बिहार में AI से मजबूत होगी न्याय व्यवस्था: CM सम्राट चौधरी का बोधगया सम्मेलन में ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 5 जुलाई 2025 को बोधगया में आयोजित एक राज्य स्तरीय सम्मेलन में घोषणा की कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 14 करोड़ की आबादी वाले बिहार में समयबद्ध और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सम्मेलन की पृष्ठभूमि
यह दो दिवसीय सम्मेलन भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के एकीकृत कार्यान्वयन पर केंद्रित था। सम्मेलन में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची, पटना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और एडवोकेट जनरल सत्यदर्शी संजय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। गौरतलब है कि यह तीनों नए आपराधिक कानून औपनिवेशिक युग की भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लागू हुए हैं।
तकनीकी सुधारों की रूपरेखा
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार थानों को सीसीटीवी कैमरों, डिजिटल उपकरणों और वैज्ञानिक जांच संसाधनों से लैस कर रही है। इसके अतिरिक्त फॉरेंसिक लैब, मोबाइल फॉरेंसिक वैन और वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 112 आपातकालीन सेवा के माध्यम से पुलिस औसतन 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुँच रही है और इसे घटाकर 7 से 8 मिनट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
न्यायपालिका और कार्यपालिका में समन्वय
सम्राट चौधरी ने कहा कि न्याय तभी सार्थक होगा जब न्यायपालिका, पुलिस और कार्यपालिका के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार और न्यायपालिका के बीच नियमित समन्वय बैठकें आयोजित की जाएँ, ताकि जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सके। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में लंबित मामलों की संख्या न्यायिक प्रणाली पर दबाव बना रही है।
सहयोग कार्यक्रम और शिकायत निवारण
मुख्यमंत्री ने 'सहयोग' कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत प्राप्त आवेदनों का 30 दिनों के भीतर निस्तारण अनिवार्य है। यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होती, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधे कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक माह के दूसरे मंगलवार को पटना में राज्य स्तरीय सहयोग शिविर लगाया जाएगा, जहाँ प्रखंड स्तर पर हुए निस्तारण से असंतुष्ट नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।
आगे की राह
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्पीडी ट्रायल, फास्ट ट्रैक कोर्ट और तकनीक-आधारित न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए सरकार हर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि कानून के राज में किया गया निवेश आने वाले वर्षों में बिहार के सुशासन और विकास की नींव बनेगा। बिहार न्यायिक अकादमी के चेयरमैन न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और बिपार्ड के महानिदेशक डॉ. बी. राजेन्दर ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।