साबरमती रिवरफ्रंट पर 'स्वच्छ साबरमती महाअभियान', मंत्री ऋषिकेश पटेल बोले — स्वच्छता को जन आंदोलन बनाना होगा
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद में 2 जून 2026 को गांधी आश्रम के निकट साबरमती नदी के तट पर 'स्वच्छ साबरमती महाअभियान' का शुभारंभ किया गया। अहमदाबाद नगर निगम और साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की संयुक्त पहल से आयोजित इस अभियान में गुजरात सरकार के कैबिनेट मंत्री ऋषिकेश पटेल, मंत्री दर्शना वाघेला, स्थानीय विधायक, नगर पालिका प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारी, पुलिसकर्मी और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भाग लिया।
मुख्य घटनाक्रम
अभियान के दौरान सभी प्रतिभागियों ने मिलकर साबरमती रिवरफ्रंट पर सफाई की और उपस्थित नागरिकों को स्वच्छता बनाए रखने की शपथ भी दिलाई गई। यह आयोजन केवल एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे नागरिक सहभागिता पर आधारित जन आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया गया।
मंत्री ऋषिकेश पटेल का संदेश
कैबिनेट मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि स्वच्छता लोगों के स्वभाव का हिस्सा बनना चाहिए और मोहल्ला, गली तथा आसपास के क्षेत्र साफ रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कूड़ा प्रबंधन और सफाई पर ध्यान केंद्रित कर रही है, लेकिन इसे लोगों की आदत में शामिल करने के लिए जनता को स्वयं आगे आना होगा।
मंत्री ने आगे कहा कि 'स्वच्छ भारत' के संकल्प को साकार करने के लिए जनभागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने जोर दिया कि यह महाअभियान अहमदाबाद को और अधिक स्वच्छ, सुंदर, हराभरा और सुव्यवस्थित शहर बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम सिद्ध होगा।
एक्स पर साझा किया संदेश
कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए मंत्री ऋषिकेश पटेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा: 'स्वच्छता केवल एक अभियान नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन के मूल्यों और दायित्वों का एक अभिन्न अंग है। एक स्वच्छ परिसर स्वस्थ समाज, जागरूक नागरिक और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला बनता है।'
आम जनता पर असर और आगे की राह
गौरतलब है कि साबरमती रिवरफ्रंट पर इस प्रकार के सफाई अभियान पहले भी चलाए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अभियानों की दीर्घकालिक सफलता तभी संभव है जब नागरिकों में स्वच्छता की आदत स्थायी रूप से विकसित हो, न कि केवल आयोजन के दिन तक सीमित रहे। यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब केंद्र सरकार के 'स्वच्छ भारत मिशन' को एक दशक से अधिक समय हो चुका है और शहरी स्वच्छता सूचकांकों में सुधार की माँग लगातार बनी हुई है।