंग और उखरुल — म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। यह खुली सीमा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती रही है, क्योंकि म्यांमार में जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच सशस्त्र समूहों की गतिविधियाँ बढ़ी हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर पहले से ही आंतरिक जातीय तनाव से जूझ रहा है और सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

जाँच और आगे की स्थिति

पुलिस घटना की जाँच कर रही है और विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है। अधिकारियों ने अभी तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है। आने वाले दिनों में सुरक्षा बलों की तैनाती और सीमा पर गश्त बढ़ाने को लेकर सरकार का कदम अहम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताता है कि यह एक बढ़ता हुआ पैटर्न है, कोई अपवाद नहीं। म्यांमार में सत्ता संघर्ष और सशस्त्र समूहों की बेलगाम गतिविधियों के बीच भारत की 398 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ की सीमा एक खुला जोखिम बनी हुई है। असम राइफल्स और सीमा सुरक्षा बलों पर नागरिक संगठनों की आलोचना यह सवाल उठाती है कि क्या सीमावर्ती गाँवों की सुरक्षा नीति केवल कागजों पर है। जब तक सीमा पर ठोस बुनियादी ढाँचा और खुफिया समन्वय नहीं बनता, ऐसी त्रासदियाँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर के कामजोंग में चार ग्रामीणों की हत्या कैसे हुई?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, म्यांमार से संदिग्ध उग्रवादियों ने भारत में घुसपैठ कर गुरुवार को पाँच ग्रामीणों के समूह पर हमला किया और गोली मार दी। शव 25 सितंबर 2026 को पिलोंग गाँव के पास मिले, जबकि पाँचवाँ ग्रामीण बचकर निकलने में सफल रहा।
हत्या के पीछे किस संगठन पर आरोप है?
नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के प्रदेश अध्यक्ष अवांगबो न्यूमाई और तंगखुल नागा लोंग (TNL) ने कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा (KNA-B) पर आरोप लगाया है। हालाँकि पुलिस अभी जाँच कर रही है और आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
मणिपुर-म्यांमार सीमा पर यह किसवीं बड़ी हिंसक घटना है?
तंगखुल नागा लोंग के अनुसार, यह कामजोंग जिले में भारत-म्यांमार सीमा पर नागा ग्रामीणों के विरुद्ध सीमा पार हिंसा का तीसरा मामला है। संगठन का कहना है कि नागरिक समाज समूह पहले भी इस मुद्दे को अधिकारियों के सामने उठाते रहे हैं।
मणिपुर की म्यांमार के साथ कितनी लंबी सीमा है और यह क्यों संवेदनशील है?
मणिपुर के पाँच जिले — चुराचंदपुर, तेंगनुपाल, चंदेल, कामजोंग और उखरुल — म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली सीमा साझा करते हैं। यह खुली सीमा सशस्त्र समूहों की घुसपैठ को आसान बनाती है, विशेषकर म्यांमार में जारी राजनीतिक अस्थिरता के मद्देनज़र।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने घटना पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने तंगखुल समुदाय के चार नागरिकों की हत्या की कड़ी निंदा की और शोकसंतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, 'हमारे समाज में हिंसा की ऐसी घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं है और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'
राष्ट्र प्रेस
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