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बिहार में AI से मजबूत होगी न्याय व्यवस्था: CM सम्राट चौधरी का बोधगया सम्मेलन में ऐलान

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बिहार में AI से मजबूत होगी न्याय व्यवस्था: CM सम्राट चौधरी का बोधगया सम्मेलन में ऐलान

सारांश

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बोधगया में नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित राज्य सम्मेलन में AI, फॉरेंसिक लैब और डिजिटल निगरानी से न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने का रोडमैप पेश किया। 112 सेवा का रिस्पॉन्स टाइम 10 मिनट से घटाकर 7-8 मिनट करने और सहयोग कार्यक्रम के तहत 30 दिनों में शिकायत निस्तारण का लक्ष्य तय किया गया।

मुख्य बातें

बिहार CM सम्राट चौधरी ने बोधगया में नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।
राज्य की 14 करोड़ आबादी को समयबद्ध न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित।
112 आपातकालीन सेवा का औसत रिस्पॉन्स टाइम 10 मिनट से घटाकर 7-8 मिनट करने का लक्ष्य।
सहयोग कार्यक्रम के तहत आवेदनों का 30 दिनों में निस्तारण अनिवार्य; हर माह के दूसरे मंगलवार को पटना में राज्य स्तरीय शिविर।
थानों में सीसीटीवी , फॉरेंसिक लैब और मोबाइल फॉरेंसिक वैन से वैज्ञानिक जांच को सुदृढ़ किया जा रहा है।
सम्मेलन में सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीश और पटना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश सहित वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 5 जुलाई 2025 को बोधगया में आयोजित एक राज्य स्तरीय सम्मेलन में घोषणा की कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 14 करोड़ की आबादी वाले बिहार में समयबद्ध और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सम्मेलन की पृष्ठभूमि

यह दो दिवसीय सम्मेलन भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के एकीकृत कार्यान्वयन पर केंद्रित था। सम्मेलन में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची, पटना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और एडवोकेट जनरल सत्यदर्शी संजय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। गौरतलब है कि यह तीनों नए आपराधिक कानून औपनिवेशिक युग की भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लागू हुए हैं।

तकनीकी सुधारों की रूपरेखा

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार थानों को सीसीटीवी कैमरों, डिजिटल उपकरणों और वैज्ञानिक जांच संसाधनों से लैस कर रही है। इसके अतिरिक्त फॉरेंसिक लैब, मोबाइल फॉरेंसिक वैन और वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 112 आपातकालीन सेवा के माध्यम से पुलिस औसतन 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुँच रही है और इसे घटाकर 7 से 8 मिनट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

न्यायपालिका और कार्यपालिका में समन्वय

सम्राट चौधरी ने कहा कि न्याय तभी सार्थक होगा जब न्यायपालिका, पुलिस और कार्यपालिका के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार और न्यायपालिका के बीच नियमित समन्वय बैठकें आयोजित की जाएँ, ताकि जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सके। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में लंबित मामलों की संख्या न्यायिक प्रणाली पर दबाव बना रही है।

सहयोग कार्यक्रम और शिकायत निवारण

मुख्यमंत्री ने 'सहयोग' कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत प्राप्त आवेदनों का 30 दिनों के भीतर निस्तारण अनिवार्य है। यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होती, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधे कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक माह के दूसरे मंगलवार को पटना में राज्य स्तरीय सहयोग शिविर लगाया जाएगा, जहाँ प्रखंड स्तर पर हुए निस्तारण से असंतुष्ट नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।

आगे की राह

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्पीडी ट्रायल, फास्ट ट्रैक कोर्ट और तकनीक-आधारित न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए सरकार हर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि कानून के राज में किया गया निवेश आने वाले वर्षों में बिहार के सुशासन और विकास की नींव बनेगा। बिहार न्यायिक अकादमी के चेयरमैन न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और बिपार्ड के महानिदेशक डॉ. बी. राजेन्दर ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति और बजट आवंटन में होगी। राज्य में अदालतों में लंबित मामलों की विशाल संख्या और पुलिस-जनता अनुपात को देखते हुए, तकनीकी घोषणाएँ तब तक अधूरी हैं जब तक उनके साथ ठोस भर्ती और प्रशिक्षण योजना न हो। 'सहयोग' कार्यक्रम की 30-दिन की समयसीमा सराहनीय है, परंतु जवाबदेही तंत्र की स्वतंत्र निगरानी के बिना यह महज प्रशासनिक लक्ष्य बनकर रह सकता है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बोधगया में आयोजित नए आपराधिक कानूनों का सम्मेलन किस बारे में था?
यह दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के एकीकृत कार्यान्वयन पर केंद्रित था। इसका उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया और इसमें सर्वोच्च न्यायालय व पटना उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश भी शामिल हुए।
बिहार में AI का न्याय व्यवस्था में किस तरह उपयोग होगा?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार AI का उपयोग अपराध नियंत्रण, वैज्ञानिक जांच, निगरानी और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा। थानों में सीसीटीवी, डिजिटल उपकरण, फॉरेंसिक लैब और मोबाइल फॉरेंसिक वैन की व्यवस्था की जा रही है।
बिहार की 112 आपातकालीन सेवा के लिए नया लक्ष्य क्या है?
वर्तमान में 112 सेवा के माध्यम से पुलिस औसतन 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुँचती है। सरकार ने इसे घटाकर 7 से 8 मिनट करने का लक्ष्य तय किया है।
सहयोग कार्यक्रम क्या है और इससे आम नागरिकों को कैसे फायदा होगा?
'सहयोग' कार्यक्रम के तहत प्राप्त आवेदनों का 30 दिनों के भीतर निस्तारण अनिवार्य है। समयसीमा में कार्रवाई न होने पर मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई होती है। इसके अलावा हर माह के दूसरे मंगलवार को पटना में राज्य स्तरीय शिविर लगेगा जहाँ प्रखंड स्तर के निस्तारण से असंतुष्ट नागरिक शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
इस सम्मेलन में कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए?
सम्मेलन में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची, पटना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय, बिहार न्यायिक अकादमी के चेयरमैन न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, एडवोकेट जनरल सत्यदर्शी संजय, बिपार्ड के महानिदेशक डॉ. बी. राजेन्दर और गृह सचिव कुंदन कुमार उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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