28 जून 2026
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अहमदाबाद के वस्त्राल में 'पर्जन्य यज्ञ': मानसून की देरी पर लोगों ने वरुण देव से माँगी बारिश

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अहमदाबाद के वस्त्राल में 'पर्जन्य यज्ञ': मानसून की देरी पर लोगों ने वरुण देव से माँगी बारिश

सारांश

गुजरात में मानसून की असामान्य देरी के बीच अहमदाबाद के वस्त्राल में स्थानीय लोगों ने 'पर्जन्य यज्ञ' किया — कड़ी धूप में पानी भरे बर्तनों में बैठकर वरुण देव से वर्षा की प्रार्थना। सामान्यतः 12-15 जून तक पहुँचने वाला मानसून इस बार 28 जून तक भी नहीं आया।

मुख्य बातें

अहमदाबाद के वस्त्राल इलाके में 28 जून को 'पर्जन्य यज्ञ' का आयोजन हुआ।
यज्ञ गिरीश कुमार पंडित की देखरेख में स्थानीय समुदाय के सहयोग से संपन्न हुआ।
गुजरात में सामान्यतः 12-15 जून तक मानसून आता है, लेकिन इस वर्ष 28 जून तक नहीं पहुँचा।
मानसून की देरी से पानी की किल्लत और पशु-पक्षियों पर संकट की आशंका जताई गई।
ऋग्वेद , यजुर्वेद और अथर्ववेद में वर्णित इस वैदिक अनुष्ठान में वर्षा देवता पर्जन्य का आह्वान किया जाता है।

अहमदाबाद के वस्त्राल इलाके में 28 जून को स्थानीय लोगों ने 'पर्जन्य यज्ञ' का आयोजन किया — गुजरात में मानसून की असामान्य देरी के बीच वर्षा देवता से अच्छी बारिश की प्रार्थना करने का यह पारंपरिक वैदिक अनुष्ठान है। कड़ी धूप में बड़े-बड़े बर्तनों में पानी भरकर उसमें बैठते हुए श्रद्धालुओं ने वरुण देव का आह्वान किया। इस यज्ञ का आयोजन गिरीश कुमार पंडित की देखरेख में संपन्न हुआ।

मुख्य घटनाक्रम

सामान्यतः गुजरात में 12 से 15 जून के बीच मानसून दस्तक दे देता है, लेकिन इस वर्ष 28 जून तक भी राज्य में मानसून नहीं पहुँचा था। बारिश की अनुपस्थिति से न केवल आम जनजीवन प्रभावित हुआ है, बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी पानी की किल्लत गहराने की आशंका जताई जा रही है।

यज्ञ में शामिल अमित पांड्या ने बताया कि 'पर्जन्य यज्ञ' के अंतर्गत पानी में बैठकर ईश्वर की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा, 'गुजरात में 12-13 जून के आसपास बारिश शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार अभी तक मानसून नहीं आया है। बारिश न होने से लोग गर्मी से परेशान हैं। शास्त्रों के अनुसार हमने यह यज्ञ और पूजन किया है।'

आयोजक का दृष्टिकोण

गिरीश कुमार पंडित ने बताया कि यह यज्ञ विशेष रूप से तब किया जाता है जब वर्षा न हो। उन्होंने कहा, 'पहले राजा-महाराजाओं को ऋषि-मुनि बारिश कराने के लिए पर्जन्य यज्ञ कराने की सलाह देते थे। अगर सच्चे मन से प्रार्थना की जाती है तो बारिश जरूर होती है।' स्थानीय समुदाय के सहयोग से आयोजित इस यज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

आम जनता पर असर

हिमांशु त्रिवेदी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, 'हर साल 15 जून के आसपास बारिश हो जाती थी, लेकिन इस बार अभी तक मानसून नहीं आया है। अगर बारिश नहीं हुई तो आगामी दिनों में पानी की कमी हो जाएगी। पक्षी और जानवर भी पानी के लिए परेशान होंगे।' उन्होंने वरुण देव से प्रार्थना की कि भारत में अच्छी बारिश हो और सभी को सुख-शांति मिले।

पर्जन्य यज्ञ की वैदिक पृष्ठभूमि

'पर्जन्य' शब्द का अर्थ वर्षा के देवता से है। वैदिक साहित्य में पर्जन्य को वर्षा लाने वाले देवता के रूप में मान्यता प्राप्त है। ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद — तीनों में पर्जन्य देवता को प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्रों और यज्ञों का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह यज्ञ परंपरागत रूप से सूखे की स्थिति में या वर्षा में विलंब होने पर आयोजित किया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे गुजरात में मानसून की देरी से किसान और आम नागरिक दोनों चिंतित हैं। आने वाले दिनों में मानसून के पहुँचने पर ही यह तय होगा कि समुदाय की यह सामूहिक प्रार्थना फलीभूत होती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मानसून की चिंताजनक देरी का सामाजिक प्रतिबिंब है — जो बताता है कि मौसम की अनिश्चितता आम जनजीवन को किस हद तक प्रभावित कर रही है। जब 28 जून तक भी गुजरात में मानसून नहीं पहुँचा, तो यह सवाल उठता है कि क्या जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पारंपरिक पैटर्न बदल रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से सूखे की स्थिति या पेयजल संकट से निपटने की तैयारियों पर स्पष्टता का अभाव भी उतनी ही बड़ी चिंता है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पर्जन्य यज्ञ क्या होता है?
पर्जन्य यज्ञ एक वैदिक अनुष्ठान है जो वर्षा की कामना या सूखे से राहत के लिए किया जाता है। इसमें बड़े बर्तनों में पानी भरकर उसमें बैठकर वर्षा देवता पर्जन्य (वरुण देव) की पूजा और प्रार्थना की जाती है। ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद में इस यज्ञ का विस्तृत वर्णन मिलता है।
अहमदाबाद में पर्जन्य यज्ञ क्यों किया गया?
गुजरात में इस वर्ष मानसून असामान्य रूप से देर से आया — जबकि सामान्यतः 12 से 15 जून तक बारिश शुरू हो जाती है, 28 जून तक भी मानसून नहीं पहुँचा था। इसी देरी और गर्मी से परेशान होकर वस्त्राल के स्थानीय लोगों ने यह यज्ञ आयोजित किया।
इस यज्ञ का आयोजन किसने किया?
यह यज्ञ अहमदाबाद के वस्त्राल इलाके में गिरीश कुमार पंडित की देखरेख में स्थानीय समुदाय के सहयोग से 28 जून को आयोजित किया गया।
मानसून की देरी से गुजरात में क्या असर पड़ रहा है?
मानसून की देरी से लोग भीषण गर्मी से परेशान हैं और आगामी दिनों में पानी की कमी की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय निवासियों के अनुसार पशु-पक्षी भी पानी के लिए संकट में हैं।
'पर्जन्य' शब्द का क्या अर्थ है?
'पर्जन्य' शब्द का अर्थ वर्षा का देवता होता है। वैदिक साहित्य में पर्जन्य को वर्षा लाने वाले देवता के रूप में मान्यता दी गई है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए विशेष मंत्रों एवं यज्ञों का विधान बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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