अफगानिस्तान का पाकिस्तान पर बड़ा आरोप: नूरिस्तान में 41 लड़ाके ढेर, पाक सेना के 'सीधे मार्गदर्शन' का दावा
सारांश
मुख्य बातें
तालिबान के नेतृत्व वाले अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाया है कि वह सीमा पार घुसपैठ करने वाले सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण, हथियार और सैन्य मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने 29 सितंबर को जारी एक बयान में कहा कि नूरिस्तान प्रांत के कामदेश जिले में हुए अभियान में 41 लड़ाके मारे गए और 62 अन्य को गिरफ्तार किया गया। तालिबान के अनुसार, यह घुसपैठ पाकिस्तानी सेना के 'सीधे मार्गदर्शन और सहयोग' में की गई थी।
नूरिस्तान अभियान: क्या हुआ
दक्षिण अफ्रीकी मीडिया संस्थान इंडिपेंडेंट ऑनलाइन (IOL) और अफगानिस्तान इंटरनेशनल की रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान का दावा है कि कामदेश जिले में मारे गए और पकड़े गए लड़ाके कथित तौर पर आईएसआईएस से जुड़े समूहों से संबंधित थे। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ये लड़ाके पाकिस्तान की सीमा के उस पार से आए थे और उन्हें वहाँ की सैन्य व्यवस्था का समर्थन प्राप्त था।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना अपने यहाँ लड़ाकों की भर्ती और उन्हें हथियार उपलब्ध कराकर अफगानिस्तान में अस्थिरता बढ़ा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच डूरंड रेखा को लेकर तनाव पहले से ही चरम पर है।
भारत, ईरान और पश्चिमी देशों के पुराने आरोप
गौरतलब है कि अफगानिस्तान के ये आरोप नए नहीं हैं — भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने और लश्कर-ए-तैयबा (LET) व जैश-ए-मोहम्मद (JEM) जैसे समूहों का समर्थन करने का आरोप लगाता रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कथित पाकिस्तानी सरकारी तत्वों की भूमिका की ओर इशारा करने वाले साक्ष्य पेश करने का दावा भी किया है।
ईरान ने भी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI पर आतंकियों को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर मोहम्मद अली जाफरी के हवाले से कहा गया है कि 'पाकिस्तान सरकार जानती है कि ये समूह कहाँ सक्रिय हैं और उन्हें पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों का समर्थन मिल रहा है।' ईरान ने जैश अल-अदल के खिलाफ कार्रवाई न होने पर खुद कदम उठाने की चेतावनी भी दी थी।
यूरोपीय देशों के अधिकारियों ने भी समय-समय पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनने को लेकर चिंता जताई है।
हक्कानी नेटवर्क और ऐतिहासिक संदर्भ
रिपोर्टों में याद दिलाया गया है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की तैनाती के दौरान पाकिस्तान पर हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को पनाह देने के आरोप खुलकर सामने आए थे। अमेरिकी संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ के तत्कालीन अध्यक्ष एडमिरल माइक मुलन ने एक बार कहा था, 'हक्कानी नेटवर्क, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी का एक वास्तविक हिस्सा जैसा काम करता है।'
यह वह पृष्ठभूमि है जिसमें अफगानिस्तान के ताज़ा आरोपों को देखा जाना चाहिए। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान ने वर्षों तक चरमपंथी समूहों को पड़ोसी देशों के खिलाफ रणनीतिक साधन के रूप में इस्तेमाल किया, लेकिन समय के साथ यही नेटवर्क उसके लिए भी गंभीर चुनौती बन गया।
क्षेत्रीय अस्थिरता और आगे की राह
विश्लेषकों के अनुसार, अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित करता है। रिपोर्टों में एक विडंबना की ओर भी ध्यान दिलाया गया है — पाकिस्तान अब उन्हीं आरोपों का सामना कर रहा है जो वह पहले खुद अफगानिस्तान पर लगाता था।
फिलहाल पाकिस्तान सरकार की ओर से इन नवीनतम आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया रिपोर्टों में सामने नहीं आई है। क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश इस तनाव को राजनयिक स्तर पर हल करने की दिशा में कोई कदम उठाते हैं या नहीं।