मणिपुर में कुकी-जो शटडाउन 48 घंटे बढ़ा, सोटू ने सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर में कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (सोटू) ने 4 नवंबर 2026 को घोषणा की कि दो कुकी-जो नागरिकों की हत्या के मामले में न्याय की माँग को लेकर जारी टोटल शटडाउन की अवधि अगले 48 घंटे के लिए बढ़ा दी गई है। यह शटडाउन बुधवार शाम 5 बजे समाप्त होने वाला था, परंतु सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण सोटू ने इसे जारी रखने का निर्णय लिया।
शटडाउन बढ़ाने का कारण
सोटू ने अपने प्रेस बयान में कहा कि सरकार ने दो कुकी-जो नागरिकों की हत्या के मामले में न्याय सुनिश्चित करने और मांगों के चार्टर को पूरा करने की दिशा में अब तक कोई निर्णायक और ठोस कदम नहीं उठाया है। समिति के अनुसार, घटना की गंभीरता और कुकी-जो समुदाय की पीड़ा के बावजूद सरकार की प्रतिक्रिया अपेक्षित स्तर की नहीं रही। मांगों पर कार्रवाई में हो रही लगातार देरी ने लोगों में नाराज़गी और बढ़ाई है।
माँगों पर कोई समझौता नहीं
सोटू ने स्पष्ट किया कि सरकार को सौंपा गया मांगों का चार्टर किसी भी तरह के समझौते के अधीन नहीं है। समिति के अनुसार, मांगों में कटौती, चुनिंदा मांगों को लागू करने, आंशिक अनुपालन या किसी भी प्रकार की छूट स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार को बिना किसी देरी के सभी माँगें पूरी करने के लिए निर्णायक कदम उठाने होंगे।
बंद के दौरान कोई छूट नहीं
सोटू ने कहा कि अगले 48 घंटे के बंद के दौरान किसी भी गतिविधि या किसी भी पक्ष को छूट नहीं दी जाएगी। समिति ने सभी संबंधित लोगों से बंद का सख्ती से पालन करने की अपील की है। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर पहले से ही जातीय तनाव और सामाजिक अशांति से जूझ रहा है।
सरकार को चेतावनी
समिति ने चेतावनी दी कि यदि बढ़ाई गई अवधि के भीतर भी सरकार ने निर्णायक कार्रवाई नहीं की, तो कुकी-जो समुदाय अपने लोकतांत्रिक विरोध को और तेज करने के साथ बड़े सामूहिक कदम उठाने के लिए मजबूर होगा। सोटू ने यह भी कहा कि सरकार की निरंतर निष्क्रियता के चलते यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार पर होगी।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि मणिपुर में कुकी-जो और मैतेई समुदायों के बीच जातीय तनाव लंबे समय से बना हुआ है, और इस प्रकार के बंद व विरोध प्रदर्शन राज्य की सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। सोटू की चेतावनी के बाद अब सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी हैं।