एआईएडीएमके को बड़ा झटका: पूर्व मंत्री सेम्मालई ने इस्तीफे का ऐलान किया, जयललिता के बाद उपेक्षा का लगाया आरोप

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एआईएडीएमके को बड़ा झटका: पूर्व मंत्री सेम्मालई ने इस्तीफे का ऐलान किया, जयललिता के बाद उपेक्षा का लगाया आरोप

सारांश

एआईएडीएमके में गुटबाजी का एक और शिकार — पूर्व मंत्री सेम्मालई ने इस्तीफे का ऐलान कर पार्टी नेतृत्व पर सीधा निशाना साधा। जयललिता के बाद उपेक्षा और संगठनात्मक अराजकता का आरोप लगाते हुए उन्होंने पूछा: क्या पार्टी को कपूर की तरह खत्म किया जाएगा?

मुख्य बातें

पूर्व मंत्री सेम्मालई ने 18 मई 2025 को एआईएडीएमके से इस्तीफे का ऐलान किया।
इस्तीफे के दो कारण बताए — पार्टी की कार्यप्रणाली से असंतुष्टि और जयललिता के निधन के बाद से हो रही उपेक्षा।
सेम्मालई ने आरोप लगाया कि पार्टी में कई योग्य नेताओं को लगातार अनदेखा किया जा रहा है।
उन्होंने पार्टी की मीडिया और जनता के बीच बिगड़ती छवि पर भी चिंता जताई।
एआईएडीएमके ने इस्तीफे के ऐलान पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कदम पार्टी के नेतृत्व और आंतरिक लोकतंत्र पर बहस को और तेज कर सकता है।

अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) में आंतरिक कलह गहराती जा रही है। इसी कड़ी में पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सेम्मालई ने सोमवार, 18 मई को पार्टी से इस्तीफे का औपचारिक ऐलान किया। उन्होंने अपने निर्णय के पीछे दो प्रमुख कारण गिनाए — पार्टी की कार्यप्रणाली से गहरी असंतुष्टि और पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के बाद से उनके साथ हो रही लगातार उपेक्षा।

इस्तीफे की वजह: क्या कहा सेम्मालई ने

सेम्मालई ने इस्तीफे के ऐलान के साथ एक विस्तृत बयान भी जारी किया। उन्होंने कहा कि पार्टी की मौजूदा दशा उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक है। उनके अनुसार, जयललिता के निधन के बाद से उन्हें कई महत्वपूर्ण अवसरों से जानबूझकर वंचित किया गया, जबकि वे दशकों तक पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम करते रहे।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर कई योग्य और समर्पित नेताओं की अनदेखी की जा रही है और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। उनके अनुसार इस रवैये से कार्यकर्ताओं में भी व्यापक नाराजगी है।

पार्टी की बिगड़ती छवि पर चिंता

सेम्मालई ने एआईएडीएमके की जनता और मीडिया के बीच बिगड़ती छवि पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक समय तमिलनाडु की राजनीति में सबसे मजबूत स्तंभ मानी जाने वाली यह पार्टी आज आंतरिक खींचतान की वजह से उपहास का पात्र बन रही है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, 'एक कपूर को खत्म किया जा सकता है, लेकिन क्या पार्टी को भी इसी तरह खत्म किया जा सकता है?'

यह बयान पार्टी नेतृत्व पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। गौरतलब है कि यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर गुटबाजी और वरिष्ठ नेताओं के बीच असहमति चरम पर है, जिससे पार्टी का भविष्य अनिश्चित दिख रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सेम्मालई के इस कदम से आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर नेतृत्व, आंतरिक लोकतंत्र और संगठनात्मक ढाँचे को लेकर बहस और तेज हो सकती है। यह ऐसी पार्टी के लिए एक और बड़ा झटका है जो पहले से ही विधानसभा चुनावों में मिली हार और संगठनात्मक बिखराव से जूझ रही है।

एआईएडीएमके की चुप्पी

उल्लेखनीय है कि एआईएडीएमके ने सेम्मालई के इस्तीफे के ऐलान पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। पार्टी की यह चुप्पी खुद में सवाल खड़े करती है। आने वाले दिनों में पार्टी का यह आंतरिक संकट और गहरा हो सकता है, खासकर तब जब अन्य वरिष्ठ नेता भी असंतोष जाहिर कर चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह चुप्पी खुद एक जवाब है। तमिलनाडु में विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए एआईएडीएमके को जिस संगठनात्मक एकजुटता की जरूरत है, वह इस तरह के सार्वजनिक विद्रोहों से और कमजोर होती है। सवाल यह नहीं कि सेम्मालई गए — सवाल यह है कि उनके बाद कौन अगला होगा।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्व मंत्री सेम्मालई ने एआईएडीएमके क्यों छोड़ी?
सेम्मालई ने पार्टी की कार्यप्रणाली से असंतुष्टि और पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद से हो रही अपनी उपेक्षा को इस्तीफे के दो प्रमुख कारण बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी में योग्य नेताओं को लगातार अनदेखा किया जा रहा है।
एआईएडीएमके में आंतरिक कलह की मौजूदा स्थिति क्या है?
पार्टी में गुटबाजी और वरिष्ठ नेताओं के बीच असहमति चरम पर है, जिससे संगठनात्मक एकता पर सवाल उठ रहे हैं। सेम्मालई का इस्तीफा इस संकट की ताज़ा कड़ी है, और राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह नेतृत्व पर बहस को और तीव्र करेगा।
एआईएडीएमके ने सेम्मालई के इस्तीफे पर क्या प्रतिक्रिया दी?
18 मई तक एआईएडीएमके ने इस इस्तीफे के ऐलान पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पार्टी की यह चुप्पी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके की स्थिति कैसी रही है?
जयललिता के निधन के बाद से पार्टी में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी रही है और कई वरिष्ठ नेता असंतोष जताते रहे हैं। सेम्मालई के अनुसार इस दौरान निष्ठावान कार्यकर्ताओं और नेताओं की उपेक्षा की गई, जिसने पार्टी की एकजुटता को कमजोर किया।
सेम्मालई के इस्तीफे का एआईएडीएमके पर क्या असर पड़ेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से पार्टी के भीतर नेतृत्व और आंतरिक लोकतंत्र पर बहस तेज होगी। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही संगठनात्मक बिखराव और जनता के बीच बिगड़ती छवि से जूझ रही है।
राष्ट्र प्रेस
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