मणिपुर के तीन पहाड़ी जिलों में नागा-कुकी हिंसा, मृतक संख्या 9; सीएम युमनाम खेमचंद ने की शांति की अपील
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी जिलों में शुक्रवार और शनिवार को नागा और कुकी सशस्त्र समूहों के बीच भड़की हिंसा में कम-से-कम 9 लोगों की जान चली गई, जिनमें एक महिला भी शामिल है। 11 अक्टूबर 2026 को रविवार को तीनों जिलों से किसी नई झड़प की सूचना नहीं आई, लेकिन तनाव बरकरार रहा। अधिकारियों ने बताया कि इस साल मणिपुर में हुई सांप्रदायिक हिंसाओं में यह सबसे घातक घटनाक्रमों में से एक है।
हिंसा का आगाज़: चासाद गांव में महिला की हत्या
हिंसा की शुरुआत शुक्रवार रात कामजोंग जिले के चासाद गांव से हुई, जहाँ पाँच बच्चों की माँ डोमखोनेई ताउथांग (42 वर्ष) को गर्दन के पास गोली मार दी गई। पुलिस के अनुसार, गोली लगने के कुछ ही मिनटों के भीतर उनकी मौत हो गई। कामजोंग जिला मुख्यतः नागा बहुल है, जबकि चासाद गांव में कुकी समुदाय के लोग बहुसंख्यक हैं।
महिला की हत्या के बाद कुकी और नागा समुदायों के सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार तक जारी रही। इस दौरान एक 23 वर्षीय युवक की भी मौत हो गई और 10 मकानों को आग लगा दी गई। कुकी-जो संगठनों ने महिला की हत्या के लिए सुरक्षा बलों और नागा सशस्त्र समूह को ज़िम्मेदार ठहराया है।
कांगपोकपी और उखरुल में भी हमले
कांगपोकपी जिले में शनिवार को संदिग्ध उग्रवादियों ने टापोन और मकुई गांवों पर हमला किया, जिसमें नागा समुदाय के दो ग्राम रक्षकों — एम. दैमाई और आर. गंगमेई — समेत तीन लोगों की जान गई। तीसरे मृतक की पहचान रिंगकांगमाई के रूप में हुई है। नागा नागरिक संगठन वर्किंग कमेटी जेटीसी मणिपुर ने दावा किया कि 52 वर्षीय ग्रामीण अजिनबौ आर. का उग्रवादियों ने सिर कलम कर दिया और संगठन ने परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए उनका कटा हुआ सिर वापस लौटाने की माँग की।
उखरुल जिले में चेपू याओलेन के पास संदिग्ध उग्रवादियों ने एक वाहन पर गोलीबारी की, जिसमें नेपाली समुदाय के संदीप राय (40 वर्ष) की मौत हो गई। राय उस समय अपनी कार चला रहे थे और वाहन के भीतर ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
भारत-म्यांमार सीमा के पास भी गोलीबारी
कामजोंग जिले के भारत-म्यांमार सीमा के निकट स्थित तांगखुल नागा बहुल निंगचौ गांव में संदिग्ध उग्रवादियों ने गोलीबारी की। अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में नगाचांसो निंगशेन (35 वर्ष) और लेइशिशान लेइशादांग (48 वर्ष) की मौत हो गई। सूचना मिलने पर सुरक्षा बल मौके पर पहुँचे; स्थानीय लोगों ने बताया कि हमलावर म्यांमार की ओर भाग गए।
सीएम की निंदा और शांति की अपील
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने हिंसा और निर्दोष नागरिकों की हत्या की कड़ी निंदा की। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'मैं कामजोंग और कांगपोकपी जिलों में निर्दोष नागरिकों की हत्या और हुई हिंसा की निंदा करता हूँ। मैंने अधिकारियों को स्थिति नियंत्रित करने, शांति एवं कानून-व्यवस्था बहाल करने और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है।'
मुख्यमंत्री ने विभिन्न समुदायों के जनप्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों से आगे आकर संयम बरतने और तनाव कम करने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से शांति, संवाद और आपसी सद्भाव को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रशासनिक कदम
अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित तीनों जिलों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और मणिपुर पुलिस ने गश्त और तलाशी अभियान तेज कर दिए हैं। कामजोंग के जिला मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर पाँच या अधिक लोगों के एकत्र होने, आग्नेयास्त्र ले जाने और प्रतिबंधित क्षेत्र में आवाजाही पर रोक लगा दी है।
यह ऐसे समय में आया है जब स्थानीय लोगों के अनुसार इस साल फरवरी से प्रभावित जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच हुई झड़पों में 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में मकान जलाए जा चुके हैं। हिंसा मुख्य रूप से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तमेंगलोंग और नोनी जिलों के साथ-साथ सेनापति जिले के कुछ हिस्सों में केंद्रित रही है। आने वाले दिनों में स्थिति की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सुरक्षा बल ज़मीन पर कितनी प्रभावी ढंग से तैनात रहते हैं और सामुदायिक नेतृत्व संवाद की पहल करता है या नहीं।