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बांग्लादेश में खसरा महामारी: इस साल 1,269 बच्चों की मौत, बुधवार को 6 और जानें गईं

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बांग्लादेश में खसरा महामारी: इस साल 1,269 बच्चों की मौत, बुधवार को 6 और जानें गईं

सारांश

बांग्लादेश में खसरा महामारी ने इस साल 1,269 बच्चों की जान ले ली है। वैक्सीन स्टॉक खत्म होने और टीकाकरण दर में गिरावट के बीच हर दिन नए मामले आ रहे हैं — और यह संकट सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही का भी बन चुका है।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में 4 नवंबर 2026 तक खसरे से 1,269 मौतें (105 पुष्ट + 1,164 संदिग्ध) दर्ज।
बुधवार को 24 घंटे में 6 नई मौतें और 1,325 नए संदिग्ध मामले सामने आए।
कुल संदिग्ध मामले 2,34,148 और पुष्ट मामले 24,150 तक पहुँचे।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के अनुसार मार्च 2026 में खसरा-रूबेला वैक्सीन का स्टॉक समाप्त हो गया था।
यूनिसेफ के माध्यम से अप्रैल में वैक्सीन खरीद पुनः शुरू, लेकिन महामारी नियंत्रण में अभी और समय लगेगा।

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। 4 नवंबर 2026 को ढाका से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार को कम से कम छह बच्चों की खसरे से मौत हो गई, जिससे इस वर्ष अब तक पुष्टि और संदिग्ध मिलाकर कुल 1,269 मौतें दर्ज हो चुकी हैं। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के आँकड़ों के अनुसार, यह संख्या लगातार बढ़ रही है और देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर दबाव बन गई है।

ताज़ा आँकड़े और मामलों की स्थिति

DGHS ने बताया कि बुधवार सुबह तक के पिछले 24 घंटों में 1,325 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 2,34,148 हो गई। इसी अवधि में 77 नए पुष्ट मामले भी दर्ज किए गए, जिससे कुल पुष्ट मामले 24,150 तक पहुँच गए।

मौतों के आँकड़ों पर नज़र डालें तो पुष्टि की गई मौतें 105 पर स्थिर हैं, जबकि संदिग्ध मौतों की संख्या बढ़कर 1,164 हो गई है। हाल की छह मौतों को संदिग्ध खसरा मामलों के रूप में दर्ज किया गया है।

वैक्सीन की कमी और टीकाकरण में अंतर

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पिछले महीने एक साक्षात्कार में इस महामारी के लिए सरकारी लापरवाही और दशकों पुराने टीकाकरण तंत्र के कमज़ोर पड़ने को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के प्रशासनिक और राजनीतिक फैसलों से वैक्सीन की खरीद प्रभावित हुई।

हसीना के अनुसार, मार्च 2026 में बांग्लादेश में खसरा-रूबेला वैक्सीन का स्टॉक समाप्त हो गया था, जिसके बाद टीकाकरण दर में तेज़ गिरावट दर्ज की गई। उनका कथित आरोप है कि सरकार समय पर आपातकालीन टीकाकरण अभियान शुरू करने में विफल रही। उन्होंने मौजूदा तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार की भी आलोचना करते हुए कहा कि बीमारी की गंभीरता स्पष्ट होने के बावजूद अधिकारियों ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए।

हसीना ने कहा, 'एक ऐसी बीमारी से, जिसे रोका जा सकता है, एक हज़ार से ज्यादा बच्चों की मौत होना कोई सामान्य प्रशासनिक विफलता नहीं है।'

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

DGHS में रोग नियंत्रण विभाग के पूर्व निदेशक बे-नज़ीर अहमद ने कहा कि अप्रैल में यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन खरीद दोबारा शुरू होने और आपातकालीन टीकाकरण अभियान चलाने के बावजूद महामारी को जल्द नियंत्रित करना आसान नहीं होगा। यह ऐसे समय में आया है जब बीमारी की रफ़्तार अभी भी तेज़ बनी हुई है।

बांग्लादेश के प्रमुख अख़बार द डेली स्टार के अनुसार, बीमारी के तेज़ी से फैलने की वजह से इसके प्रभाव को कम करने में अभी और समय लग सकता है।

माँगें और आगे का रास्ता

पूर्व प्रधानमंत्री हसीना ने पाँच प्रमुख माँगें रखी हैं: वैक्सीन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना, कमज़ोर और जोखिम वाले समुदायों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान, रियल-टाइम बीमारी निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ करना, बाल स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाना और वैक्सीन खरीद तथा टीकाकरण में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जाँच कराना।

गौरतलब है कि खसरा एक टीके से पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है, फिर भी बांग्लादेश में इस साल बच्चों की मौतों की यह संख्या किसी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का संकेत है। आने वाले हफ्तों में टीकाकरण अभियान की गति और सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि महामारी और कितनी जानें लेती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

269 बच्चों की मौत केवल एक महामारी-विज्ञान की विफलता नहीं है — यह टीकाकरण नीति की संरचनात्मक कमज़ोरी और राजनीतिक अस्थिरता के खतरनाक मेल का परिणाम है। मार्च 2026 में वैक्सीन स्टॉक का खत्म होना और उसके बाद की देरी इस बात का प्रमाण है कि सत्ता-परिवर्तन के दौर में स्वास्थ्य ढाँचे को सबसे पहले नुकसान होता है। विशेषज्ञों की चेतावनी के बाद भी महामारी पर काबू न पा सकना दर्शाता है कि जवाबदेही तंत्र या तो कमज़ोर है या राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। खसरा — एक पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी — से इतनी मौतें, वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय के लिए भी चेतावनी है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरे की महामारी कितनी गंभीर है?
बांग्लादेश में 4 नवंबर 2026 तक खसरे से 1,269 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें 105 पुष्ट और 1,164 संदिग्ध मौतें शामिल हैं। कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 2,34,148 तक पहुँच चुकी है।
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप इतना बड़ा क्यों हुआ?
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के अनुसार, मार्च 2026 में खसरा-रूबेला वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो गया था, जिससे टीकाकरण दर में तेज़ गिरावट आई। विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक विफलताओं ने स्थिति को और बिगाड़ा।
बांग्लादेश की वर्तमान सरकार ने महामारी पर क्या कदम उठाए हैं?
अप्रैल 2026 में यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन खरीद दोबारा शुरू की गई और आपातकालीन टीकाकरण अभियान चलाया गया। हालाँकि, DGHS के पूर्व निदेशक बे-नज़ीर अहमद के अनुसार, महामारी को जल्द नियंत्रित करना अभी भी आसान नहीं होगा।
शेख हसीना ने खसरे की महामारी पर क्या माँगें रखी हैं?
शेख हसीना ने वैक्सीन की निरंतर उपलब्धता, कमज़ोर समुदायों के लिए विशेष अभियान, रियल-टाइम निगरानी प्रणाली, बाल स्वास्थ्य केंद्रों की वृद्धि और वैक्सीन खरीद में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जाँच की माँग की है।
क्या खसरे की यह बीमारी रोकी जा सकती थी?
खसरा एक टीके से पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है। विशेषज्ञों और पूर्व प्रधानमंत्री हसीना दोनों का कहना है कि समय पर टीकाकरण और वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित होती तो इतनी मौतें टाली जा सकती थीं।
राष्ट्र प्रेस
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